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GST के एक साल पर रियल्टी चेक: छोटे कारोबारियों को लालफीताशाही से राहत, लेकिन अभी बनी हुई हैं कई परेशानी

मोदी सरकार ने GST लागू होने पर कहा था कि इससे न केवल टैक्स चोरी रुकेगी बल्कि कारोबारियों के बिजनेस करना आसान हो जाएगा।

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नई दिल्ली. आज गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को लागू हुए एक साल हो पूरा हो गया है। इस एक साल में 1.11 करोड़ से ज्यादा कारोबारी रजिस्टर्ड हो चुके हैं लेकिन फिर भी सरकार की परेशानी है कि अभी भी केवल 1% कारोबारी ही 80% टैक्स चुका रहे हैं। मोदी सरकार ने एक साल पहले GST लागू होने पर कहा था कि न केवल इससे टैक्स चोरी रुकेगी बल्कि कारोबारियों के बिजनेस करना आसान हो जाएगा। साथ ही देश की इकोनॉमी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा ऑर्गनाइज्ड होगी। एक साल में इन दावों का क्या हुआ इस पर moneybhaskar.com ने एक रियल्टी चेक किया है, जिसमें कारोबारियों ने बताया है कि उन्हें क्या फायदा हुआ, क्या नुकसान हुआ और किस तरह की परेशानी झेलनी पड़ी।

 

ट्रेडर्स – प्रवीण खंडेलवाल, जनरल सेक्रेटरी (कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) )

 

फायदा

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि GST आने के बाद बहुत तरह के टैक्स खत्म हो गए। अब रिटर्न के लिए डिपार्टमेंट के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और अधिकारियों के दर्शन नहीं करने पड़ते। दुकानदार अपनी दुकान में ही बैठकर रिटर्न फाइल कर सकता है।

 

नुकसान

रिटर्न फाइलिंग में अभी भी दिक्कतें छोटे ट्रेडर्स को आ रही हैं। GST के लागू होने के एक साल बाद भी रिटेलर्स को रिफंड मिलना शुरू नहीं हुआ है जिसके कारण उनका पैसा सरकार के पास अटका हुआ है।

 

क्या चाहिए

उन्होंने कहा कि GSTN पोर्टल के सही तरीके से काम करने के बाद ट्रेडिंग बिजनेस को ट्रैक पर आने में छह महीने का समय लगेगा। सरकार को एचएसएन कोड मैन्युफैक्टरिंग तक ही सीमित रखना चाहिए क्योंकि इससे ट्रेडर्स को भी अकाउंट मेंटेन करने में दिक्कत पेश आती है क्योंकि उसे प्रोडक्ट का कोड ही पता नहीं होता।

 

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इंडस्ट्री - कपिल चोपड़ा, अध्यक्ष,  इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एपेक्स चैंबर दिल्ली

 

फायदा

GST के एक साल बाद कारोबार अब सही ट्रैक पर आ गया है। मैन्युफैक्चर्स के लिए GST से टैक्स सिस्टम बेहतर हुआ है। अब उसे कई तरह के टैक्स भरने, उनके लिए अलग-अलग अकाउंट्स, डिपार्टमेंट के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

 

नुकसान

कपिल चोपड़ा ने कहा कि GST आने के बाद स्मॉल स्केल इंडस्ट्री को नुकसान हुआ है क्योंकि उनका अकाउंट मेंटेन करने के लिए चार्टेड अकाउंटेंट का खर्च बढ़ गया है।

 

 

 

रिटेलर्स, नीलेश गुप्ता , MD विजया सेल्स

 

नीलेश गुप्ता ने  बताया कि कारोबार अब ट्रैक पर आ गया है। GST आने के बाद महाराष्ट्र में चुंगी टैक्स खत्म हो गया है और इससे कारोबारियों और सबसे ज्यादा फायदा हुआ है।

 

नुकसान

नीलेश गुप्ता ने कहा कि GSTN नेटवर्क के सही तरीके से काम नहीं करने से परेशानी कारोबारियों को हुई है। 

 

सलाह

सरकार GST पोर्टल में सुधार करे ताकि रिफंड मिलना शुरू हो और रिटर्न फाइलिंग में दिक्कतें पेश न आए।

 

 

 

योगेश सिंघल, प्रेसिडेंट, बुलियन एंड ज्‍वैलर्स एसोसिएशन

 

