Home » Economy » GSTई-वे बिल - ई-वे बिल बनाने जा रहे है तो रखे इन बातो का ध्यान - Keep this mind while making Eway bill

बनाने जा रहे हैं ई-वे बिल, इन बातों का ध्यान रख उठाएं फायदा

ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कैसे ई-वे बिल जनरेट किया जाए और किन बातों का ध्यान रखा जाए।

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नई दिल्ली। अब जब लगभग क्लीयर हो गया है कि सरकार 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू करने जा रही है। ऐसे में कारोबारियों में ई-वे बिल को लेकर कई सारे कन्फ्यूजन बने हुए हैं। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कैसे ई-वे बिल जनरेट किया जाए और किन बातों का ध्यान रखा जाए।

 

ई-वे बिल के लिए फिर से कराना होगा रजिस्ट्रेशन

 

ज्यादातर ट्रेडर्स को लग रहा है कि जीएसटी पोर्टल के रजिस्ट्रेशन से ही ई-वे बिल बन जाएगा लेकिन ऐसा नहीं है। ई-वे बिल बनाने की वेबसाइट जीएसटी पोर्टल से अलग है। जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बावूजद ई-वे बिल की वेबसाइट पर दुबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जिन कारोबारियों के पास जीएसटी पोर्टल का रजिस्ट्रेश आईडी और पासवर्ड वह उससे ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

 

यहां कराना होगा रजिस्ट्रेशन

 

ट्रांसपोर्टर्स, वेयर हाउस ओनर, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज हाउस मालिकों को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। उनका टर्नओवर तय लिमिट से कम होने के बावजूद उन्हें ई-वे बिल की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। कारोबारियों को www.ewaybill.nic.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। अगर जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं है तो पैन कार्ड नंबर से रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। एक बार रजिस्ट्रेशन करने के बाद आपका यूजरनेम और पासवर्ड बन जाएगा जिससे आपको ई-वे बिल बनाने के लिए लॉग इन करना होगा।

 

सप्लायर-कस्टमर लिस्ट बना सकते हैं कारोबारी

 

ई-वे बिल पर अपने सप्लायर, कस्टमर और प्रोडक्ट्स का मास्टर तैयार कर सकते हैं। यानी आपको हर बार इनकी डिटेल्स नहीं देनी होगी। आपके लॉग इन में सभी डिटेल सेव हो जाएगी। इससे हर बार कस्टमर, सप्लायर और प्रोडक्ट डिटेल भरने से बच जाएंगे।

 

ऐसे बनेगा ई-वे बिल

 

वेबसाइट पर ई-वे बिल के अलग-अलग फॉर्म है जो प्रोडक्ट की संख्या और कीमत पर निर्भर करती है। यानी अगर एक ई-वे बिल बनता है तो एक फॉर्म भरना होगा। कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बनाने के लिए अलग फॉर्म भरना होगा। ई-वे बिल की वेबसाइट पर छह तरह के ई-वे बिल हैं।

 

कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल

 

कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल में एक ही व्हीकल में अलग-अलग डीलर्स, प्रोडक्ट का सामान भेजने पर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बनेगा। ये कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स को भरना होगा। ट्रांसपोर्टर्स अगल-अगल डीलर्स के लिए एक कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बना सकता है।

 

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आगे पढ़ें - कब शुरू होगी टाइम वैलिडिटी

 

 

ऑफलाइन ऐसे बनेगा ई-वे बिल

कारोबारी ऑफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिन बनवा सकेंगे। जिन कारोबारियों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और उन्हें एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं तो एसएमएस से बिल बनवा सकते हैं। ई-वे बिल की वेबसाइट पर प्रोडक्ट कोड, शॉर्ट फॉर्म और एसएमएस भेजने का तरीका बताया हुआ है। आपको उन शॉर्ट फॉर्म को फॉलो करके ही ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं।

 

जनरेट होगा क्यूआर कोड

 

ई-वे बिल जनरेट करने पर क्यूआर कोड जनरेट होगा। इस कोड के जरिए जीएसटी अधिकारी कभी भी व्हीकल की चेकिंग कर पाएंगे। क्यूआर कोड के जरिए व्हीकल को ट्रैक कर पाएंगे।

 

व्हीकल का नंबर भरने के बाद शुरू हो जाएगी वैलिडिटी

 

आप जिस दिन ई-वे बिल पर व्हीकल नंबर की डिटेल भर देंगे, उस दिन से प्रोडक्ट ले जाने की टाइम वैलिडिटी शुरू हो जाएगी।

 
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