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ई-वे बिल पर18 जनवरी को GST काउंसिल की मीटिंग में होगा फैसला, कारोबारियों की है डेट बढ़ाने की मांग

ई-वे बिल को 1फरवरी की जगह1 अप्रैल से लागू कराने की मोटे तौर पर सहमति बनी है।

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नई दिल्ली. 18 जनवरी को जीएसटी काउंसिल को होने वाली मीटिंग में ई-वे बिल अहम मुद्दा रहेगा। ऐसा इसलिए है कि ट्रेडर कारोबारी अभी भी 1 फरवरी से लागू करने के पक्ष में नहीं है। इसी सिलसिले में राज्य प्रतिनिधि और ट्रेडर्स के बीच मीटिंग हुई है, जिसमें ई-वे बिल को 1 फरवरी की जगह 1 अप्रैल से लागू कराने की मोटे तौर पर सहमति बनी है।

 

जीएसटी काउंसिल की 18 जनवरी की मीटिंग में हो सकता है फैसला

 

18 जनवरी 2018 को जीएसटी काउंसिल की मीटिगं होनी है। सूत्रों के मुताबिक GST काउंसिल की मीटिंग में ये तय होगा कि ई-वे बिल को 1 फरवरी से लागू किया जाए या 1 अप्रैल से लागू किया जाए। दरअसल, जीएसटी के राज्य प्रतिनिधि और ट्रेडर्स ने मीटिंग की है जिसमें उन्होंने ई-वे बिल की लागू करने की डेट बढ़ाकर 1 अप्रैल करने की मांग की। जीएसटी काउंसिल के राज्य प्रतिनिधि ने बताया कि अगली मीटिंग में ई-वे बिल चर्चा का बड़ा विषय है और इस पर फैसला लिया जा सकता है।

 

16 जनवरी से शुरू होगा ट्रायल

 

1 फरवरी से ई-वे बिल लागू होना है। ई-वे बिल ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 से लागू करने का फैसला किया गया है। डेडलाइन से पहले ई-वे बिल का ट्रायल करने की डेडलाइन तय की गई है जो 15 जनवरी से शुरू होगा। ई-वे बिल लागू होने से सरकार के लिए टैक्स चोरी पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा।

 

 

कारोबारियों को है इस बात का डर

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि ट्रेडर्स को इस बात का भी डर है कि अभी भी जैसे वह रिटर्न फाइल करने में अभी भी स्ट्रगल कर रहे हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन के समय जब मंथली रिटर्न की जगह रोज करोड़ों की संख्या में ई-वे बिल ही जनरेट होगा, तो क्या सिस्टम सही काम करेगा?

 

ट्रेडर्स एसोसिएशन ने बुलाई मीटिंग

 

मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने moneybhaskar.com से कहा कि देश भर की सभी ट्रेडर्स एसोसिएशन जीएसटी से जुड़ी सभी परेशानियों को लेकर मीटिंग की। इस मीटिंग में ई-वे बिल नए फाइनेंशियल ईयर से लागू करने, लिमिट बढ़ाई जाने, जीएसटी पोर्टल पर आ रही फाइलिंग की दिक्कतों, एपीएमसी सेस हटाने, ब्रांडेड फूड ग्रेन पर जीएसटी हटाने को लेकर सरकार पर कैसे दबाव बनाया जाए आदि पर विचार किया गया। अब ट्रेडर्स जीएसटी काउंसिल की 18 जनवरी को होने वाली मीटिंग का इंतजार कर रहे हैं।

 

कारोबारी कर सकते हैं स्ट्राइक

 

सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएश के सेक्रेटरी ताराचंद गुप्ता ने कहा कि ट्रेडर्स को इस बात का भी डर है कि अभी भी जीएसटी पोर्टल रिटर्न फाइल और रिफंड करने में जूझ रहा हैं। अगर ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन के समय अगर ई-वे बिल जेनरेट करने में समस्या आती है, तो इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन और प्रोडक्ट की कीमतों पर पड़ेगा। जितेंद्र शाह ने कहा कि ट्रेडर्स और कारोबारी बड़े स्तर इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। अगर सरकार कारोबारियों की बात नहीं मानती तो वह हड़ताल भी कर सकते हैं।

 

बढ़ाई जाए ई-वे बिल की लिमिट

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ई-वे बिल में 50,000 रुपए की लिमिट बहुत कम है, जिसे सरकार को बढ़ाकर तीन लाख रुपए करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि ट्रेडर के कम क्वांटिटी के सामान की कीमत भी 1 से 10 लाख रुपए के बीच आराम से हो जाती है। ऐसे में इस लिमिट से कारोबारियों के लिए डॉक्युमेंटेशन का काम बढ़ जाएगा। इसके अलावा ई-वे बिल में सरकार ट्रांसपोर्ट के दिनों की संख्या बढ़ानी चाहिए। खंडेलवाल ने कहा कि ट्रेडर्स एसोसिएशन इन मुद्दों पर जल्द सरकार से मिलेगी।

 

 

आगे पढ़े - क्या है ई-वे बिल

क्या है ई-वे बिल

 

 

 

ई-वे बिल के तहत 50,000 रुपए से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा। यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।

 

क्या है इंट्रा और इंटर स्टेट ई-वे बिल

 

 

स्टॉक राज्य के अंदर ही ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा। राज्य के बाहर यानी अन्य राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा।

 

 

 

 

 

 

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