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जीएसटी रिफंड को लेकर कारोबारियों में खींचतान, कहा- देना पड़ रहा है डबल टैक्स

दरअसल, जीएसटी नहीं चुकाने वाले कारोबारी का टैक्स भी समय पर जीएसटी देने वाले ट्रेडर्स को भरना पड़ रहा है।

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नई दिल्ली.. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी) लागू हुए नौ महीने बीतने के बावजूद रिफंड अटकने की समस्या बरकरार है। ऐसे में ट्रेडर्स के बीच खींचतान शुरू हो गई है। कुछ ट्रेडर्स पर लेने के बावजूद जीएसटी जमा नहीं करने के आरोप लग रहे हैं। इससे रिफंड की समस्या गहरा गई है। वहीं कुछ ट्रेडर्स डबल टैक्स चुकाने का बोझ पड़ने की बात कर रहे हैं। कारोबारियों और ट्रेडर्स के रिफंड भी इसकी वजह से अटक रहे हैं। कारोबारियों की तरफ से यह मामला वित्‍त मंत्रालय के सामने उठाया जा चुका है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिला है।

 

 बार चुकाना पड़ रहा है जीएसटी

इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेजिडेंट कपिल चोपड़ा ने moneybhaskar.com को बताया कि जीएसटी में दो बार टैक्स चुकाने की लाएबिलिटी हो गई है। उन्होंने एक उदारहण के जरिए बताया कि जैसे किसी A कारोबारी ने दूसरे B कारोबारी से गुड्स खरीदा। जब A ने गुड्स खरीदा तो उसने जीएसटी चुकाया जो उस ट्रांजेक्शन के इन्वॉइस पर होता है। अब A ने आगे गुड्स बेच दिया। अब A ने अपनी रिटर्न फाइल की और B को दिए जीएसटी का रिफंड अप्लाई किया। अब B ने रिटर्न नहीं फाइल की या A की साथ की गई ट्रांजेक्शन को नहीं दिखाया तो A की लाइबिलिटी बढ़ जाती है। जीएसटी सिस्टम B के नहीं दिए जीएसटी का टैक्स A से मांगता है। इससे A की लाएबिलिटी डबल हो गई। पहले उसने B को जीएसटी दिया और दूसरी बार B ने टैक्स नहीं जमा कराया तो उसका भी रिफंड भरना पड़ रहा है।

 

 

इसकी वजह से भी नहीं मिल रहा रिफंड

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि ट्रेडर्स और कारोबारी यह समस्या बीते 8 महीने से झेल रहे हैं। इसमें गलत कारोबारी या टैक्स नहीं चुकाने वाले कारोबारी की सजा सही टैक्स चुकाने वाले कारोबारी को उठानी पड़ रही है। अब तो टैक्स चुकाने वाले करोबारियों को टैक्स नहीं चुकाने वाले कारोबारियों को टैक्स देने के लिए दबाव बनाना पड़ रहा है। ये दबाव हमेशा काम नहीं करता।

 

कारोबार हो गया है मुश्किल

वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में यूटेन्सिल्स मैन्युफैक्चर देवकी नंदन बागला ने moneybhaskar.com को कहा कि अगर किसी कारोबारी के 2,000 से अधिक सप्लायर हैं तो वह कैसे पता लगाएगा कि किसने टैक्स नहीं चुकाया है। अगर किसी सप्लायर से एक ही बार डील की दोबारी नहीं कि तो ऐसे कारोबारी, डीलर या ट्रेडर को ढूंढना जिसने टैक्स नहीं चुकाया है काफी मुश्किल है।

 

 

जीएसटी पोर्टल नहीं बताता डिफॉल्टर

सीए गोविद शर्मा ने moneybhaskar.com को कहा कि जीएसटी पोर्टल यह नहीं बताता कि आपके किस सप्लायर ने टैक्स नहीं चुकाया है। इसके कारण कारोबारी या ट्रेडर्स के लिए यह जाना पाना काफी मुश्किल है कि किसकी वजह से उसे रिफंड नहीं मिल रहा है और उसका नहीं चुकाया टैक्स भी चुकाना पड़ रहा है।

 

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वैट में नहीं थी ये समस्या

कारोबारियों और सीए के मुताबिक वैट में यह समस्या नहीं थी क्योंकि आपको रिफंड अपने चुकाए टैक्स के आधार पर मिलता था। ये दूसरी पार्टी के टैक्स चुकाने पर निर्भर नहीं करता था।

 

फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजा मेमोरेंडम

इंडस्ट्रियल और ट्रेडर्स एसोसिएशन ने फाइनेंस मिनिस्ट्री को बीते आठ महीने से जीएसटी पोर्टल और जीएसटी में यह बदलाव करने की मांग रही है कि इस नियम को बदला जाए क्योंकि इसकी वजह से उनके रिफंड सबसे ज्यादा अटके हुए हैं।

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