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रेवेन्यू डिपार्टमेंट FASTag से लिंक करेगा ई-वे बिल, टैक्स चोरी पर लगेगी लगाम

रेवेन्यू डिपार्टमेंट ई-वे बिल को फास्टटैग सिस्टम से जोड़ने पर कर रहा है काम

revenue department plans linking eway bill with FASTag

नई दिल्ली। रेवेन्यू डिपार्टमेंट ई-वे बिल को एनएचएआई (NHAI) के फास्टैग (FASTag) सिस्टम से लिंक करेगा। ई-वे बिल को दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMICDC) के FASTag और लॉजिस्टक्स डेटा बैंक (LDB) के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि गुड्स की आवाजाही तेज हो सके और टैक्स चोरी को रोका जा सके। अधिकारियों के मुताबिक इस प्रपोजल के जरिए देश का लॉजिस्टक्स सिस्टम बेहतर होगा।

 

अभी व्हीकल की नहीं हो पाती ट्रैकिंग

 

ई-वे बिल को FASTag सिस्टम से जोड़ने के प्रपोजल पर रेवेन्यू डिपार्टमेंट काम कर रहा है। अभी अलग-अलग विभागों में ई-वे बिल, गुड्स और व्हीकल की जानकारी शेयर नहीं हो पाने के कारण गुड्स और व्हीकल की आवाजाही की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर देश के ईज ऑफ डूईंग बिजनेस पर पड़ रहा है क्योंकि इससे कंपनियों की लॉजिस्टक्स कॉस्ट बढ़ गई है।

 

बढ़ेगा टैक्स कलेक्शन

 

-वे बिल सिस्टम के फास्टटैग और एलडीबी से जुड़ने से टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा क्योंकि इससे टैक्स चोरी कम होगी। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने टोल कलेक्शन प्वाइंट पर फास्टटैग लगाए हुए हैं। ई-वे बिल के फास्टटैग से जुड़ने पर रेवेन्यू अथॉरिटी को व्हीकल को ट्रैक करने में मदद मिलेगी। ये भी पता चलेगा कि ट्रांसपोर्टेर ने सामान पहुंचाने के लिए जितने दिन की लिमिट की जानकारी ई-वे बिल में दी है, उतने दिन में गुड्स पहुंचा या नहीं? अधिकारियों के मुताबिक इससे जीएसटी टैक्स चोरी रोकने में भी मदद मिलेगी क्योंकि अभी कई ट्रेडर्स सप्लाई चेन के लूपहोल्स का फायदा उठा रहे हैं।

 

1 अप्रैल को लागू हुआ था ई-वे बिल

 

-वे बिल देश भर में 1अप्रैल 2018 से लागू हो चुका है। केंद्र सरकार के ई-वे बिल के तहत 50,000 रुपए से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होता है। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक मान्य होता है। यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होती है। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 से 20 दिन का ई-बिल बनेगा। ट्रांसपोर्टेर को चेकिंग के समय यह ई-वे बिल चेक पोस्ट पर दिखाना होता है।


 


 

 

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