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60% सेज एक्सपोर्टर्स के GST रिफंड अटके, 3500 से ज्यादा यूनिट्स पर असर

नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के नौ महीने बाद भी सेज और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स की अभी भी परेशानी बनी हुई। कारोबारी रिफंड की प्रॉब्लम, जीएसटी को लेकर ग्राउंड लेवल पर कन्फ्यूजन सहित जीएसटी कानून में खामियों के कारण दिक्‍कतों से जूझ रहे हैं। सरकार भी अब कारोबारियों की समस्या को दूर करने की तैयारी में हैं। इस संबंध में बुधवार को सेज और ईओयू कारोबारियों के बीच फाइनेंस मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई है।

 

सेज यूनिट्स और जीएसटी वरिष्ठ अधिकारियों की हुई मीटिंग

 

सेज यूनिट्स की बढ़ती समस्याओं को के कारण एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर ईओयू (एक्सपोर्ट ऑरिएंटेड यूनिट) और सेज (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) के अधिकारियों और जीएसटी के वरिष्ठ अधिकारियों की मीटिंग हुई। उन्होंने मीटिंग में जीएसटी से जुड़ी समस्याओं को रखा जिमसें अधिकारियों ने मदद का आश्वासन दिया है।

 

GST रिफंड मिलने में अड़चन

 

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर ईओयू और सेज के चेयरमैन विनय शर्मा ने moneybhaskar.com को बताया कि 60 फीसदी से ज्यादा जीएसटी रिफंड अभी अटके हुए हैं। इसकी वजह से उनको वर्किंग कैपिटल की समस्या सबसे ज्यादा हो रही है। सरकार मार्च 2018 तक करीब 17,616 करोड़ रुपए का रिफंड एक्सपोर्टर्स को कर चुकी है। एक्सपोर्टर्स को आईजीएसटी रिफंड से ज्यादा समस्या स्टेट जीएसटी रिफंड से हैं क्योंकि वहां के अटके रिफंड नहीं मिल रहे हैं।

 

जीएसटी रिफंड क्लेम में सेज को नहीं किया शामिल

 

सेज यूनिट को सप्लाई करना जीरो रेटेड में आता है। यानी, सेज यूनिट को सप्लाई करने वाला सप्लायर लीगल अंडरटेकिंग (एलयूटी) के जरिए सप्लाई कर सकता है लेकिन उसके लिए उसे आईजीएसटी पे करने की जरूरत नहीं हैं। अगर वह एलयूटी के जरिए सप्लाई नहीं करते और आईजीएसटी पे करते हैं, तो उसे उसका रिफंड मिल सकता है। ज्यादातर सप्लायर एलयूटी या रिफंड प्रोसेस की जगह सेज यूनिट से इन्वॉइस से जीएसटी चार्ज करते हैं। जो सेज के लिए कॉस्ट बन जाती है लेकिन जीएसटी कानून में सेज के सप्लायर को दिए जीएसटी के रिफंड क्लेम का कोई ऑप्शन ही नहीं है। जीएसटी अधिकारियों ने इसे शामिल करने का आश्वासन कारोबारियों को दिया है।

 

एनएसडीएल, जीएसटी पोर्टल लिंक नहीं होने से कारोबारी परेशानी

 

अभी सभी सेज यूनिट को अपने डेटा एनएसडीएल पोर्टल पर सबमिट करना होता है और उसके बाद यही जानकारी जीएसटी पोर्टल अलग से दोबारा सबमिट करनी पड़ती है। सेज एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार सरकार एनएसडीएल और जीएसटी पोर्टल को आपस में लिंक करे ताकि कारोबारियों का समय और कॉम्पलाएंस का खर्च कम हो क्योंकि उनका दो बार रिटर्न फाइल करने के करने के कारण अकाउंटिंग खर्च बढ़ गया है।

 

थर्ड पार्टी एक्सपोर्ट को नहीं मिल रहा है सेज का फायदा

 

सेज एक्सपोर्टर्स को थर्ड पार्टी एक्सपोर्ट करने पर सेज बेनेफिट मिले। सेज यूनिट का कहना है कि अगर कोई एक्सपोर्टर सेज यूनिट को ऑर्डर पूरा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग ऑर्डर देता है और सेज यूनिट उस स्टॉक को सीधे पोर्ट पर पहुंचाता है तो उसे अभी इस पर आईजीएसटी पे करना पड़ता है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि सेज यूनिट एक्सपोर्ट कर रही है। सरकार सेज यूनिट को थर्ड पार्टी एक्सपोर्ट करने की इजाजत बिना आईजीएसटी पे किए करने के लिए दे। इस पर अधिकारियों ने बदलाव करने का आश्वासन दिया है।

 

 

आगे पढ़ें - सेज एक्सपोर्टर्स की क्या हैं मांगें..

 

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