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GST पैनल की मीटिंग आज, रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाने पर इंडस्ट्री से होगी बात

गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) रिटर्न फाइलिंग के सरलीकरण पर काम करने के लिए बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अगु

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नई दिल्ली. गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) रिटर्न फाइलिंग के सरलीकरण पर काम करने के लिए बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अगुआई में बने मिनिस्ट्रीयल पैनल की मीटिंग मंगलवार को होगी। इस दौरान जीएसटी पैनल टैक्स एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों से मिलेगा, जिसमें रिटर्न को सरल बनाने के बारे में चर्चा होगी।

 


रिटर्न फॉर्म को किया जाना है फाइनल
जीएसटी के अंतर्गत कारोबारियों के लिए एक पेज के रिटर्न फॉर्म को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है. इसलिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों से उनकी राय मांगेगा। जीओएम उनसे पूछेगा कि वे रिटर्न फॉर्म में क्या चाहते हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी के साथ ही नंदन नीलेकणी द्वारा तैयार किए गए स्ट्रक्चर के मुताबिक, लगातार 6 महीने तक टैक्स लायबिलिटी जीरो होने पर कारोबारियों को साल में सिर्फ दो बार रिटर्न फाइल करने की अनुमति मिल सकती है।


 

बढ़ाई जाएगी रिटर्न फाइलिंग की डेट 
रिटर्न फाइलिंग डेट आगे बढ़ाई जाएगी और साथ ही सालाना 1.5 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को अगले महीने की 10 तारीख को रिटर्न फाइल करना होगा, जबकि अन्य 20 तारीख को रिटर्न फाइल कर सकते हैं। छोटे और बड़े टैक्सपेयर्स द्वारा फाइल किए जाने वाले रिटर्न की संख्या साल में 12 होगी।

 

 

जून के बाद लागू होगा नया सिस्टम 
वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता और राज्यों के वित्त मंत्रियों की मौजूदगी वाली जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों से जून तक समरी रिटर्न- 3बी और फाइनल सेल्स रिटर्न -1 जून तक फाइल करने के लिए कहा है, जिसके बाद रिटर्न फाइलिंग का नया सिस्टम लागू हो जाएगा। इसके अलावा जीएसटी के अंतर्गत रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म पर जीओएम की पहली मीटिंग सोमवार को हुई। 

 

 

रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म पर भी होगी बात 
बीते महीने रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म के अंतर्गत कारोबारियों के सामने आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए मोदी की अगुआई में जीओएम का गठन किया गया था। जीएसटी काउंसिल ने जून तक के लिए रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म को टाल दिया है।

 

मिले थे ये सुझाव
केंद्र और राज्यों के अधिकारियों को मिलाकर बनी लॉ रिव्यू कमिटी ने रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म को ध्यान में रखते हुए कंपोजिशन स्कीम लाकर सेंट्रल जीएसटी एक्ट के सेक्शन 9 (3) पर दुबारा काम करने का सुझाव दिया था। यह भी सुझाव दिया गया कि काउंसिल को चुनिंदा गुड्स और सर्विसेस के नाम का उल्लेख किया जाना चाहिए, जिन पर जीएसटी रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म के माध्यम से वसूला जाएगा और टैक्सपेयर्स की कैटेगरी का भी उल्लेख हो, जिन्हें इस प्रोसेस के तहत टैक्स का भुगतान करना चाहिए।
अनरजिस्टर्ड डीलर के लिए कमेटी ने पैन, आधार या ऐसे किसी अन्य पहचान प्रमाण के आधार पर जानकारियां इकट्ठी करने का सुझाव दिया था। 

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