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ट्रांसपोर्टर्स ई-वे बिल फाइन के विरोध में 20 जुलाई से करेंगे देशव्यापी हड़ताल, सरकार ने जारी की शिकायत निवारण अधिकारियों की लिस्ट

ई-वे बिल के कारण एक कंपनी पर 1.32 करोड़ के फाइन के विरोध में ट्रांसपोटर्स एसोसिएशन ने 20 जुलाई से हड़ताल की घोषणा की है।

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नई दिल्ली. ई-वे बिल को लेकर आ रही शिकायतों को लेकर मोदी सरकार ने शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किए हैं। ई-वे बिल के कारण एक कंपनी पर 1.32 करोड़ रुपए का फाइन लगा है, जिसके विरोध में ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ने 20 जुलाई से हड़ताल की घोषणा की है। वह जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से एक दिन पहले हड़ताल की शुरुआत कर रहे हैं। ट्रांसपोर्टर्स सरकार से शिकायत निवारण सेंटर बनाने की मांग कर रहे थे जिसके बाद सरकार ने अधिकारियों की लिस्ट जारी की है।

 

सरकार ने जारी की लिस्ट

सरकार ने ऐसी ई-वे बिल से जुड़ी परेशानियों को देखते हुए शिकायत निवारण अधिकारियों की लिस्ट और फोन नंबर जारी किए हैं। आप इस लिंक पर क्लिक करके अधिकारियों की लिस्ट देख सकते हैं।

http://www.cbic.gov.in/resources//htdocs-cbec/gst/GRO%20Officers%20-%20180718.pdf

 

क्या है पूरा मामला?

मध्यप्रदेश राज्य के टैक्स डिपार्टमेंट ने 1.32 करोड़ रुपए का फाइन लगाया था क्योंकि कंपनी ई-वे बिल के पार्ट-बी की जानकारी देने में फेल हो गई थी। गैटी किन्सेट्सु एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (Gati Kintetsu Express Pvt Ltd) ने इस पेनल्टी के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपील की जिसमें कंपनी ने कहा कि ई-वे बिल के एनआईसी पोर्टल पर टेक्निकल खामी के कारण सभी जानकारी नहीं दे पाए थे। हालांकि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया।

 

 

आगे पढ़ें - ट्रांसपोर्टर्स ने कर दी है हड़ताल की घोषणा

 

 

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ट्रांसपोर्टर्स ने कर दी हड़ताल की घोषणा

इस फाइन के खिलाफ ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने 20 जुलाई से चक्काजाम की घोषणा कर दी। ई-वे बिल में परेशानी को लेकर आ रही परेशानी के लिए शिकायत निवारण सेंटर की मांग करने लगे। इस हड़ताल में टोल और बसों के नेशनल परमिट को भी जोड़ा गया है।

 

जीएसटी काउंसिल से पहले की हड़ताल की घोषणा

जीएसटी काउंसिल की मीटिंग 21 जुलाई को होनी है। ट्रांसपोर्टर्स ने काउंसिल की मीटिंग से एक दिन पहले देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है, ताकि वह काउंसिल में दबाव बना सके।

 

आगे पढ़ें - क्‍या है ई-वे बिल सिस्‍टम?

क्‍या है ई-वे बिल सिस्‍टम?

ई-वे बिल 1 अप्रैल से राज्यों में लागू होना शुरू हुआ है और यह चरणबद्ध तरीके से सभी राज्यों में लागू हुआ है। ई-वे बिल पूरे तरह से ऑनलाइन सिस्टम है। इसमें 50 हजार रुपए से ज्यादा का सामान ट्रांसपोर्ट करने वाले कस्टमर, ट्रांसपोर्टर, ट्रेडर को ऑनलाइन ई-वे बिल जेनरेट करना होता है। यह 1 से 15 दिन तक मान्य होता। वैलेडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होता है। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा। सरकार का दावा था कि ई-वे बिल सिस्‍टम से देश में एक जगह से दूसरी जगह सामान की आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी। साथ ही चुंगी नाकों पर ट्रकों और गुड्स कैरियर व्हीकल की लाइन भी खत्म होगी।

 

क्या है इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट ई-वे बिल?

राज्य के अंदर ही स्टॉक ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा, जबकि एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा।

 

इंट्रा स्टेट ई-वे बिल किसे है बनाना?

इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 50 हजार रुपए से ज्‍यादा का सामान ले जाने वाले अनरजिस्टर्ड कारोबारी, रजिस्टर्ड कारोबारी, डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स को जेनरेट करना होता है।

 

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