Home » Budget 2018 » Taxationआर्थिक सर्वे: GST बना गेमचेंजर, 50 फीसदी बढ़े इनडायरेक्ट टैक्सपेयर्स - Economic Survey said GST is game changer

इकोनॉमिक सर्वे: GST बना गेमचेंजर, 50 फीसदी बढ़े इनडायरेक्ट टैक्सपेयर्स

जीएसटी लागू होने के बाद से इकोनॉमिक सर्वे में पहली बार जीएसटी की सही तस्वीर सामने आई है।

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नई दिल्ली. जीएसटी लागू होने के बाद से इकोनॉमिक सर्वे में पहली बार जीएसटी की सही तस्वीर सामने आई है। सर्वे का दावा है कि जीएसटी उम्मीद से ज्यादा फायदेमंद रहा है। इसके जरिए टैक्स नेट में ज्यादा लोग आए बल्कि राज्य आधार पर कई चौंकाने वाले आंकड़े आए हैं। सर्वे में खुलासा हुआ है कि देश के पांच राज्यों से ही 70 फीसदी एक्सपोर्ट होता है। सरकार इन आंकड़ों के जरिए रोजगार के नए मौके तलाश सकेगी।

 

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उम्मीद से ज्यादा रहा जीएसटी बेस

 

रेवेन्यू न्यूट्रल रेट कमेटी ने 68.8 लाख करोड़ टैक्स बेस और जीएसटी काउंसिल ने 65.8 लाख करोड़ रुपए का अनुमान लगाया था लेकिन जीएसटी टैक्स 65 से 70 लाख करोड़ रुपए रहा जिसमें एक्सपोर्ट के डेटा शामिल नहीं है। दिसंबर 2017 तक 98 लाख जीएसटी रजिस्ट्रेशन हुए हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात में सबसे ज्यादा जीएसटी रजिस्ट्रेशन हुए हैं। पुराने टैक्स सिस्टम की तुलना में उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा नए टैक्स रजिस्ट्रेशन हुए हैं। जीएसटी रजिस्ट्रेशन में महाराष्ट्र की 16 फीसदी, तमिलनाडु 10 फीसदी, कर्नाटक 9 फीसदी, उत्तर प्रदेश 7 फीसदी, गुजरात 6 फीसदी की हिस्सेदारी है।

 

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5 राज्य करते हैं देश का 70 फीसदी एक्सपोर्ट

 

इकोनॉमिक सर्वे में बताया है कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना देश का 70 फीसदी एक्सपोर्ट करते हैं। इंडिया के कुल एक्सपोर्ट में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 22.3 फीसदी, गुजरात 17.2 फीसदी, कर्नाटक 12.7 फीसदी, तमिलनाडु 11.5 फीसदी, तेलंगाना 6.4 फीसदी, हरियाणा की हिस्सेदारी 4.9 फीसदी है। एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस और राज्य के स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग में काफी को-रिलेशन डेटा में देखने को मिला है। विदेशों में एक ही जगह पर एक्सपोर्ट क्लस्टर हैं लेकिन ऐसा इंडिया में नहीं है। इंडिया एक्सपोर्ट क्लस्टर के मामले में अमेरिका, जर्मनी, ब्राजील और मेक्सिको की तुलना में इंडिया में काफी कम है।

 

50 फीसदी बढ़े इनडायरेक्ट टैक्सपेयर्स

 

इकोनॉमिक सर्वे 2017-18 के अनुसार1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद से देश में नए इनडायरेक्ट टैक्सपेयर्स की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बड़े कारोबारियों से गुड्स खरीदने वाले छोटे एंटरप्राइज ने वॉल्यंटरी रजिस्ट्रेशन कराया है, ताकि वह इन्पुट टैक्स क्रेडिट का फायदा उठा सके। सर्वे में भी यह भी कहा गया है कि जिन राज्यों को नए टैक्स सिस्टम से टैक्स कलेक्शन घटेगा उसका भी इलाज निकाला गया है। जीएसटी बेस का डिस्ट्रीब्यूशन राज्यों में उनकी इकोनॉमी के साइज के आधार पर होगा।

 

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नौकरी के मौके बढ़ाने में मिलेगी मदद

 

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि जीएसटी से इकोनॉमी और राज्यों के टैक्स कलेक्शन को लेकर सही जानकारी मिली है। इससे आगे रोजगार के अवसर बढ़ाने और कर्मचारियों को मिलने वाले बेनेफिट्स की जानकारी मिलेगी।

 

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आगे पढ़ें - जीएसटी आंकड़ों ने दी इकोनॉमी की सही जानकारी

 

जीएसटी ने दी इंटरनल ट्रेड की सही जानकारी

 

बीते साल सर्वे में बताया गया था कि इंडिया का इंटरस्टेट ट्रेड जीडीपी का 30 से 50 फीसदी था लेकिन जीएसटी का डाटा बताता है कि इंडिया का गुड्स और सर्विस का इंटरनल ट्रेड ज्यादा है। जीएसटी के नए डेटा के आधार पर यह जीडीपी का 60 फीसदी है।

 

बड़े एक्सपोर्टर्स की हिस्सेदारी एक्सपोर्ट में है कम

 

बड़े एक्सपोर्ट हाउस की एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी दूसरे देशों के बड़े एक्सपोर्ट हाउस के शेयर की तुलना में काफी कम है। बड़े एक्सपोर्ट हाउस का कुल एक्सपोर्ट में ब्राजील में 72 फीसदी, जर्मनी में 68 फीसदी, मेक्सिको में 67 फीसदी और अमेरिका में 55 फीसदी हिस्सा है। वहीं, इंडिया में इनकी हिस्सेदारी 38 फीसदी है।

 

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