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SMS से GST रिटर्न फाइल कर सकेंगे निल टैक्‍सपेयर्स, जल्‍द आ रहा नया सिस्‍टम

GST काउंसिल ने दे दी है मंजूरी, जनवरी 2019 से लागू करने की है प्‍लानिंग

GST return filing via SMS new system for nil fillers or nil taxpayers

नई दिल्‍ली. कारोबारियों को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी) रिटर्न भरने में आसानी रहे, इसके लिए जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी रिटर्न फाइलिंग के लिए एक नए और सरल फॉर्मेट को मंजूरी दी है। यह नया फॉर्मेट है मैसेज यानी एसएमएस के जरिए रिटर्न फाइल करने का। इस नए फॉर्मेट के तहत वे कारोबारी एसएमएस से रिटर्न फाइल कर सकेंगे, जिन्‍होंने पूरी तिमाही के दौरान किसी भी तरह की खरीद या सप्‍लाई नहीं की है और इसके चलते उन पर कोई टैक्‍स नहीं बनता है। ऐसे कारो‍बारियों को निल फिलर्स कहा जाता है। 

 

यह जानकारी जीएसटी कमिश्‍नर उपेन्‍द्र गुप्‍ता ने दी है। कहा जा रहा है कि इस नए सिस्‍टम के आने से रिटर्न फाइलिंग के टाइम में कटौती होगी। उपेन्‍द्र गुप्‍ता के मुताबिक, जीएसटी रिटर्न फाइलिंग के लिए नए फॉर्म्‍स के ड्रॉफ्ट स्‍टेकहोल्‍डर्स के सुझाव के लिए सोमवार तक पब्लिक डोमेन पर उपलब्‍ध करा दिए जाएंगे। नए रिटर्न फॉर्म टैक्‍सपेयर्स को अगले साल सितंबर तक संशोधन कर सकने का विकल्‍प देंगे। गुप्‍ता बृहस्‍पतिवार को कन्‍फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्‍ट्री की एक मीटिंग में बोल रहे थे। 

 

GSTR-1 और GSTR-3B को रिप्‍लेस करेगा नया फॉर्म

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की अध्‍यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल ने पिछले हफ्ते नए रिटर्न फाइलिंग फॉर्म को मंजूरी दी थी। ये फॉर्म मौजूदा GSTR-1 और GSTR-3B को रिप्‍लेस करेगा। 

 

नया रिटर्न फाइलिंग सिस्‍टम जनवरी 2019 से अमल में लाने की योजना

रेवेन्‍यु डिपार्टमेंट की योजना नए रिटर्न फाइलिंग सिस्‍टम को जनवरी 2019 से अमल में लाने की है। गुप्‍ता ने आगे कहा कि जीएसटी कानून में काउंसिल से मंजूर संशोधनों को मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा। उसके बाद राज्‍य विधानसभाएं इसे पास करेंगी और फिर ये प्रभाव में आएंगे।  

 

कंपोजीशन स्‍कीम के लिए थ्रेसहोल्‍ड लिमिट 1.5 करोड़ रु. करने का भी प्रस्‍ताव

संशोधन के मुताबिक कंपोजीशन स्‍कीम का फायदा लेने के लिए थ्रेसहोल्‍ड लिमिट को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपए किए जाने का प्रस्‍ताव है। हालांकि इस पर आखिरी फैसला होना अभी बाकी है। अन्‍य संशोधनों में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्‍म का मोडिफिकेशन, अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल्‍स वाली कंपनियों के लिए अलग रजिस्‍ट्रेशन, रजिस्‍ट्रेशन का कैंसिलेशन, नए रिटर्न फाइलिंग कानून और कई इनवॉइसेज को कवर करने वाले कंसोलिडेटेड डेबिट या क्रेडिट नोट जारी किया जाना आदि शामिल है। 

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