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GST: 1 अप्रैल से लागू होगा इंटर स्टेट ई-वे बिल, रिवर्स चार्ज 1 जुलाई तक टला

अब ई-वे बिल 15 अप्रैल से 4 राज्यों में लागू होगा। सरकार ने रिवर्स चार्ज भी फिलहाल के लिए 1 जुलाई तक के लिए टाल दिया है।

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नई दिल्ली। देश भर में 1 अप्रैल से से इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू होगा। जीएसटी काउंसिल की आज हुई 26वीं मीटिंग में यह फैसला लिया गया है। शुरू में इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 3 राज्यों में ही लागू होगा, जिसे बाद में चरणबद्ध तरीके से दूसरे राज्यों में लागू किया जाएगा। काउंसिल ने रिवर्स चार्ज भी फिलहाल 1 जुलाई तक के लिए टाल दिया है। इसके अलावा काउंसिल ने एक्सपोर्टर्स को मिल रही छूट को भी 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है।साथ ही रिटर्न फाइलिंग के मौजूदा सिस्टम को अगले तीन महीने  के लिए बरकरार रखा है। इस बात की जानकारी फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने काउंसिल की मीटिंग खत्म होने के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में दी है।

 

 

 

क्या है इंट्रा और इंटर स्टेट ई-वे बिल?

 

राज्य के अंदर ही स्टॉक ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा, जबकि एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा।

 

1 अप्रैल से लागू होगा इंटर स्टेट बिल

 

अब देश भर में इंटर स्टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल से लागू होगा। जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 15 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से राज्यों में लागू होगा। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल को 1 जून 2018 तक पूरे देश में लागू  करने का प्लान है। अभी इंट्रा स्टेट ई-वे बिल तीन राज्यों केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में 15 अप्रैल से लागू होगा और इसके बाद अन्य राज्यों में लागू किया जाएगा। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 4 राज्यों के लॉट में लागू किया जाएगा। यानी पहले 4 राज्यों में लागू होगा और उसके बाद अन्य 4 राज्यों में लागू होगा।

 

क्या है ई-वे बिल?

 

ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा। यह वैलिडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी के लिए 20 दिन का ई-वे बिल बनेगा।

 

जीएसटी काउंसिल ने टाला रिवर्स चार्ज

 

काउंसिल ने रिवर्स चार्ज को भी 1 जुलाई तक के लिए टाल दिया है। जीएसटी काउंसिल रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म, टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस), टीसीएस को  1 जुलाई तक टाल दिया है। जीएसटी में अनरजिस्टर्ड डीलर से प्रोडक्ट या नॉन रजिस्टर जॉब वर्कर से सर्विस लेने पर रिवर्स चार्ज लगने का प्रावधान है। यानी, अगर आपने अनरजिस्टर्ड डीलर से कोई सर्विस या प्रोडक्ट लेने पर आपको टैक्स देना होगा। जैसे जीसएटी रजिस्टर्ड डीलर अगर किसी अनरजिस्टर्ड डीलर से कोई प्रोडक्ट या सर्विस लेता है तो उसे रिवर्स चार्ज  चुकाना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि अनरजिस्टर्ड डीलर जीएसटी के दायरे से बाहर है। हालांकि रजिस्टर्ड डीलर को बाद में दिए गए टैक्स का रिफंड मिल जाएगा।

 

 

रिटर्न फाइलिंग आसान बनाने पर नहीं हुआ फैसला

 

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली  ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने रिटर्न फाइलिंग के दो तरीकों के बारे में चर्चा की है लेकिन इस पर कोई आम सहमति अभी नहीं बन पाई है। अभी रिटर्न फाइलिंग का जो तरीका है वह अगले तीन महीने तक चलेगा। कारोबारियों को जीएसटीआर-3बी जून तक फाइल करनी होगी।

 

आगे पढ़े - जीएसटी काउंसिल मीटिंग के अहम प्वाइंट

 

 

एक्सपोर्टर्स के लिए बढ़ाई छूट

 

एक्सपोटर्स के लिए छूट छह महीने के लिए बढ़ा दी है।

 

जीएसटी काउंसिल के अहम प्वाइंट

 

1 इंटर स्टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल से लागू होगा।

 

2 इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 15 अप्रैल से होगा लागू। 1जून तक पूरे देश में होगा लागू।

 

3 4 राज्यों के लॉट में इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू होगा।

 

4 रिटर्न फाइल करने का मौजूदा तरीका 3 महीने के लिए बढ़ा दिया है।

5 कारोबारियों को जीएसटीआर-3बी जून तक फाइल करनी होगी।

6 काउंसिल अभी जीएसटी रिटर्न फॉर्म को आसान बनाने को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई है।

 

 

 

 

 

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