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इन सॉफ्टवेयर की मदद से जेनरेट कर सकते हैं ई-वे बिल, 2,500 रुपए में मिल रहा है

छोटे कारोबारी ई-वे बिल के लिए इन्वॉइस बनाने, परचेज बिल बनाने से लेकर ई-वे जेनरेट करने के लिए परेशान हो रहे हैं।

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नई दिल्ली। देश भर में इंटर स्टेट ई-वे बिल 1 अप्रैल और 11 राज्यों में इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू हो चुका है। अभी भी छोटे कारोबारी ई-वे बिल के लिए इन्वॉइस बनाने, परचेज बिल बनाने से लेकर ई-वे जेनरेट करने के लिए परेशान हो रहे हैं। कारोबिरयों की इन्हीं परेशानी को आसान करने के लिए लिए कंपनियां सॉफ्टवेयर और ऐप लेकर आई हैं जिसकी मदद से ई-वे बिल आसानी से जेनरेट कर सकते हैं। यहां हम आपको उन ऐप्स के बारे में बता रहे हैं जहां 2,500 रुपए देकर मंथली ई-वे बिल जेनरेट कर सकते हैं।

 

टैली ERP 9

 

ई-वे बिल के लिए टैली ने टैली ERP 9 सॉफ्टवेयर बनाया है। टैली ने ये ऐप ई-वे बिल इन्वॉइस से लेकर ई-वे बिल जेनरेट करने के कॉम्पलाएंस को आसान बनाने के लिए बनाया है। ये सॉफ्टवेयर ट्रांसपोटर्स, ट्रेडर, कारोबारी सभी तरह के कारोबार में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस सॉफ्टवेयर के जरिए ट्रेडर्स और कारोबारी इन्वॉइस, परचेज बिल, ई-वे बिल बनाने से लेकर ई-वे बिल के पोर्टल पर अपलोड कर ई-वे बिल जेनरेट करने में मदद करते हैं। ये सॉफ्टवेयर एरर रोकने का भी काम करता है। ये सॉफ्टवेयर एरर ढूंढने, रोकने और करेक्ट करने में मदद करता है।

 

एन-ट्रांन्जेक्ट डॉट कॉम

 

एडिक्योर इंन्फो ने एन-ट्रांन्जेक्ट डॉट कॉम से ई-वे बिल के लिए अकाउंटिग सॉफ्टवेयर बनाया है। एडिक्योर इंन्फो के सीओओ ​कृष्णा वीराथु ने moneybhaskar.com को बताया कि उनके सॉफ्टवेयर में बैकवर्ड इंटिग्रेशन है यानी उनके सिस्टम में कारोबारी के सप्लायर से लेकर परचेजर, एचएसएन कोड सब फीड हो जाएगा। इससे अकांटिंग एंट्री की डुप्लिकेशन नही होगी। इसमें ट्रांसपोर्टर्स अपनी कन्सॉलिडेटेड से लेकर सिंगल ई-वे बिल आसानी से बना सकता है।

 

-वे बिल का सरकारी ऐप

 

सरकार ने ई-वे बिल का ऐप लॉन्च किया है जिसके जरिए कारोबारी ई- बिल जेनरेट कर सकते हैं। इस ऐप पर टोल फ्री नंबर, विडियो, ई-वे बिल से जुड़ी जानकारी दी गई है। ये ऐप कारोबारियों को इंटर और इंट्रा स्टेट, सिंगल ई-वे बिल से लेकर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल जेनरेट करने में मदद करता है। यहां कारोबारी अपने कन्फ्यूजन को ई-मेल के जरिए पूछकर भी समझ सकते हैं। ये ऐप अभी एंडरॉएड प्लेटफॉर्म पर ही मौजूद है।

 

क्लीयर टैक्स ई-वे बिल ऐप

 

क्लीयर टैक्स ने ई-वे बिल के लिए सॉफ्टवेयर डेवलप किया है। इस सॉफ्यवेयर के जरिए कारोबारी ई-वे बिल जेनरेट कर सकते हैं। साथ ही एक्सपर्ट के जरिए ट्रेनिंग भी ले सकते हैं। इस ऐप में कारोबारियों के लिए ई-वे बिल को आसानी से जेनरेट करने के लिए ट्यूटोरियल्स भी बनाए हैं।

 

मास्टर इंडिया

 

मास्टर इंडिया इंडिया अकाउंटिंग सॉफ्टेवयर कंपनी है जो जीएसटी के साथ ई-वे बिल जेनरेट करने में मदद करती है। ये ऐप कारोबारियों को इंटर और इंट्रा स्टेट, सिंगल ई-वे बिल से लेकर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल जेनरेट करने में मदद करता है।

 

आगे पढ़ें – कितने में मिलेगी ये सर्विस..

 

 

 

मंथली पैकेज पर मिल रही है सर्विस

 

ई-वे बिल जेनरेट करने के लिए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी मंथली से लेकर सालाना के पैकेज ऑफर कर रही हैं। ये सॉफ्टवेयर का पैकेज ई-वे बिल जेनरेट करने की संख्या पर निर्भर करता है। ये सॉफ्टवेयर 2,500 रुपए से लेकर 5,000 रुपए सालाना के पैकेज ऑफर कर रही हैं लेकिन कंपनी के मंथलीई-वे बिल की संख्या ज्यादा होने पर पैकेज प्राइस भी बढ़ जाएगा। कुछ कंपनिया प्रति ई-वे बिल 15 पैसा से 50 पैसा चार्ज कर रही है। कारोबारी को अपने कंप्यूटर पर इनके अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने होंगे। अपना डेटा इन पर एक्सपोर्ट करना होगा जिसके बाद वह ई-वे बिल जेनरेट कर सकते हैं।

 

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