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सरकार की एक्सपोर्टर्स को बड़ी सौगात, IGST-कम्पन्सेशन सेस से छूट 2020 तक बढ़ाई

चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा फैसला

Govt extends IGST, compensation cess exemption under various export promotion plans

चुनाव से पहले सरकार ने एक्सपोर्टर्स को बड़ी सौगात दी। सरकार ने चुनिंदा एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम्स के अंतर्गत गुड्स की खरीद करने वाले एक्सपोर्टर्स के वास्ते मार्च 2020 तक के लिए आईजीएसटी (Integrated Goods and Service Tax) और कम्पन्सेशन सेस से छूट एक्सटेंड कर दी है।

नई दिल्ली. चुनाव से पहले सरकार ने एक्सपोर्टर्स को बड़ी सौगात दी। सरकार ने चुनिंदा एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम्स के अंतर्गत गुड्स की खरीद करने वाले एक्सपोर्टर्स के वास्ते मार्च 2020 तक के लिए आईजीएसटी (Integrated Goods and Service Tax) और कम्पन्सेशन सेस से छूट एक्सटेंड कर दी है।

 

इन एक्सपोर्टर्स को मिलेगी छूट

एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट (EOU) स्कीम, एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) स्कीम और अग्रिम अधिकार (एडवांस आथराइजेशन) के अंतर्गत घरेलू स्तर पर कच्चा माल (इनपुट्स) खरीदने या निर्यात के उद्देश्य से आयात करने वाले एक्सपोर्टर्स को ही यह छूट दी गई है।

 

इन योजनाओं के तहत मिलेगा फायदा

ईपीसीजी एक निर्यात प्रोत्साहन योजना है, जिसके अंतर्गत एक एक्सपोर्टर निर्यात से संबंधित टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने के लिए जीरो ड्यूटी पर चुनिंदा कैपिटल गुड्स का आयात कर सकता है। दूसरी तरफ, इनपुट्स के ड्यूटी फ्री आयात के लिए एडवांस ऑथराइजेशन जारी किया जाता है, जिसे एक्सपोर्ट प्रोडक्ट में ही गिना जाता है।
इस पहल का उद्देश्य निर्यातकों को राहत देना है, क्योंकि उन्हें शुरुआत में आईजीएसटी का भुगतान नहीं करना होता है। जीएसटी रेजीम में उन्हें इनडायरेक्ट टैक्स देना होता है और फिर वे रिफंड लेते हैं, जिसकी एक जटिल प्रक्रिया है।

 

31 मार्च, 2020 तक के लिए बढ़ाई छूट

एक नोटिफिकेशन में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने कहा कि फॉरेन ट्रेड पॉलिसी 2015-20 की ऑथराइजेशन स्कीम, ईओयू और ईपीसीजी आईजीएसटी और कम्पन्सेशन सेस से छूट को 31 मार्च, 2020 तक के लिए एक्सटेंड कर दिया गया है।

 

आयात-निर्यात की यह है स्थिति

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-फरवरी के दौरान निर्यात 8.85 फीसदी बढ़कर 298.47 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जबकि आयात 9.75 फीसदी बढ़कर 464 अरब डॉलर हो गया। वहीं वित्त वर्ष के 11 महीनों के दौरान ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 165.52 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले की समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा 148.55 अरब डॉलर रहा था।

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