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ई-वे बिल ट्रॉयल रन: अब तक 50 हजार रजिस्ट्रेशन, कारोबारी अब भी अप्रैल से कराना चाहते है लागू

ई-वे बिल का ट्रायल शुरू पांच दिन हो चुके हैं। अभी तक 50 हजार ने ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन कराया है।

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नई दिल्ली। ई-वे बिल का ट्रायल शुरू पांच दिन हो चुके हैं। अभी तक 50 हजार ने ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन कराया है। कारोबारी इसे ई-वे बिल की धीमी शुरुआत मान रहे हैं क्योंकि जीएएसटी पोर्टल पर 80 लाख से अधिक कारोबारी रजिस्टर्ड है। कारोबारियों को उम्मीद है कि जीएसटी की धीमी शुरुआत देख सरकार इसे टालने का फैसला ले सकती है। इस मुद्दे पर कारोबारी महाराष्ट्र के फाइनेंस मिनिस्टर से आज मिलने वाले हैं।

 


ई-वे बिल की धीमी शुरूआत 

 

 

मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने moneybhaskar.com से कहा कि ई-वे बिल के ट्रायल की धीमी शुरुआत हुई है। अभी ज्यादा कारोबारियों को ये भी नहीं पता कि ई-वे बिल बनाने की वेबसाइट जीएसटी पोर्टल से अलग है इसलिए अभी तक काफी कम रजिस्ट्रेशन हुए है। शाह ने कहा कि इस सुस्त शुरुआत के कारण सरकार ई-वे बिल का ट्रायल पीरियड बढ़ा सकती है। अपनी इसी डिमांड को लेकर एसोसिएशन महाराष्ट्र के फाइनेंस मिनिस्टर से आज मिलने वाले हैं। 


इतने लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन

 

सूत्रों के मुताबिक अभी तक ई-वे बिल की वेबसाइट पर करीब 50 हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। ई-वे बिल की वेबसाइट पर बुधवार के दिन करीब 1,67,725 बिन जनरेट किए गए। देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ई-वे बिल का ट्रायल रन शुरू हो गया है। ई-वे बिल की वेबसाइट एक दिन में 40 लाख ई-वे बिल जनरेट कर सकती है। इस ट्रायल का मकसद है कि ई-वे बिल लागू होने से पहले कारोबारी इसके सिस्टम से अवगत हो जाएं। 

 

1 अप्रैल से लागू किया जाए ई-वे बिल 

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि अभी कारोबारियों या ट्रांसपोर्टर्स को इसके काम करने के तरीके के बारे में नहीं पता। ऑफलाइन और ऑनलाइन या मोबाइल ऐप पर किस तरीके से ई-वे बिल जनरेट किया जाएगा। सरकार ई-वे बिल लागू करने से पहले अवेयरनेस प्रोग्राम चलाना चाहिए जिससे कारोबारियों को इसे बनाने को लेकर तमाम जानकारी मिल जाए। 

 

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आगे पढ़ें - कैसे बनेगा ई-वे बिल 

 

 

 

कोई भी जनरेट कर सकता है ई-वे बिल

 

ई-वे बिल सप्लायर, रेसिपिएंट या ट्रांसपोर्टर कोई भी जनरेट कर सकता है। जो भी ई-वे बिल जनरेट करेगा उसको गाडी का नम्बर डालना होगा और गाडी खराब होने, चेंज होने आदि मामलोँ में इस नम्बर को अपडेट भी किया जा सकता है। किसी भी कंसाइनमेंट से सम्बंधित बिल जनरेट करने के लिए उसे ले जाने वाली गाडी का नम्बर देना जरूरी है। ई-वे बिल जनरेट करने के 24 घंटे के भीतर इसे जरूरत पडने पर कैंसल भी किया जा सकता है। 


जनरेट होगा क्यू-आर कोड 

 

व्हीकल और सामान की वैरिफिकेश के लिए ई-वे बिल में क्यू-आर नम्बर भी होगा। इस क्युआर कोड को एक मोबाइल ऐप के माध्यम से अधिकारी पढ सकेंगे और सर्वर से ई-वे बिल का डाटा भी निकाल सकेंगे। अगर ई-वे बिल की जांच के लिए कोई अधिकारी गाडी को 30 मिनट से अधिक समय के लिए रोककर रखता है तो गाडी का मालिक ई-वे बिल पोर्टल पर एक साधारण फॉर्म के जरिए उसके शिकायत दर्ज करा सकता है। ये रिपोर्ट्स तुरंत ई-वे बिल सिस्टम के जरिए राज्य या केंद्र के सम्बंधित अधिकारी तक पहुंच जायेंगी। 


ऐसे कराना होगा रजिस्ट्रेशन 

 

जिन कारोबारियों ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा लिया है उनके लिए यह बेहद आसान है। जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं है वे लोग भी अपना पैन नम्बर, आधार नम्बर और कुछ अन्य जानकारियों के साथ रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इस नम्बर के जनरेशन के लिए किसी भी अधिकारी के अप्रूवल की जरूरत नहीं है। 

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