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ई-वे बिल का ट्रायल शुरू, कारोबारियों को मिलेगी SMS, QR कोड, ऐप सर्विस

सरकार ने ई-वे बिल में कई ऐसे फीचर एड किए हैं जिससे कारोबारियों के लिए ई-बिल जनरेट करना और उस ट्रैक करना आसान हो जाएगा।

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नई दिल्ली। ई-वे बिल का ट्रायल रन 10 राज्यों में शुरू हो गया है। ट्रेडर्स और कारोबारियों को आशंका है कि जीएसटी की तरह ई-वे बिल इश्यू न हो इसके मद्देनजर सरकार ने ई-वे बिल में कई ऐसे फीचर एड किए हैं जिससे कारोबारियों के लिए ई-बिल जनरेट करना और उस ट्रैक करना आसान हो जाएगा। इसके तहत कारोबारियों को क्यूआर कोड, एसएसएस जैसे फीचर मिलेंगे।

 

शुरू हो चुका है ट्रायल

 

 

 

जीएसटीएन के अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि 16जनवरी से ई-वे बिल का ट्रायल रन शुरू हो गया है। ई-वे बिल के लिए जीएसटीएन पोर्टल से अलग वेबसाइट बनाई है। कल से देश भर के सभी कारोबारी और ट्रेडर्स इस वेबसाइट पर ई-वे बिल जनरेट कर पाएंगे।

 

 

 

एसएमएस पर बन जाएगा ई-वे बिल

 

 

 

कारोबारियों और ट्रांसपोटर्स को कोई भी टैक्स ऑफिस या चेक पोस्ट पर जाने की जरूरत नहीं होगी। ई-वे बिल इलेक्ट्रॉनिकली स्वयं कारोबारी निकाल पाएंगे। कारोबारी ऑफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिन बनवा सकेंगे। जिन कारोबारियों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और उन्हें एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं, वह एसएमएस सर्विस से ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं। इसके लिए कारोबारियों को अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर करना होगा। इसी नबंर से एसएसएस के जरिए ई-वे बिल की रिक्वेस्ट डिटेल देकर जनरेट कर सकते हैं।

 

 

 

मोबाइल ऐप से कर पाएंगे ई-वे बिल जनरेट

 

 

 

सरकार ने एंडरॉयड फोन के लिए ई-वे बिल का ऐप भी लॉन्च किया है जिसे कारोबारी प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप के जरिए भी कारोबारी ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं। इस ऐप को डाउनलोड कर अपनी डिटेल और जीएसटीआईएन नंबर रजिस्टर करना होगा।

 

 

 

जनरेट होगा क्यूआर कोड

 

 

 

ई-वे बिल जनरेट करने पर क्यूआर कोड जनरेट होगा। इस कोड के जरिए जीएसटी अधिकारी कभी भी व्हीकल की चेकिंग कर पाएंगे। क्यूआर कोड के जरिए व्हीकल को ट्रैक कर पाएंगे।

 

 

 

यहां करना होगा लॉग इन

 

 

 

कारोबारियों को ई-वे बिल बनाने के लिए http://164.100.80.111/ewbnat2 पर क्लिक करना होगा। वहां अपना जीएसटी का यूजर आईडी पासवर्ड भरें। उसके बाद अपना ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं। अगर आपने ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, तो पहले आपको रजिस्टर करना होगा। इसके लिए ई-वे बिल रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करना होगा और अपना जीएसटीआईएन नंबर भरना होगा। इससे अपना पासवर्ड जनरेट हो जाएगा।

 

 

 

ट्रांसपोर्टर्स को कराना होगा रजिस्ट्रेशन

 

 

 

ई-वे बिल की वेबसाइट पर ट्रांसपोर्टर्स, वेयर हाउस ओनर, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज हाउस को रजिस्ट्रेशन अलग से कराना होगा। वेबसाइट पर जाकर ट्रांसपोर्टर्स को ऑफिस, अपनी, कारोबार और ट्रक की डिटेल भरनी होगी। फॉर्म भरने के बाद इन कारोबारियों का लॉग इन जनरेट होगा। लाॉग इन आईडी से वह अपना ई-वे बिल बना सकेंगे।

 

 

 

आगे पढ़ें - कैसे काम करेगा ई-वे बिल..

 

 

 

1 फरवरी से लागू होगा ई-वे बिल

 

जीएसटीएन पोर्टल और सरकार ने विज्ञापनों में साफ कर दिया है कि पूरे देश भर में 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू होगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भिजवाने के लिए ई-वे बिल ही ट्रांजिट पास के तौर पर काम करेगा। ई-वे बिल पूरे देश भर में मान्य होगा। अब देश भर में 50 हजार रुपए से अधिक के माल को ट्रांसपोर्ट करने के लिए ई-वे बिल लेना अनिवार्य होगा।

 

क्या है ई-वे बिल?

 

- ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा।

 

- इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा।

 

- यह वैलिडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी के लिए 20 दिन का ई-वे बिल बनेगा।

 

दूरी ई-वे बिल का पीरियड

 

0-100 KM 24 घंटे

 

101-300 KM 3 दिन

 

301-500 KM 5 दिन

 

501-1000 KM 10 दिन

 

1000 KM से ज्यादा 20 दिन

 

ये राज्य पहले से हैं तैयार

 

 

ई-वे बिल सिस्टम कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड और केरल राज्य में पहले से लॉन्च कर दिया है। अभी इन राज्यो में रोजाना 1.4 लाख ई-वे बिल जनरेट कर रहे हैं। बाकि बचे राज्य भी अगले 10 से 15 दिन में ई-वे बिल लागू कर देंगे। 16 से 31 जनवरी 2018 तक ई-वे बिल का ट्रायल चलेगा।

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