Home » Economy » GSTकुछ घंटो में ही फेल हो गया ई-वे बिल सिस्टम- Eway bill system failed in few hours

बजट के दिन देश में थम गया था गुड्स ट्रांसपोर्टेशन, कुछ घंटो में ही फेल हो गया ई-वे बिल सिस्टम

सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद ई-वे बिल का पोर्टल कुछ घंटे में ही बैठ गया। इस पर लाइव रिपोर्ट..

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नई दिल्ली। सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद ई-वे बिल का पोर्टल कुछ घंटे में ही बैठ गया। हालत ऐसी हो गई कि सरकार को बजट के दिन शाम होते-होते ई-वे बिल को अनिश्तित काल के लिए टालना पड़ा। यही नहीं शुक्रवार को ई-वे बिल को देखने वाली कंपनी जीएसटीएन नेटवर्क से सरकार ने इस नॉक डाउन की रिपोर्ट मांगी। पूरे दिन कारोबारियों को कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस पर moneybhaskar.com ने लाइव रिपोर्ट तैयार की है।

 

एक्सपोटर्स नहीं भेज पा रहे थे कन्साइनमेंट

 

एशियन हैंडीक्राफ्ट के चेयरमैन राजकुमार मल्होत्रा ने moneybhaskar.com को बताया कि वह अपना हैंडीक्राफ्ट का कन्साइनमेंट शिपमेंट के लिए मुंबई नहीं भिजवा पाए क्योंकि ई-वे बिल की वेबसाइट हैंग हो रखी थी। बिल बनाने के लिए वेबसाइट ही रिस्पॉन्ड नहीं कर रही थी। मल्होत्रा ने कहा एक्सपोर्टर्स के लिए शिपमेंट का एक-एक दिन काफी महत्व रखता है। एक दिन लेट होने से शिपमेंट 2 से 3 दिन लेट हो जाता है। उन्होंने कहा कि ई-वे बिल पोर्टल के इतना खराब परफॉर्म करने की उम्मीद नहीं थी।

 

नहीं भेज पाए प्रोडक्ट

 

दिल्ली के ट्रेडर्स अन्य राज्य में स्टॉक नहीं भेज पा रहे थे। सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ताराचंद गुप्ता ने moneybhaskar.com को बताया कि ट्रेडर्स गुरूवार को माल गोदाम से ही नहीं निकल पाए। जो स्टॉक गुरूवार को जाना था वो नहीं जा पाया क्योंकि एक छोटा ट्रेडर वेबसाइट पर ई-वे बिल परमिट बना ही नहीं पा रहा था। गुरूवार को मार्केट में ट्रेडर्स परेशान हो गया था कि वह क्या करे। अगर सरकार ई-वे बिल नहीं टालती तो प्रोडक्ट्स की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती।

 

 

चार्टेड अकाउंटेंट हुए परेशान

 

टैक्स फर्म एम के कन्सलटेंट के प्रमुख एम के गांधी ने बताया कि उनके 500 से अधिक क्लाइंट खासकर एक्सपोर्टर्स सबसे ज्यादा परेशान थे क्योंकि उनके लिए एक-एक दिन से फर्क पड़ता था। गांधी ने बताया कि पूरा दिन उनके ऑफिस में उनके क्लाइंट के फोन आते रहे कि ई-वे बिल कैसे जनरेट होगा। वह सीए को ई-वे बिल जनरेट करने के लिए कह रहे थे लेकिन चार्टेड अकाउंटेट भी क्या करते क्योंकि वह सिस्टम पर ही बनना था, जो काम ही नहीं कर रहा था।

 

 

हर घंटे 3 लाख ई-वे बिल बनाने में फेल हुआ पोर्टल

 

अढिया ने माना कि ट्रायल रन के समय ई-वे बिल सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा था लेकिन दो से तीन ई-वे बिल हर घंटे जनरेट करने का लोड पोर्टल नहीं उठा पाया। उन्होंने कही कि ई-वे बिल के ट्रायल के समय रोजाना 2 लाख ई-वे बिल बन रहे थे लेकिन 1 फरवरी को लागू होने के पहले दिन पोर्टल हर घंटे 2 से 3 लाख ई-वे बिल बनाने का लोड नहीं उठा पाया। इसलिए उन्होंने तुरंत ई-वे बिल टालने का फैसला ले लिया। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने जीएसटीएन से ई-वे बिल के आईटी सिस्टम को लेकर रिपोर्ट भी मांगी है।

 

आगे जानें - सरकार क्यूं लाना चाहती है ई-वे बिल

 

 

-वे बिल को वापस नहीं लेगा चाहती सरकार

 

ई-वे बिल का पोर्टल नेशनल इंफोर्मेटिक सेंटर (एनआईसी) ने बनाया है और इसे लागू करने का काम जीएसटीएन देखेगा। अढिया ने कहा कि टैक्स चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल एक बड़ा रोल अदा करेगा। ऐसे में सरकार इसे वापस नहीं लेगी। ई-वे बिल फिर से लागू किया जाएगा, जब इसका सिस्टम तैयार हो जाएगा।

 

 

क्या है ई-वे बिल?

 

- ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा।

 

-इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा।

 

-यह वैलिडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी के लिए 20 दिन का ई-वे बिल बनेगा।

 
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