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GST को लाने में था अटल बिहारी वाजपेयी का अहम रोल, उन्हीं के दौर में हुई थी शुरुआत

19 साल पहले 1999 में वाजपेयी सरकार के दौर में शुरू हुई थी GST पर चर्चा

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नई दिल्ली. देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। पत्रकार, लेखक और बोलने में प्रखर अटल बिहारी वाजपेयी का देश के इनडायरेक्‍ट टैक्‍स सिस्टम को बदलने में अहम रोल रहा है। इनडायरेक्ट टैक्स गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ, लेकिन इसकी नींव 19 साल पहले तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में रख दी थी। हालांकि, इसे लागू करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम का बहुत बड़ा हाथ रहा है लेकिन जीएसटी पर पहली रिसर्च अटल बिहारी वाजपेयी के समय में हुआ था। जीएसटी को लाने का सपना उन्हीं के समय में देखा गया था। आइए जानते हैं जीएसटी को लाने के पीछे अटल बिहारी वाजपेयी का क्या अहम रोल रहा है।

 

उनके समय में जीएसटी को लेकर की गई पहली रिसर्च

1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे, उसी दौरान इस पर चर्चा शुरू हो गई थी। उसके बाद साल 2003 में फाइनेंस मिनिस्टर जसवंत सिंह की पहल पर केंद्र सरकार को सर्विस टैक्स लगाने का अधिकार देने के लिए संविधान में संशोधन किया गया था। फाइनेंस मिनिस्टर जसवंत सिंह ने अपने सलाहकार और पूर्व वित्त सचिव विजय केलकर को फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी और बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) एक्ट को लागू करने का जिम्मा सौंपा। इस टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में विदेश में अपनाए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) पर पेश की। इस रिपोर्ट में राज्यों के लिए 7 फीसदी और केंद्र के लिए 5 फीसदी टैक्स की दरें तय की गई थी। पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी के ही समय में जीएसटी का कॉन्सेप्ट सामने आया था। 

 

 

आगे पढ़ें - क्या रहा अटल बिहारी वाजपेयी का रोल..

 

 

साल 2014 में हुआ तेजी से हुआ काम

2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और उसी साल दिसंबर में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संविधान संशोधन बिल पेश किया। 2015 में लोकसभा ने जीएसटी बिल को पास कर दिया। इसके बाद बिल को राज्यसभा की समिति के पास भेज दिया गया। 2016 में राज्यसभा ने इस बिल को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र सरकार के साथ टैक्स की दरें तय करने और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सर्वसम्मति बनाने के लिए बनी जीएसटी काउंसिल ने अपना काम करना शुरू कर दिया। सभी मुद्दों पर आम सहमति बनाने में समय लगा और देश में 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू हुआ।

जीएसटी की नींव रखने में वाजपेयी का था अहम रोल

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में फाइनेंस मिनिस्टर यशवंत सिन्हा ने टैक्स सुधारों के अधूरे कार्यों को पूरा करने का बीड़ा उठाया था। वाजपेयी और सिन्हा की पहल पर केंद्र और राज्यों की सरकारें सेल्स टैक्स विवाद को खत्म करने पर सहमत हो पाईं। जनवरी, 2000 से विभिन्न कमोडिटीज पर देश भर में समान टैक्स की दरें लागू करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही देश में वैट लागू करने की प्रक्रिया शुरू हुई। वैट देश में 1 अप्रैल 2005 को लागू हुआ था। वैट के बाद विदेश में कारगर हुए जीएसटी टैक्स सिस्टम पर सरकार ने रिसर्च कराई।

 

 

संसद में पास कराने में विफल रही थी सरकार

2013-14 में यूपीए सरकार विधेयक को संसद से पास कराने में विफल रही। जीएसटी बिल लैप्स कर गया। हालांकि, तत्कालीन यूपीए सरकार ने हार नहीं मानी। नए टैक्स सिस्टम की रीढ़ माने जाने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्सेशन नेटवर्क (जीएसटीएन) को प्रमोट करने के लिए इंफोसिस के पूर्व सीइओ नंदन निलेकणी की अगुवाई में एक कमेटी बनायी गई। कमेटी ने सभी हिस्सेदारों को जीएसटी के फायदे बताए और इसे लागू करने की अपील की।

 

आगे पढ़ें - नरेंद्र मोदी की टीम ने क्या किया आगे..

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