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ई-वे बिल के लिए तैयार नहीं ट्रेडर्स, 50 हजार की लिमिट बढ़ाने के लिए बना रहे प्रेशर

सरकार1 फरवरी से इंटर स्टेट ई-वे बिल लाना चाहती है लेकिन ट्रेडर्स 1 अप्रैल से ई-वे बिल लागू कराना चाहते हैं।

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नई दिल्ली. सरकार ने भले ही 1 फरवरी से इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू करने का एलान कर दिया है, लेकिन ट्रेडर्स इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। उनकी डिमांड है कि ई-वे बिल को नए फाइनेंशियल ईयर यानी 1 अप्रैल से लागू किया जाए और साथ ही उसकी लिमिट 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपए की जाएगी। ट्रेडर्स इसके लिए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

 


ट्रेडर्स एसोसिएशन सरकार पर बनाएगी दबाव


मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने moneybhaskar.com से कहा कि देश भर की सभी ट्रेडर्स एसोसिएशन जीएसटी से जुड़ी सभी परेशानियों को लेकर मीटिंग कर रही हैं। इन मीटिंग्स में ई-वे बिल नए फाइनेंशियल ईयर से लागू करने, जीएसटी पोर्टल पर आ रही फाइलिंग की दिक्कतों, एपीएमसी सेस हटाने, ब्रांडेड फूड ग्रेन पर जीएसटी हटाने को लेकर सरकार पर कैसे दबाव बनाया जाए आदि पर विचार किया जा रहा है। शाह ने कहा कि ट्रेडर्स और कारोबारी बड़े स्तर इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

 


50,000 की लिमिट बढ़ाकर की जाए 1 लाख


कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ई-वे बिल में 50,000 रुपए की लिमिट बहुत कम है, जिसे सरकार को बढ़ाकर एक लाख रुपए करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि ट्रेडर के कम क्वांटिटी के सामान की कीमत भी 1 से 10 लाख रुपए के बीच आराम से हो जाती है। ऐसे में इस लिमिट से कारोबारियों के लिए डॉक्युमेंटेशन का काम बढ़ जाएगा। इसके अलावा ई-वे बिल में सरकार ट्रांसपोर्ट के दिनों की संख्या बढ़ानी चाहिए। खंडेलवाल ने कहा कि ट्रेडर्स एसोसिएशन इन मुद्दों पर जल्द सरकार से मिलेगी।

 

ई-वे बिल 1 अप्रैल से हो लागू


सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएश के सेक्रेटरी ताराचंद गुप्ता ने कहा कि सरकार को इंटर स्टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल 2018 से लागू करना चाहिए। ट्रेडर्स को इस बात का भी डर है कि अभी भी वह रिटर्न फाइल करने में जूझ रहे हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन अगर ई-वे बिल जेनरेट नहीं होने की समस्या आए, तो इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा।

 

 

आगे पढ़े - क्या है ई-वे बिल

1 फरवरी से लागू होगा ई-वे बिल

 

 

 

शनिवार को जीएसटी काउंसिल ने इमरजेंसी मीटिंग में ई-वे बिल को 1 फरवरी से लागू करने पर सहमति जता दे दी है। ई-वे बिल ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 से लागू करने का फैसला किया गया है। डेडलाइन से पहले ई-वे बिल का ट्रायल करने की डेडलाइन तय की गई है जो 15 जनवरी से शुरू होगा। ई-वे बिल लागू होने से सरकार के लिए टैक्स चोरी पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा।

 

 

 

क्या है ई-वे बिल

 

ई-वे बिल के तहत 50,000 रुपए से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा। यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।

 

क्या है इंट्रा और इंटर स्टेट ई-वे बिल

 

स्टॉक राज्य के अंदर ही ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा। राज्य के बाहर यानी अन्य राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा।

 

 

 

 

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