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जॉब वर्कर को भी बनाना होगा ई-वे बिल, सरकार ने जारी किए 10 क्लैरिफिकेशन

सरकार ने ई-वे बिल सिस्टम आसानी से चले इसके लिए दस नए क्लैरिफिकेशन कारोबारियों के लिए जारी किए हैं।

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नई दिल्ली। देश भर में ई-वे बिल 1 अप्रैल से लागू होने वाला है। ऐसे में ई-वे बिल के काउंटडाउन में दो दिन बचे हैं। सरकार ने ई-वे बिल सिस्टम आसानी से चले इसके लिए दस नए क्लैरिफिकेशन कारोबारियों के लिए जारी किए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि रजिस्टर्ड जॉब वर्कर को ई-वे बिल बनवाना होगा। रेलवे, एयर या जहाज के जरिए गुड्स ट्रांसपोर्ट करने पर रजिस्टर्ड सप्लायर को ही ई-वे बिल बनाना होगा।

 

 

सरकार ने जारी किए 10 नए क्लैरिफिकेशन

 

 

1 अगर प्रोडक्ट का ट्रांसपोर्टेशन जॉब वर्क के लिए किया जा रहा है, तो उस केस में सप्लायर या रजिस्टर्ड जॉब वर्कर को ई-वे बिल जेनरेट करना होगा।

 

 

2 रेलवे, एयर या जहाज के जरिए गुड्स ट्रांसपोर्ट करने पर रजिस्टर्ड सप्लायर या रेसिपिंट ही ई-वे बिल जेनरेट करेगा। इस केस में ट्रांसपोर्टर ई-वे बिल जेनरेट नहीं करेगा। गुड्स की डिलीवरी के समय ई-बिल होना जरूरी होगा।

 

 

3 देश भर में इंटर स्टेट ई-वे बिल यानी एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल 2018 से लागू होग। इससे पहले तक ई-वे बिल अपनी इच्छा से बनवा सकते हैं।

 

4 कारोबारी को ई-वे बिल की वेबसाइट http://ewaybillgst.gov.in पर जाकर रजिस्टर करना होगा। वह अपने जीएसटीआईएन नंबर से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें 1 अप्रैल 2018 का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

 

5 ई-वे बिल तभी बनवाने की जरूरत है जब गुड्स की वैल्यू टैक्स मिलाकर 50 हजार रुपए से ज्यादा है। इसमें जीएसटी में टैक्स छूट के दायरे में आने वाले प्रोडक्ट और जिन प्रोडक्ट को ई-वे बिल बनवाने से छूट मिली है उनके लिए ई-वे बिल नहीं बनाना होगा। वह 50 हजार रुपए की गिनती में भी शामिल नहीं होंगे।

 

6 अगर ट्रांसपोर्ट किए जाने वाले गुड्स की कीमत 50 हजार रुपए से कम है तो ई-वे बिल नहीं बनाना होगा। अगर एक व्हीकल में अगर एक से ज्यादा ट्रेडर्स के गुड्स जा रहे हैं और हर एक के कन्साइनमेंट की वैल्यू 50 हजार रुपए से कम है लेकिन उनके कन्साइनमेंट की वैल्यू 50 रुपए से अधिक भी है तो भी ई-वे बिल बनवाने की जरूरत नहीं होगी।

 

 

7 सप्लायर ट्रांसपोर्टर, कुरियर एजेंसी और ई-कॉमर्स ऑपरेटर को पार्ट-A सप्लायर की तरफ से भरने के लिए ऑथराइज्ड कर सकता है।

 

आगे पढ़ें - अन्य क्लैरिफिकेशन के बारे में..

 

 

 

 

सरकार ने जारी किए नए क्लैरिफिकेशन

 

8 अगर सप्लायर के बिजनेस का प्रिंसिपल प्लेस और ट्रांसपोटर्स के बिजनेस प्लेस के बीच की दूरी 50 किलोमीटर से कम है तो ई-वे बिल का पार्ट-B भरने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ ई-वे बिल का पार्ट-A भरना होगा।

 

9ई-वे बिल जेनरेट करने पर उसे रिजेक्ट और अक्सेप्ट करने के लिए 72 घंटे का समय मिलेगा।

 

10 ई-वे बिल की एक दिन की वैलिडिटी 100 किलोमीटर तक के लिए होगी। दूरी में 100 किलोमीटर बढ़ने पर एक दिन ई-वे बिल की टाइम वैलिडिटी में बढ़ता जाएगा।

 
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