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एक्‍सपोर्टर्स के GST रिफंड पर एक्‍शन में PMO, फाइनेंस और कॉमर्स मिनिस्‍ट्री के अफसर तलब

अटके जीएसटी रिफंड के मामले पर पीएमओ ने फाइनेंस और कॉमर्स मिनिस्‍ट्री के शीर्ष अफसरों की मीटिंग बुलाई है।

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नई दिल्‍ली. एक्‍सपोर्टर्स के अटके जीएसटी रिफंड के मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने फाइनेंस और कॉमर्स मिनिस्‍ट्री के शीर्ष अफसरों की सोमवार को मीटिंग बुलाई है। एक्‍सपोर्टर्स का दावा है कि जीएसटी लागू होने के 8 महीने बाद भी उनका 70 फीसदी रिफंड अभी भी अटका है। सूत्रों के अनुसार, इस मीटिंग में रिफंड प्रॉसेस में देरी के चलते एक्‍सपोर्ट्स और मैन्‍युफैक्‍चरिंग पर हुए असर पर भी चर्चा होगी।

 

 

एक्‍सपोर्टर्स के रिफंड का मामला अब पांच महीने से ज्‍यादा समय से लटका पड़ा है। उनकी शिकायत है कि जीएसटी रिफंड में देरी से उनकी वर्किंग कैपिटल ब्‍लॉक हो गई है। दूसरी ओर, रेवेन्‍यू डिपार्टमेंट का कहना है कि एक्‍सपोर्टर्स की ओर से कस्‍टम डिपार्टमेंट और जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को सबमिट किए गए फार्म में विरोधाभास है। यानी दोनों डिपार्टमेंट को दी जानकारियां मेल नहीं नहीं हो रही हैं। 

 

मीटिंग ये होंगे शामिल 

सूत्रों के अनुसार, मीटिंग में फाइनेंस सेक्रेटरी हसमुख अढिया, कॉमर्स सेक्रेटरी रीता तियोतिया, सीबीईसी चेयरपर्सन वनजा सरना और डायरेक्‍टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) के टॉप अफसर शामिल होंगे। डीजीएफटी कॉमर्स मिनिस्‍ट्री के तहत काम करता है। माना जा रह है कि वह एक्‍सपोर्टर्स के अटके रिफंड पर पीएम मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को प्रजेंटेशन दे सकता है। 

 

4000 करोड़ रिफंड को मंजूरी  

सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्‍साइज एंडकस्‍टम्‍स (सीबीईसी) ने अक्‍टूबर से अबतक चार महीनों में एक्‍सपोर्टर्स को 4000 करोड़ रुपए का रिफंड मंजूर किया है। फिर भी करीब 10 हजार करोड़ रुपए का रिफंड एक्‍सपोर्टर्स की ओर से जीएसटीएन को जीएसटीआर1 या टेबल 6ए या जीएसटीआर 3बी जैसे फॉर्म्‍स के जरिए दी गई जानकारियां और कस्‍टम को जमा कराए गए शिपिंग बिल में विसंगति के चलते अटका है। 


एक्‍सपोर्टर्स के लिए ई-वॉलेट मैकेनिज्‍म 

जीएसटी काउंसिल ने पिछले साल अक्‍टूबर में कहा था कि एक्‍सपोर्टर्स को रिफंड के लिए ई-वॉलेट मैकेजिनज्‍म डेवलप किया जाएगा और डीजीएफटी को अप्रैल 2018 से जरूरी नियम-कायदे तैयार करने की जिम्‍मेदारी दी गई थी। ई-वॉलेट मैकेनिज्‍म के तहत एक नेशनल क्रेडिट एक्‍सपोर्टर्स के अकाउंट में उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर ट्रांसफर कर दी जाएगी। इसका इस्‍तेमाल वह इनपुट पर टैक्‍स का भुगतान करने में कर सकेंगे। बता दें, अप्रैल-जनवरी 2017-18 के दौरान देश का एक्‍सपोर्ट 11.75 फीसदी बढ़कर 247.89 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 221.82 अरब डॉलर था। 

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