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3 दिन में जेनरेट हुए 17 लाख से ज्‍यादा ई-वे बिल, गुजरात रहा नंबर वन

कारोबारियों और ट्रांसपोटर्स ने सामानों के मूवमेंट के लिए तीन दिन में 17 लाख से ज्‍यादा इंटर-स्‍टेट ई-वे बिल जेनरेट किए

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नई दिल्‍ली. कारोबारियों और ट्रांसपोटर्स ने सामानों के एक राज्‍य से दूसरे राज्‍य (इंटर-स्‍टेट) में मूवमेंट के लिए तीन दिन में 17 लाख से ज्‍यादा ई-वे बिल जेनरेट किए हैं। इंटर-स्‍टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल 2018 से देशभर में लागू हो गया। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ई-वे बिल जेनरेट करने की संख्‍या बढ़ रही है। 1 अप्रैल को 2.59 लाख बिल जेनरेट हुए। उसके बाद दो दिन में यानी 2 अप्रैल को 6.5 लाख और 3 अप्रैल को 8.15 लाख बिल जेनरेट हुए।

 

 

ई-वे बिल के तहत 50,000 रुपए से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा। यह वैलेडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।

 

गुजरात में सबसे ज्‍यादा 
सरकार की ओर से बुधवार को जारी बयान के अनुसार, राज्‍यों में बीते तीन दिनों में सबसे ज्‍यादा ई-वे बिल गुजरात में जेनरेट हुए। 1-3 अप्रैल के बीच गुजरात में 3.6 लाख बिल जेनरेट हुए। इसके बाद कर्नाटक रहा, जहां 2.65 लाख ई-वे बिल कारोबारियों और ट्रांसपोटर्स ने जेनरेट किए। कर्नाटक एकमात्र राज्‍य है, सामानों के इंट्रा स्‍टेट (राज्‍य की सीमा के भीतर) मूवमेंट के लिए भी ई-वे बिल प्‍लेटफार्म 1 अप्रैल को ही लॉन्‍च कर दिया। 

 

बुधवार को 9 लाख होगा आंकड़ा 
सरकार के अनुसार, ई-वे बिल जेनरेट करने के रुझान में बढ़ोत्‍तरी है। बुधवार को ई-वे बिल का आंकड़ा 9 लाख पहुंच सकता है। नियमित आधार हम ई-वेल के जेनरेशन में 5-10 फीसदी की बढ़ोत्‍तरी की उम्‍मीद है। ऑनलाइन ई-वे प्‍लेटफार्म लॉन्‍च करने से सरकार को टैक्‍स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही टैक्‍स कलेक्‍शन बढ़ाने और नकदी में होने वाले कारोबार को कम करने में भी मदद मिलेगी। 

 

काउंसिल ने पिछले महीने किया फैसला 
जीएसटी काउंसिल ने पिछले महीने इंटर-स्‍टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल से और इंट्रा-स्‍टेट 15 अप्रैल से शुरू करने का फैसला किया था। सरकारी अधिकारी का कहना है कि इस फैसले के आधार पर राज्‍यों ने पहले चरण में इंटर-स्‍टेट ई-वे बिल प्‍लेटफार्म लॉन्‍च कर दिया। जल्‍द ही इंट्रा-स्‍टेट भी लॉन्‍च होने की उम्‍मीद है। ईएंडवाई के पार्टनर अभिषेक जैन का कहना है कि ई-वे बिल प्‍लेटफॉर्म सही तरीके से चल रहा है। ई-वे बिल को दो फेज, पहले फेज में इंटर-स्‍टेट और दूसरे फेज में इंट्रा-स्‍टेट, में लागू करने का फैसला सही है। बता दें, ई-वे बिल इससे पहले 1 फरवरी 2018 में भी लागू किया गया था। लेकिन ऑनलाइन नेटवर्क सिस्टम कुछ ही घंटों में फेल हो गया। जिसकी वजह से सरकार ने इसे अनिश्चित समय के लिए टाल दिया था। 
 

 

आगे पढ़ें...किसे बनाना हैं ई-वे बिल 

 

ई-वे बिल किसे है बनाना?
ई-वे बिल रजिस्टर्ड कारोबारी, डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स को 50 हजार रुपए से ज्यादा का गुड्स ट्रांसपोर्ट करने पर ऑनलाइन ई-वे बिल जेनरेट करना होगा। ट्रांसपोर्टर्स अगर एक ही व्हीकल में एक से ज्यादा डीलर्स का स्टॉक लेकर जाता है तो उसे कन्सॉलिडेटेट ई-वे बिल बनाना होगा। 20 लाख से कम टर्नओवर वाले अनरजिस्टर्ड डीलर जो जीएसटी के पोर्टल पर रजिस्टर नहीं है, उन्हें भी 50 हजार से अधिक का माल अनरजिस्टर्ड डीलर को ट्रांसपोर्टल करते समय ई-वे बिल बनाना होगा।

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