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GST इम्पैक्ट:10 साल में पहली बार गिरा हैंडीक्रॉफ्ट एक्सपोर्ट, 6% की गिरावट

मोदी सरकार को जीएसटी से एक और बड़ा झटका लगने वाला है। देश के एक्सपोर्ट में अहम हिस्सेदारी रखने वाला हैंडीक्राफ्ट सेक्टर

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नई दिल्ली। मोदी सरकार को जीएसटी से एक और बड़ा झटका लगने वाला है। देश के एक्सपोर्ट में अहम हिस्सेदारी रखने वाला हैंडीक्राफ्ट सेक्टर में पिछले 10 साल में पहली बार गिरावट आई है। moneybhaskar.com को मिले डेटा के अनुसार 2017-18 में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में 6.05 फीसदी गिरा है जो कि 2009-10 के बाद पहली बार हुआ है। इससे पहले ग्लोबल स्लोडाउन के समय 2009-10 में यह गिरा था। कारोबारियों के अनुसार हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट गिरने के पीछे जीएसटी में मिसमैनेजमेंट का हाथ रहा।

 

 

हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में आई गिरावट

 

फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट 22,916 करोड़ रुपए रहा जबकि बीते साल 2016-17 में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट 24,392 करोड़ रुपए था। इस साल इसमें 6.05 फीसदी की गिरावट दर्ज की है जबकि साल 2016-17 में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट ने 13 फीसदी से अधिक की ग्रोथ दर्ज की थी। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट सेक्टर में सबसे ज्यादा इमिटेशन ज्वैलरी, हैंडप्रिंटेड टेक्सटाइल और स्कार्फ और आर्टमेटल वेयर प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट गिरा है।

 

 

जीएसटी का दिखा आंकडो़ं पर असर

 

 

ईपीसीएच के चेयरमैन ओ पी प्रह्लादका ने moneybhaskar.com को बताया कि जीएसटी में एक्सपोटर्स का 9 महीने तक रिफंड अटका रहा जिसके कारण उन्हें वर्किंग कैपिटल की कमी हो गई। वर्किंग कैपिटल नहीं होने के कारण कई ऑर्डर कैंसल करने पड़े। एक्सपोर्टर्स की शिपिंग एक से दो महीना तक लेट भी हुई और इसका सीधा असर उनके रीपिट ऑर्डर पर पड़ा। अब जीएसटी की यही असर आंकड़ों पर भी नजर आ रहा है।

 

 

हैंडीक्राफ्ट एक्सपोटर्स ने शुरू कर दी थी छंटनी

 

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) ने जीएसटी के बाद सर्वे कराया जिसमें ये सामने आया है कि कारोबारियों ने वर्किंग कैपिटल की कमी के कारण कर्मचारियों की छंटनी भी शुरू कर दी थी। ओमप्रकाश प्रह्लाद ने कहा कि हैंडीक्राफ्ट एक्सपोटर्स ने कर्मचारियों और लेबर की छंटनी शुरू कर दी थी। सर्वे में एक्सपोटर्स ने माना कि उनका टर्नओवर घटा है और कैश फ्लो कम हुआ है। उन्हें वर्किंग कैपिटल की समस्या सबसे ज्यादा है।

 

 

95% कारोबारियों ने माना कि रिफंड में आई दिक्कत

 

 

सर्वे में 95 फीसदी कारोबारियों ने माना था कि उन्हें पहले टैक्स चुकाने और फिर उसका रिफंड लेने में दिक्कत आ रही है। 81 फीसदी कारोबारियों ने माना था कि प्री-जीएसटी स्टॉक पर रिफंड लेने में दिक्कतें आई थी। सर्वे में कारोबारियों ने माना कि उनका एक्सपोर्ट वॉल्युम कम हुआ है। टैक्स प्रोसेस और जीएसटी चुकाने में उनका सबसे ज्यादा खर्च हो रहा है।

 

आगे पढ़ें - एक्सपोर्ट को बूस्ट देने के लिए शुरू हो रहा है फेयर

 

 

छोटे एक्सपोर्टर्स का पैसा हुआ ब्लॉक

 

 

एशियन हैंडीक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन राजकुमार मल्होत्रा ने moneybhaskar.com को बताया कि अगर किसी एक्सपोर्टर का टर्नओवर 12 करोड़ रुपए है और वह महीने का 1 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट करता है। अगर उस पर 28 फीसदी जीएसटी है तो उसे 28 लाख रुपए पहले सरकार को देने होंगे। इस तरीके से कारोबारियों का करोड़ो रुपए सरकार के पास ब्लॉक हो गया। इतना ज्यादा वर्किंग कैपिटल ब्लॉक होने से कारोबार ही मुश्किल हो गया था। अभी भी कारोबारियों को रिफंड मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।

 

6,500 करोड़ रुपए का था रिफंड

 

 

प्रह्लादका ने कहा कि एक्सपोर्टर्स खासकर एसएसएमई सेक्टर का 6,500 करोड़ रुपए का रिफंड अटका हुआ था। एक्सपोर्टर्स को बैंक भी लोन नहीं दे रहे थे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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