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ई-वे बिल से बचने के लिए एडवांस में ट्रेडर भेज रहे हैं गुड्स, सिस्टम अटकने का डर

1 अप्रैल से देश भर में ई-वे बिल लागू होना है यही कारण है कि इंटर स्टेट ट्रेड रूट कार्गो की मूवमेंट बढ़ गई है।

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नई दिल्ली. 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे ई-वे बिल के लिए ट्रेडर्स बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। कारोबार प्रभावित होने के डर से वे एडवांस में सामान भेजने और मंगाने में लगे हुए हैं। यही वजह है कि इन दिनों इंटर स्टेट ट्रेड रूट्स पर कार्गो की मूवमेंट भी बढ़ गई है। ई-वे को लागू होने में एक दिन बचा है, लेकिन ट्रेडर्स तो दूर सरकार भी इसके लिए तैयार नजर नहीं आ रही है। जीएसटी में 90 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन होने बाद भी ई-वे बिल पोर्टल पर 11 लाख रजिस्ट्रेशन ही हुए हैं। एक ही दिन में बाकी रजिस्ट्रेशन होना काफी मुश्किल काम है।

 

एडवांस में गुड्स भेज रहे हैं कारोबारी

 

ई-वे बिल लागू होने से कॉम्पलाएंस बढ़ने के डर से कारोबारियों, ट्रेडर्स और डीलरों नें एडवांस में 3 से 6 हफ्तों का गुड्स मंगा और भेज दिया है। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च और ट्रेनिंग (आईएफिटीआरटी) के सीनियर अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि दो से तीन हफ्ते पहले से ही इंटर स्टेट ट्रेड रूट पर ट्रक और कार्गो की मूवमेंट बढ़ गई है। कारोबारियों ने एडवांस में एक महीने तक का स्टॉक अपने गोदामों में मंगा लिया है। ताकि, ई-वे लागू होने पर उन्हें गुड्स या प्रोडक्ट को लेकर परेशानी न हो।

 

 

कारोबारी नहीं है तैयार

 

कारोबारियों का ई-वे बिल को लेकर काफी कैजुअल अप्रोच है। ये ई-वे बिल की वेबसाइट पर हुए अभी तक के रजिस्ट्रेशन को देखकर साफ पता चलता है। जीएसटी पोर्टल पर करीब 90 लाख से अधिक कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ लेकिन ई-वे बिल की वेबसाइट पर अभी तक 11 लाख कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यानी बाकी बचे ट्रेडर्स के रजिस्ट्रेशन एक दिन में करने पर ई-वे बिल की वेबसाइट पर काफी लोड पड़ेगा। अढिया भी कह चुके हैं कि उन्हें नहीं पता कि ट्रेडर्स, डीलर्स और ट्रांसपोटर्स इसके लिए तैयार हैं और वह रजिस्ट्रेशन करा लें क्योंकि बाद में वह शिकायत नहीं कर सकते कि उन्हें बताया नहीं गया।

 

कारोबारियों को लगता है टल सकता है ई-वे बिल

 

ट्रेडर्स एसोसिएशन और कारोबारियों को अभी भी यही लगता है कि सिस्टम फेल होने पर 1 अप्रैल को ई-वे बिल सरकार एक बार फिर टाल सकती है।

 

सरकार कितनी है तैयार

 

सरकार ई-वे बिल को लेकर कितनी तैयार है इसे लेकर ट्रेडर्स, डीलर्स और ट्रांसपोटर्स को शंका है। ई-वे बिल देश भर में 1 फरवरी 2018 से लागू हुआ था लेकिन वेबासइट मिनटों में लाखों की संख्या में ई-वे बिल बनाने की क्षमता को नहीं झेल पाई जिसके कारण वेबासइट क्रैश हो गई। फिर सरकार को मजबूरी में ई-वे बिल टालना पड़ा। जीएसटीएन सीईओ प्रकाश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि उनके पास पहले ऐसा डेटा नहीं था कि एक दिन में कितने ई-वे बिल बनेंगे। पहले ट्रायल पर 7 लाख ई-वे बने थे लेकिन अब सिस्टम को 75 लाख ई-वे बनाने की क्षमता का बनाया गया है।

 

 

आगे पढ़ें - क्या है ई-वे बिल

 

 

 

क्या है ई-वे बिल?

 

- ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा।

 


- इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा।

 

- यह वैलिडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी के लिए 20 दिन का ई-वे बिल बनेगा।

 

 

यहां कराना होगा रजिस्ट्रेशन

 

 

कारोबारियों को ई-वे बिल बनाने के लिए https://164.100.80.111/ewbnat2 पर क्लिक करना होगा। वहां अपना जीएसटी का यूजर आईडी पासवर्ड भरें। उसके बाद अपना ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं। अगर आपने ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, तो पहले आपको रजिस्टर करना होगा। इसके लिए ई-वे बिल रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करना होगा और अपना जीएसटीआईएन नंबर भरना होगा। इससे अपना पासवर्ड जनरेट हो जाएगा।

 

 

 

 

 

 

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