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ATF, नेचुरल गैस को GST के दायरे में लाने की तैयारी, काउंसिल इस हफ्ते ले सकती है फैसला

जीएसटी काउंसिल की बैठक 21 जुलाई को होनी है।

Natural Gas and Jet Fuel May Come Under GST Ambit this Week

नई दिल्‍ली. GST काउंसिल इस हफ्ते जेट फ्यूल (ATF) और नेचुरल गैस को GST के दायरे में लाने पर विचार कर सकती है, लेकिन टैक्स स्लैब इसमें रुकावट का काम कर रहा है। यह जानकारी इस मामले से जुड़े लोगों ने दी है। GST काउंसिल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़े फैसले लेने वाली शीर्ष इकाई है। 

 


अभी तक GST के दायरे से बाहर है जेट फ्यूल 
एक जुलाई 2017 को जब GST लागू किया गया था तो 5 उत्पादों- क्रूड, नेचुरल गैस, पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल (विमान ईंधन) को इसके दायरे से बाहर रखा गया था।  मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि केंद्र और राज्यों को होने वाले नुकसान के चलते इन्हें तुरंत GST के दायरे में लाने में देरी हो रही है। हालांकि, प्रक्रिया शुरू करने के लिए नेचुरल गैस और ATF को उपयुक्त माना जा रहा है। GST काउंसिल की बैठक 21 जुलाई को होनी है। इसमें नेचुरल गैस और ATF को GST के दायरे में लाने का प्रस्ताव चर्चा के लिए लाया जा सकता है। GST काउंसिल में वित्त मंत्री के अलावा अन्य सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री या प्रतिनिधि शामिल हैं। 

 

टैक्‍स स्‍लैब पर है मुश्किल 
हालांकि, नेचुरल गैस और जेट फ्यूल को GST के मौजूदा टैक्‍स स्‍लैब 5, 12, 18 और 28 फीसदी में रखना मुश्किल साबित हो रहा है। अभी केंद्र ATF पर 14 फीसदी का उत्पाद शुल्क लगाता है। इसके ऊपर से राज्य 30 फीसदी तक सेल्स टैक्स या वैट लगाते हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में जेट फ्यूल पर 5 फीसदी वैट है, जबकि तमिलनाडु में 29 फीसदी, महाराष्ट्र और दिल्ली में 25 फीसदी और कर्नाटक में 28 फीसदी वैट है। 

 

ATF पर 28% लग सकता है टैक्‍स 
ATF के मामले में बड़े एयरपोर्ट्स वाले राज्यों में टैक्‍स रेट 39-44 फीसदी होगी। सूत्रों ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि यदि ATF पर अधिकतम 28 फीसदी का टैक्‍स लगाया जाता है, तो बड़े पैमाने पर रेवेन्‍यू का नुकसान होगा। इससे बचने के लिए राज्यों को ATF की उच्च दर पर कुछ वैट लगाने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए केंद्र और राज्यों को इस पर सहमत होना होगा। उन्होंने बताया कि 28 फीसदी GST रेट का मतलब कम वैट वाले राज्यों में ATF की कीमत में वृद्धि होगी। नेचुरल गैस के मामले में, कंज्‍यूमर्स के स्तर में कीमतों में वृद्धि हो सकती है। 

 

इंडस्‍ट्री की नेचुरल गैस पर नहीं लगती एक्‍साइज ड्यूटी 
केंद्र सरकार इंडस्‍ट्री को बेची गई नेचुरल गैस पर कोई एक्‍साइज ड्यूटी नहीं लगाती है लेकिन CNG पर 14 फीसदी का उत्पाद शुल्क लगता है। वहीं, दूसरी ओर राज्य 20 फीसदी तक वैट लगाते हैं। दिल्ली में वैट शून्य है जबकि गुजरात में वैट 12.8 फीसदी, बिहार में 20 फीसदी, कर्नाटक में 14.5 फीसदी और महाराष्ट्र में 13.5 फीसदी वैट है। सूत्रों ने कहा यदि नेचुरल गैस पर 12 फीसदी GST लगाया जाता है तो राज्यों को नुकसान होगा लेकिन अगर 18 फीसदी टैक्‍स लगाया जाता है तो बिजली और फर्टिलाइजर के उत्पादन की लागत बढ़ेगी। CNG के लिए टैक्स निर्धारण (फिटमेंट) एक समस्या हो सकती है। 

 

 

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