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GST: 28% से घटकर 25% होगा अधिकतम टैक्स स्लैब, पेट्रो प्रोडक्ट्स आएंगे दायरे में

जीएसटी काउंसिल 28 फीसदी टैक्स को 25 फीसदी और 18 और 12 फीसदी टैक्स स्लैब को मर्ज कर सकती है।

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नई दिल्ली। इलेक्ट्रिसिटी, पेट्रोलियम प्रोडक्ट और अन्य आइटम्स को जीएसटी के तहत लाया जाएगा। बिहार के फाइनेंस मिनिस्टर सुशील मोदी ने कहा कि जीएसटी काउंसिल पेट्रोलियम प्रोडक्ट सबसे ज्यादा टैक्स रेट में रखे जाएंगे। जीएसटी काउंसिल 28 फीसदी टैक्स को 25 फीसदी और 18 और 12 फीसदी टैक्स स्लैब को मर्ज कर सकती है।

 

टैक्स रेट होंगे कम

 

मोदी ने कहा कि अभी 28 फीसदी टैक्स स्लैब को 25 फीसदी किया जा सकता है। इसके अलावा 12 और 18 फीसदी टैक्स स्लैब को मर्ज किया जा सकता है। सुशील मोदी ने कहा कि एक बार जब टैक्स कलेक्शन सामान्य हो जाएगा तब टैक्स स्लैब में भी कमी की जा सकती है। अभी 0 फीसदी, 5 फीसदी, 12, 18 और 28 फीसदी का टैक्स स्लैब है। कुछ प्रोडक्ट पर जीएसटी सेस भी लगता है। उन्होंने कहा कि इस पर फाइनल फैसला जीएसटी काउंसिल को करना है।

 

 

ये प्रोडक्ट आ सकते हैं जीएसटी के तहत

 

इंडस्ट्री चेंबर फिक्की के सालाना मीट में सुशील मोदी ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी, रियल एस्टेट, स्टैंप ड्युटी और पेट्रोलियम प्रोडक्ट को जीएसटी की हिस्सा बनेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि टाइमलाइन तय कर पाना मुश्किल है के कि ये कब तक होगा। मोदी ने कहा कि जीएसटी में ये बिना कॉन्स्टिट्यूशन में बदलाव किए शामिल किए जा सकते हैं। सुशील मोदी राज्यों के फाइनेंस मिनिस्टर के ग्रुप को हेड करते हैं।

 

 

पेट्रोलियम प्रोडक्ट पर लगेगा सबसे ज्यादा टैक्स

 

अगर पेट्रोलियम प्रोडक्ट जीएसटी के तहत आते हैं तो इन पर सबसे ज्यादा टैक्स लगेगा। राज्य सरकारों को इस पर सेस लगाने का अधिकार होगा, ताकि राज्य का रेवेन्यू सुरक्षित रह सके। अभी राज्य और केंद्र सरकार दोनों का 40 फीसदी रेवेन्यू पेट्रोलियम प्रोडक्ट से आता है।

 

 

इफोसिस का किया बचाव

 

उन्होंने कहा कि जीएसटीएन नेटवर्क जीएसटी की बैकबोन हैं। उन्होंने इंफोसिस का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने बेस्ट कंपनी को जीएसटी नेटवर्क के लिए हायर किया है। जीएसटी पोर्टल के काम नहीं करने के कारण इंफोसिस की कई बार आलोचना हो चुकी है।

 

 

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