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1 फरवरी से ही लागू होगा ई-वे बिल, ट्रेडर्स को राहत देने के मूड में नहीं सरकार

जीएसटीएन पोर्टल का दावा है कि ई-वे बिल के ट्रायल और 1 फरवरी ले लागू कर ने के लिए पोर्टल और राज्य सरकार दोनों तैयार है।

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नई दिल्ली। सरकार ई-वे बिल 1 फरवरी से ही लागू करेगी। ट्रेडर्स और कारोबारी एसोसिएशन बीते एक महीने से इसे नए फाइनेंशियल ईयर से लागू करने की मांग कर रही थी लेकिन इस बार सरकार ने राहत देने से साफ मना कर दिया है। जीएसटीएन नेटवर्क और सरकार ने साफ कर दिया है कि ई-वे बिल 1 फरवरी से लागू होगा। जीएसटीएन पोर्टल का दावा है कि ई-वे बिल के ट्रायल और 1 फरवरी ले लागू कर ने के लिए पोर्टल और राज्य सरकार दोनों तैयार है।

 

 

1 फरवरी से लागू होगा ई-वे बिल

 

 

जीएसटीएन पोर्टल और सरकार ने विज्ञापनों में साफ कर दिया है कि पूरे देश भर में 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू होगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भिजवाने के लिए ई-वे बिल ही ट्रांजिट पास के तौर पर काम करेगा। ई-वे बिल पूरे देश भर में मान्य होगा। अब देश भर में 50 हजार रुपए से अधिक के माल को ट्रांसपोर्ट करने के लिए ई-वे बिल लेना अनिवार्य होगा।

 

 

ऑफलाइन भी काम करेगा ई-वे बिल

 

 

जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार ने कहा कि टैक्सपेयर्स और ट्रांसपोटर्स को कोई भी टैक्स ऑफिस या चेक पोस्ट पर जाने की जरूर नहीं होगी। ई-वे बिल इलेक्ट्रॉनिकली स्वयं कारोबारी निकाल पाएंगे। कुमार ने कहा कि जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल सिस्टम और मोबाइल ऐप से जोड़ दिया गया है। ये सर्विस ऑफलाइन भी एसएमएस के जरिए भी काम करेगी।

 

 

ये राज्य पहले से है तैयार

 

 

ई-वे बिल सिस्टम कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड और केरल राज्य में पहले से लॉन्च कर दिया है। अभी इन राज्यो में रोजाना 1.4 लाख ई-वे बिल जनरेट कर रहे हैं। बाकि बचे राज्य भी अगले 10 से 15 दिन में ई-वे बिल लागू कर देंगे। 16 से 31 जनवरी 2018 तक ई-वे बिल का ट्रायल चलेगा।

 

 

ई-वे बिल के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन

 

 

जीएसटी टैक्सपेयर्स को जीएसटीएन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जिन ट्रांसपोटर्स ने जीएसटी में एनरोल नहीं कराया है उन्हें ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ऐसे कारोबारियों को अपना पैन और आधार नंबर देना होगा। कारोबारियों को अलर्ट मैसेज एसएमएस के जरिए मिल जाएगा। ई-वे बिल सप्लायर, रेसिपिएंट और ट्रांसपोटर्स कोई भी जनरेट कर सकता है। ई-वे बिल में क्यूआर कोड भी जनरेट होगा। एक से ज्यादा ई-वे बन बनाने पर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल जनरेट होगा।

 

 

आगे पढ़ें - क्या है ई-वे बिल

 

 

 

क्या है ई-वे बिल?

 

 

- ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा।

 

- इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा।

 

 

- यह वैलिडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी के लिए 20 दिन का ई-वे बिल बनेगा।

 

 

 

क्या है इंट्रा और इंटर स्टेट ई-वे बिल?

 

- राज्य के अंदर ही स्टॉक ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा, जबकि एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा।

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