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GST पोर्टल जैसा न हो जाए ई-वे बिल, ट्रेडर्स को इस बात का है डर

ई-वे बिल ऑनलाइन मैकेनिज्म है ऐसे में अगर जीएसटी पोर्टल जैसी शुरूआती दिक्कतें आती हैं तो कारोबार के लिए खराब होगा।

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नई दिल्ली। जिस तरह जुलाई से जीएसटी आधी-अधूरी तैयारी से  लागू हुआ और उससे कारोबारियों को प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा, वैसा ही डर कारोबारियों को ई-वे बिल से है। कारोबारियों के अनुसार ई-वे बिल पूरी तरह से ऑनलाइन मैकेनिज्म पर है ऐसे में अगर जीएसटी पोर्टल जैसी शुरूआती दिक्कतें आती हैं तो उनके लिए होली के फेस्टिव सीजन में बिजनेस करना मुश्किल हो जाएगा।

 

50,000 की लिमिट है कम

सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएश के सेक्रेटरी ताराचंद गुप्ता ने moneybhaskar.com को कहा कि ट्रेडर्स के मुताबिक ई-वे बिल में 50,000 रुपए के लिमिट बहुत कम है क्योंकि ज्यादातर कम क्वांटिटी का सामान भी ट्रेडर का एक से 10 लाख रुपए तक आराम से हो जाता है। ऐसे में इस लिमिट के कम होने से कारोबारियों के लिए डॉक्यूमेंटेशन काम बढ़ जाएगा। 20 लाख रुपए से कम टर्नओवर वाला छोट होलसेल ट्रेडर तकनीकी स्तर पर उतना सक्षम नहीं है कि वह ये काम करे। खंडेलवाल ने कहा कि अब ऐसी हालत में ट्रेडर ट्रेड करेगा या डॉक्युमेंट जुटाएगा।


 

जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल जनरेट करने में न आए प्रॉब्लम

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि ट्रेडर्स को इस बात का भी डर है कि अभी भी जैसे वह रिटर्न फाइल करने मे स्ट्रगल कर रहे हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन के समय यह समस्या आए कि ई-वे बिल ही जनरेट न हो। जैसे अभी तक वेबसाइट हैंग होना और ऐरर जैसी प्रॉब्लम ट्रेडर्स झेल रहे हैं, ऐसी समस्या तब न आए क्योंकि इससे उनका फेस्टिव सीजन का कारोबार प्रभावित होगा।


 

असंगठित सेक्टर का कारोबार होगा प्रभावित

देश की ज्यादातर पुरानी होलसेल मार्केट में ट्रेडिशनल तरीके से दुकाने चल रही हैं। चावड़ी बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी और पेपर कारोबारी रमेश जैन ने moneybhaskar.com को बाताया कि अभी भी 25 फीसदी ऐसे कारोबारी हैं जिन्हें जीएसटी नंबर नहीं मिल पाया है क्योंकि पगड़ी सिस्टम पर दुकानें होने के कारण ऑरिजनल मालिक एनओसी या एड्रेस प्रूफ देने को ही तैयार नहीं है। उनके पास एड्रेस प्रूफ नहीं होने का कारण उनका जीएसटी नंबर भी अटका हुआ है। ऐसे में ई-वे लागू होने पर वह अपना माल ट्रांसपोर्ट ही नहीं कर पाएंगे।


 

1 अप्रैल से लागू हो ई-वे बिल

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ई-वे बिल 1 फरवरी की जगह 1अप्रैल से लागू होना चाहिए। एसोसिएशन मांग कर रही है कि सरकार ई-वे बिल की जगह क्विक रिस्पॉन्स (क्यूआर) कोड लेकर आए जो हर एक इन्वॉइस पर छपा हुआ हो। इससे ट्रेडर्स हैरेसमेंट से बच जाएंगे क्योंकी यह सेल्फ जनरेटेड है। बैंक और डिजिटल पेमेंट में क्यूआर कोड पहले से इस्तेमाल हो रहा है।

 

आगे पढ़े - क्या है ई-वे बिल

 

 

फरवरी से लागू होगा ई-वे बिल

 

शनिवार को जीएसटी काउंसिल ने इमरजेंसी मीटिंग में ई-वे बिल को 1 फरवरी से लागू करने पर सहमति जता दे दी है। ई-वे बिल ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 से लागू करने का फैसला किया गया है। डेडलाइन से पहले ई-वे बिल का ट्रायल करने की डेडलाइन तय की गई है जो 15 जनवरी से शुरू होगा। ई-वे बिल लागू होने से सरकार के लिए टैक्स चोरी पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा।

 

क्या है ई-वे बिल

 

ई-वे बिल के तहत 50,000 रुपए से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा। यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।

 

क्या है इंट्रा और इंटर स्टेट ई-वे बिल

 

स्टॉक राज्य के अंदर ही ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा। राज्य के बाहर यानी अन्य राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा।

 

 

ये प्रोडक्ट ई-वे बिल से हैं बाहर

 

ई-वे बिल रजिस्टर सप्लायर, बायर और ट्रांसपोटर्स जनरेट करेगा। ई-वे बिल एसएमस के लिए बनाया और कैंसल कराया जा सकता है। ई-वे बिल से कॉन्ट्रासेप्टिव, ज्युडिशियल और नॉन ज्युडिशियल स्टैंप पेपर, न्यूजपेपर, ज्वैलरी, खादी, रॉ सिल्क, इंडियन फ्लैग, ह्युमन हेयर, काजल, दिये, चेक, म्युनसिपल वेस्ट, पूजा सामग्री, एलपीजी, किरोसिन और करेंसी को ई-वे बिल से बाहर रखा गया है।

 

 

इन जगहों पर नहीं चाहिए ई-वे बिल

 

 

जिस तारीख से ई-वे बिल लागू होगा उसे अलग से नोटिफाई कर दिया जाएगा। ई-वे बिल की जरूरत नॉन-मोटर कनवेंस, पोर्ट से ट्रांसपोर्ट होने वाले गुड्स, एयरपोर्ट, एयर कार्गो कॉम्पलेक्स और लैंड कस्टम स्टेशन के लिए जाने वाले और आने वाले गुड्स पर नहीं होगी।

 

यहां चाहिए ई-वे बिल

 

मल्टीपल कन्साइनमेंट के लिए ट्रांसपोटर्स को कंसॉलिडेट ई-वे बिल बनवाना होगा। अगर गुड्स को एक व्हीकल से दूसरे में ट्रांसफर करना है तो ई-वे बिल की जरूरत पड़ेगी।

 

 

 

 

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