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ई-वे बिल ग्राउंड रिपोर्ट: ट्रांसपोर्टेशन समय 20-30% घटा, लेकिन इन्वॉयस और अमाउंट लिमिट प्रॉब्लम

सरकार ई-वे बिल को लागू कर जहां चेक प्वाइंट पर लंबी कतार को कम करना चाहती है,वहीं टैक्स चोरी भी कंट्रोल करना चाहती है।

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नई दिल्ली। 3 जून से देश भर में ई-वे बिल पूरी तरह से लागू हो गया है। पिछले दो महीने से इंटर स्टेट ई-वे बिल जहां पूरे देश में लागू है, वहीं इंट्रा स्टेट बिल भी चरणबद्ध तरीके से लागू कर दिया गया है। सरकार ई-वे बिल को लागू कर जहां चेक प्वाइंट पर लंबी कतार को कम करना चाहती है, वहीं टैक्स चोरी को भी कंट्रोल करना चाहती है। moneybhaskar.com ने अप्रैल से लागू ई-वे बिल की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें हमने पड़ताल की है, कि वास्तव में ट्रांसपोर्टेशन समय में कमी आई कि नहीं, अधिकारी अब चेक प्वाइंट पर कम परेशान करते हैं या नहीं और प्रैक्टिकली कारोबारियों को ग्राउंड पर किस तरह की प्रॉब्लम का सामना करना पड़ रहा है...

 

टाइम पीरियड 20-30% हुआ कम, लागत घटी

 

इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च और ट्रेनिंग के सीनियर के को-ऑर्डिनेटर एस पी सिंह ने moneybhaskar.com को बताया कि ई-वे बिल से ट्रांसपोर्टेशन आसान हो गया है। टाइम कम लग रहा है जिसके कारण लॉजिस्टिक कॉस्ट 5 से 7 फीसदी कम हुई है। वहीं, मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने moneybhaskar.com को बताया कि ई-वे बिल सही तरीके से काम कर रहा है। चेकप्वाइंट पर ट्रक घंटों तक खड़े नहीं होते और दूसरे राज्यों में एंट्री के समय परेशानी नहीं होती। इसके कारण ट्रक अपने डेस्टिनेशन प्वाइंट पर तय दिनों से 2 से 3 दिन पहले पहुंच जाते हैं। जिसके लिए पहले करीब 10-12 दिन का समय लगता था। इसके कारण लॉजिस्टिक कॉस्ट भी कम हुई है।

 

अधिकारियों का दखल कम

 

दिल्ली की इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एपेक्स चैंबर के अध्यक्ष कपिल चोपड़ा ने moneybhaskar.com को बताया कि एंट्री प्वाइंट पर चेकिंग नहीं होने से माल आसानी से आता-जाता है। इससे अधिकारियों का दखल कम हो गया है। अब एंट्री प्वाइंट पर घंटों और कई दिनों तक ट्रक खड़े नहीं रहते और अधिकारी भी परेशानी नहीं करते।

 

टैक्स कलेक्शन की रियल पिक्चर कुछ महीनों बाद

 

एस पी सिंह ने moneybhaskar.com को बताया कि सरकार ई-वे बिल के जरिए टैक्स चोरी रोकना और टैक्सपेयर्स बेस बढा़ना चाहती है। इंटर स्टेट ई-वे बिल1 अप्रैल से देश भर में लागू हुआ है और इंट्रा स्टेट ई-वे बिल फेज वाइज 3 जून तक सभी राज्यों में लागू हो चुका है। अभी तक जीएसटी के डेटा में टैक्स कलेक्शन में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नजर नहीं आई है लेकिन आने वाले महीनों में ई-वे बिल से मिलने वाले डेटा का फायदा जीएसटी पेयर्स और कलेक्शन में नजर आएगा।

 

मल्टीपल इन्वॉयस प्रॉब्लम

 

ऑटो पार्ट्स कारोबारी रघुवंश अरोड़ा ने moneybhaskar.com को बताया कि कहा कि जिन कारोबारियों की प्रोडक्ट लाइन ज्यादा है उन्हें एक ही कारोबारी को 10 तरह के प्रोडक्ट भेजने पर अलग-अलग ई-वे बिल बनाना पड़ता है। ऐसे में कारोबारियों को कई मल्टीपल ई-वे बिल बनाने पड़ते हैं इससे रिकॉर्ड और डॉक्युमेंटेशन बढ़ गया है।

 

आगे पढ़े - और क्या आ रही है परेशानी

 

 

50 हजार का अमाउंट कम

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि ई-वे बिल में 50,000 रुपए के लिमिट बहुत कम है सरकार को इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए करना चाहिए। क्योंकि किसी भी कारोबारी को छोटा सा छोटा ऑर्डर सप्लाई करने पर भी 50 हजार रुपए से ज्यादा का बिल बन जाता है। ऐसे में इस लिमिट के कम होने से कारोबारियों के लिए डॉक्युमेंटेशन काम बढ़ गया है।

 

टाइम पीरियड बढ़ाना चाहिए

 

खंडेलवाल ने कहा कि ई-वे बिल में सरकार ट्रांसपोर्ट के दिनों की संख्या को बढ़ाए। कई बार स्टॉक समय पर नहीं निकल पाता जिसके कारण ई-वे बिल का टाइमपीरियड निकल जाता है।

 

 

दूरी               -वे बिल का पीरियड

0-100 KM          24घंटे

101-300 KM      3दिन

301-500 KM      5दिन

501-1000 KM    10दिन

1000 KM से ज्यादा 20दिन

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