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असम-राजस्थान में भी लागू होगा ई-वे बिल, लिस्ट में शामिल होंगे कुल 20 राज्य

इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू करने वाले राज्यों की लिस्ट में जल्द ही दो अन्य राज्य शामिल होने जा रहे हैं।

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नई दिल्ली. इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू करने वाले राज्यों की लिस्ट में जल्द ही दो अन्य राज्य शामिल होने जा रहे हैं। सरकार ने असम में 16 मई से और राजस्थान में 20 मई से इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू करने का ऐलान किया है। अभी तक देश के 18 राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों में इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू हो चुका है। अब असम और राजस्थान के साथ इस बिल को लागू करने वाले राज्यों की संख्या बढ़कर 20 हो जाएगी। इन राज्यों के अंदर भी 50 हजार रुपए से अधिक का माल ट्रांसपोर्ट करने पर ई-वे बिल बनवाना अनिवार्य होगा।

 

 

18 राज्यों में लागू हो चुका है इंट्रा स्टेट ई-वे बिल
अभी तक देश के 18 राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पुड्डुचेरी में इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू हो चुका है। ई-वे बिल बिना किसी परेशानी के लागू होने के बाद सरकार इसे राज्यों में फेज वाइज लागू कर रही है।

 
 
4.15 करोड़ ई-वे बिल हुए जेनरेट
अब ई-वे बिल लागू होने के साथ ही देश में गुड्स का ट्रांसपोर्टेशन आसान हो गया है। 13 मई तक देश में 4.15 करो़ड़ से ज्यादा ई-वे बिल सफलतापूर्वक जेनरेट हो चुके हैं, जिनमें गुड्स की इंट्रा-स्टेट मूवमेंट के लिए जारी 1 करोड़ से ज्यादा ई-वे बिल भी शामिल हैं।

 

 

इंटर स्टेट की तरह ही बनेगा इंट्रा स्टेट ई-वे बिल
अब इन राज्यों में 50 हजार रुपए से अधिक कीमत के गुड्स की सप्लाई राज्य के अंदर भी करने पर ई-वे बिल बनाना होगा। सरकार ने बिल जेनरेशन आसान हो उसके लिए इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट बिल बनाने के फार्मेट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। कारोबारी को केवल इंट्रा स्टेट बिल बनाते समय केवल दूरी को बदलना होगा। इसके पहले इंटर स्टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल 2018 से सरकार लागू कर चुकी है।

 

 

आगे पढ़ें -क्या है इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट ई-वे बिल

 

 

क्या है इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट ई-वे बिल

राज्य के अंदर ही स्टॉक ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा, जबकि एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा।

 

 

इंट्रा स्टेट ई-वे बिल किसे है बनाना?

इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 50 हजार रुपए से ज्‍यादा का सामान ले जाने वाले अनरजिस्टर्ड कारोबारी, रजिस्टर्ड कारोबारी, डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स को जेनरेट करना होगा।

 

 

इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन

आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना और उत्‍तर प्रदेश राज्‍यों के कारोबारी, डीलर, इंडस्‍ट्री और ट्रान्‍सपोर्टर्स के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के तहत रजिस्‍ट्रेशन अभी भी चल रहा है। कारोबारी ई-वे बिल पोर्टल https://www.ewaybillgst.gov.in पर जाकर रजिस्‍ट्रेशन या इनरॉलमेंट करा सकते हैं।

 

 

अनरजिस्टर्ड डीलर को भी कराना होगा एनरॉलमेंट
जिन कारोबारियों का टर्नओवर 20 लाख रुपए से कम है और जिन्होंने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। अगर वह 50 हजार रुपए से अधिक के गुड्स को राज्य के अंदर सप्लाई करते हैं तो उन्हें भी ई-वे बिल बनाना होगा। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल में अनरजिस्टर्ड डीलर को एनरॉलमेंट फॉर्म भरना होगा जिसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन होगा। ये फॉर्म ई-वे बिल की वेबसाइट पर है और उन्हें रजिस्ट्रेशन के दौरान ये फॉर्म भरना होगा।

 

 

पोर्टल पर बनेगा इंट्रा स्टेट ई-वे बिल
ई-वे बिल की वेबसाइट https://www.ewaybillgst.gov.in पर ही इंट्रा स्टेट ई-वे बिल जेनरेट होगा। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए वही फॉर्म भरना होगा जो इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए भरते हैं। बस डेस्टिनेशन की दूरी और पहुंचाने का टाइम पीरियड कम हो जाएगा। ई-वे बिल जेनरेट करने का तरीका इंटर स्टेट ई-वे बिल की ही तरह होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल की तरह इंट्रा स्टेट ई-वे बिल में इन्वॉइस जेनरेट करने के बाद ट्रांसपोर्ट बिल और फिर ई-वे बिल बनाना होगा।

 

 

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