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छोटे ट्रांसपोर्टर्स हैं ई-वे बिल से परेशान, बढ़ गई है ऑपरेटिंग कॉस्ट

छोटे ट्रांसपोर्टर्स ई-वे बिल लागू होने के बाद इसके कॉम्पलाएंस से परेशानी हो रही है। छोटे ट्रांसपोर्टर्स के मुताबिक ई-वे

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नई दिल्ली। छोटे ट्रांसपोर्टर्स ई-वे बिल लागू होने के बाद इसके कॉम्पलाएंस से परेशानी हो रही है। छोटे ट्रांसपोर्टर्स के मुताबिक ई-वे बिल से उनकी कॉस्ट बढ़ गई है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग और रिसर्च के मुताबिक ई-वे बिल का बड़े ट्रांसपोर्टर्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है लेकिन छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर इसका असर नजर आ रहा है।

 

छोटे ट्रांसपोर्टर्स की बढ़ी ऑपरेटिंग कॉस्ट

 

रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग और रिसर्च के मुताबिक छोटे रोड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर कि कॉम्पलाएंस कॉस्ट बढ़ने से वह परेशान हैं। इससे उनकी ऑपरेटिंग कॉस्ट भी बढ़ी गई है। ई-वे बिल जेनरेट करने के लिए उन्हें अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर या सीए की मदद लेनी पड़ रही है जिसके कारण उनकी कॉस्ट बढ़ गई है। छोटे रोड ट्रांसपोर्टर्स को ई-वे बिल की टेक्नोलॉजी से भी परेशानी हो रही है क्योंकि वह अपने कारोबार में कंप्यूटर का इस्तेमाल कम करते हैं। ई-वे बिल से इंटर स्टेट ट्रेड आसान होने और इन्पुट टैक्स क्रेडिट क्लेम जल्दी निपटाने में मदद मिलेगी।

 

क्‍या है ई-वे बिल सिस्‍टम?

 

ई-वे बिल पूरे तरह से ऑनलाइन सिस्टम है। इसमें 50 हजार रुपए से ज्यादा का सामान ट्रांसपोर्ट करने वाले कस्टमर, ट्रांसपोर्टर, ट्रेडर को ऑनलाइन ई-वे बिल जेनरेट करना होता है। यह 1 से 15 दिन तक मान्य होगा। वैलेडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा। सरकार का दावा है कि ई-वे बिल सिस्‍टम से देश में एक जगह से दूसरी जगह सामान की आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी। साथ ही चुंगी नाकों पर ट्रकों और गुड्स कैरियर व्हीकल की लाइन भी खत्म होगी।


 

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