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GST काउंसिल की अगली मीटिंग 4 मई को, रिटर्न फाइलिंग का सरलीकरण एजेंडे में शामिल

रिटर्न के सरलीकरण, जीएसटीएन को सरकारी कंपनी में तब्दील करने के एजेंडे के साथ जीएसटी काउंसिल की मीटिंग 4 मई को होगी।

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नई दिल्ली. रिटर्न फाइलिंग के सरलीकरण, जीएसटीएन को सरकारी कंपनी में तब्दील करने के एजेंडे के साथ जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग 4 मई को होगी। इस मीटिंग में चीनी पर सेस लगाने सहित कई अहम फैसले होने की उम्मीद है। फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

 

चीनी पर भी लग सकता है सेस

जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग का एजेंडा तय हो गया है। एजेंडे में रिटर्न फाइलिंग को सरल बनाने यानी सिंगल फॉर्म व्यवस्था लागू करने, जीएसटीएन को सरकारी कंपनी में तब्दील करने का मुद्दा शामिल है।

हालांकि ऐसी भी चर्चा है कि चीनी पर सेस लगाने का फैसला भी लिया जा सकता है। दरअसल चीनी की कीमतें काफी गिर चुकी हैं और चीनी मिलों के लिए कॉस्ट की भरपाई करना भी मुश्किल हो रहा है। माना जा रहा है कि सेस लगाकर सरकार किसानों और चीनी मिलों की समस्या को कम करेगी।

 

जीएसटी लागू होने के बाद खत्म हुआ सेस

इससे पहले सरकार ने चीनी मिलों पर प्रति क्विंटल 124 रुपए का सेस लगाया था, जिसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाला गया था। सेस के माध्यम से मिली रकम को फूड मिनिस्ट्री द्वारा मैनेज किए जा रहे शुगर डेवलपमेंट फंड में जाता है, जिसे मिलों के आधुनिकीकरण और विस्तार में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अब सेस लागू नहीं है, क्योंकि जुलाई में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स रेजीम लागू होने के साथ ही अधिकांश इनडायरेक्ट टैक्स उसी में मिल गए थे।

 

जीओएम ने दिया प्रस्ताव

हाल में एक ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने चीनी की कीमतों को सपोर्ट देने और गन्ना बकाये में कमी लाने में मदद करने के लिए आउटपुट लिंक्ड सब्सिडी और चीनी पर सेस लगाने का प्रस्ताव किया था।  

 

रिकॉर्ड प्रोडक्शन से कीमतों पर बढ़ा प्रेशर

एक साल पहले की तुलना में इस सीजन में प्रोडक्शन 1 करोड़ टन बढ़कर 3.1 करोड़ टन के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद चीनी की थोक कीमतें 28 महीने के लो पर पहुंच गई थी। सरकार ने सरप्लस से निजात पाने के वास्ते मिलों के लिए चीनी का एक्सपोर्ट अनिवार्य कर दिया है।

हालांकि ग्लोबल मार्केट में चीनी की कीमतों पर प्रेशर बना हुआ है, ऐसे में शुगर इंडस्ट्री एक्सपोर्ट पर सरकार से सब्सिडी की मांग कर रही है।

 
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