फायदा

GST आने के बाद से ज्वैलरी इंडस्ट्री को ऑर्ग्नाइज्ड होने में मदद मिली है।ज्वैलर्स का बिजनेस बढ़ा है क्योंकि अब वह अपने राज्य तक सीमित नहीं है। यूपी का ज्वैलर दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र किसी भी राज्य में बिजनेस कर सकता है क्योंकि गोल्ड पर सभी राज्यों में एक ही टैक्स रेट 3 फीसदी है। पहले सभी राज्यो में एक टैक्स रेट नहीं था। वैट के समय में दिल्ली में 2 फीसदी और यूपी में 1 फीसदी टैक्स था, तो यूपी के गोल्ड कारोबारी को 1 फीसदी टैक्स का नुकसान होता था क्योंकि उस पर उसे इन्पुट क्रेडिट नहीं मिलता था। अब ऐसा नहीं होता अब वह किसी भी राज्य में खरीदकर बेच सकता है। उस पर उसे इन्पुट क्रेडिट भी मिलेगा।

 

नुकसान

ज्वैलर तरुण गुप्ता ने  बताया कि नुकसान सिर्फ उन्हें ज्यादा है जो ऑर्ग्नाइज्ड नहीं है। GST के बाद चार्टेड अकाउंटेट का सालाना खर्च 15 से 20 हजार रुपए बढ़ गया है।

 

सलाह

ज्वैलर्स इंडस्ट्री का मानना है कि GST पोर्टल को बेहतर करे ताकि सरकार को रिटर्न की तारीख आगे बढ़ाने की नौबत न आए।

 

आगे पढ़ें- क्‍या है एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर की राय

एक्सपोर्ट - ओ पी प्रह्लादका, चेयरमैन, EPCH

 

फायदा

ओ पी प्रह्लादका ने  बताया कि एक्सपोर्टर्स को टैक्स सिस्टम आसान हुआ है। अब अलग-अलग डिपार्टमेंट के लिए ज्यादा चक्कर नहीं काटने पड़ते।

 

नुकसान

ट्रेडर्स को रिटर्न फाइलिंग में अभी भी दिक्कतें आ रही है। GST के लागू होने के एक साल बाद भी रिटेलर्स को एक्सपोर्टर्स को रिफंड मिलने में अभी दिक्कतें आ रही है। हालांकि, सरकार सभी कोशिशें कर रही है कि एक्सपोर्टर्स को रिफंड समय पर मिलना शुरू हो इसके लिए रिफंड मेला भी चला रही है।

 

सलाह

GST पोर्टल को ऐसा बनाए कि रिफंड के लिए एक्सपोर्टर्स को डिपार्टमेंट न जाना पड़े।

 

इंडस्ट्री - रघुवंश अरोड़ा, उपाध्यक्ष, इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एपेक्स चैंबर दिल्ली

 

 

फायदा

GST के एक साल बाद कारोबार अब सही ट्रैक पर आ रहा है। मैन्युफैक्चर्स के लिए GST से टैक्स सिस्टम बेहतर हुआ है। अब उसे कई तरह के टैक्स फाइल बनाने की जरूरत नहीं है। उनके लिए अलग-अलग अकाउंट्स, डिपार्टमेंट के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

 

नुकसान

अरोड़ा ने कहा कि GST आने के बाद पोर्टल से ज्यादा दिक्कतें कारोबारियों को हुई है। इसे सरकार बेहतर करे।

 

 

आगे पढ़ें- क्‍या कहना है रियल एस्‍टेट का

रियल एस्टेट – अनुज पुरी, चेयरमैन,  एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट

 

फायदा

अनुज पुरी ने बताया कि 1 जुलाई 2017 को GST आने के बाद से घर खरीदने का प्रॉसेस आसान हुआ है। अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में प्रॉपर्टी के प्राइस भी कम हुए हैं। 60 वर्ग मीटर कारपेट एरिया वाले घरों पर जीएसटी रेट 12 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी करने से 4 फीसदी का फायदा हुआ है।

 

नुकसान

अभी भी अंडर कंस्ट्रक्शन वाले घरों पर 12 फीसदी GST बना हुआ है। इस पर इन्पुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा और कैसे पास होगा ये साफ नहीं है। रियल एस्टेट इंडस्ट्री को प्री-GST और पोस्ट GST टाइम में आने में अभी भी स्ट्रगल करना पड़ रहा है।

 

सलाह

इन्पुट टैक्स क्रेडिट पर कन्फ्यूजन दूर करें कि कैसे और कितना रियल एस्टेट सेक्टर इसका फायदा उठा सकता है

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