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GST पड़ताल: इनपुट क्रेडिट मिलना शुरू, कारोबारी बोले- टैक्‍स और रिफंड प्रॉसेस में न हों अधिकारी

GST इनपुट क्रेडिट के भुगतान के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'रिफंड फोर्टनाइट' अभियान का असर दिखने लगा है।

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नई दिल्‍ली. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (GST) के लागू होने के बाद पहला वित्‍त वर्ष 31 मार्च 2018 को पूरा हो रहा है। GST पिछले साल जुलाई में लागू हुआ। GST के प्रभाव में आने के बाद शुरुआत के कई महीने कारोबारियों को कम्‍प्‍लायंस, रिटर्न, रिफंड समेत कई तरह की दिक्‍कतों से जूझना पड़ा। लेकिन अब जब 9 महीने पूरे हो गए हैं, कारोबारियों के लिए कई चीजें आसान हुई हैं। कारोबारियों का कहना है कि GST इनपुट क्रेडिट के भुगतान के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'रिफंड फोर्टनाइट' अभियान का असर दिखने लगा है। कारोबारियों तक जुलाई से जनवरी तक का अटका रिफंड पहुंचना शुरू हो गया है। वहीं, उनका यह भी कहना है कि GST में अधिकारी जांच के लिए हों लेकिन टैक्‍स देने और रिफंड लेने की प्रॉसेस में नहीं। moneybhaskar.com ने देश के प्रमुख औद्योगिक कलस्‍टर की पड़ताल की, जिसमें कारोबारियों ने रिफंड की प्रोसेस शुरू होने की बात स्‍वीकारी। 

 

'रिफंड फोर्टनाइट' का सकारात्‍मक असर 

जुलाई से जनवरी तक का अटका रिफंड मिलना शुरू होने से कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। कुछ जगहों पर तो इन्‍स्‍टॉलमेंट में क्रेडिट पहुंचा है, वहीं कुछ जगहों के लिए इनपुट क्रेडिट पाने वालों की लिस्‍ट तैयार हो चुकी है। सरकार का दावा है कि 15 मार्च से 29 मार्च 2018 तक चलने वाले इस अभियान के तहत पिछला पूरा रिफंड दे दिया जाएगा। बता दें, GST में जुलाई-जनवरी तक का कारोबारियों और एक्‍सपोर्टर्स का अटका रिफंड बड़ी समस्या बनता जा रहा था। उनके लिए बिजनेस करना मुश्किल हो गया था। बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने सभी अटके रिफंड क्लियर करने की दिशा में कदम उठाते हुए 'रिफंड फोर्टनाइट' शुरू किया है। 
 

रिफंड इन्‍स्टॉलमेंट में मिलना शुरू 

स्‍टाइल इंडिया, वाराणसी के ओनर जेपी मुंद्रा ने बताया कि एक्‍सपोर्टर्स को GST रिफंड इन्‍स्टॉलमेंट में मिलना शुरू हो गया है। इससे एक्‍सपोर्टर्स को और खासकर छोटे एक्‍सपोर्टर्स को वर्किंग कैपिटल के मोर्चे पर काफी राहत मिली है। अकबर ब्रास प्रॉडक्‍ट्स, मुरादाबाद के शाहनवाज ने भी इनपुट टैक्‍स क्रेडिट की प्रोसेस शुरू होने की बात स्‍वीकारी। उन्‍होंने बताया कि हालांकि अभी तक हमें रिफंड नहीं मिला है लेकिन रिफंड पाने वालों की लिस्‍ट तैयार होने की बात सामने आई है। लिहाजा उम्‍मीद है कि जल्‍द ही यहां भी रिफंड आना शुरू हो जाएगा। 
 

कुछ हद तक सुधरे हैं हालात 

GST का एक वित्‍त वर्ष पूरा होने के बाद क्‍या बदलाव आया, इस बारे में पूछने पर जेपी मुंद्रा ने कहा कि GST लागू करते वक्‍त देश में जो रिफॉर्म होने की बात की गई थी, वह बड़े पैमाने पर न सही लेकिन सच हुई है। यानी सिस्‍टम में कुछ सुधार हुआ है। जो लोग पहले बिना बिल काम करते थे, अब बिल बनाने लगे हैं। इससे टैक्‍स चोरी में गिरावट आई है और काम भी आसान हुआ है। आगे कहा कि भले ही नियमों और प्रोसिजर की कुछ दिक्‍कतें अभी भी हैं लेकिन उम्‍मीद है कि 6 महीने या सालभर में इसमें बेहतरी आएगी। सरकार अपनी तरफ से लोगों को सहूलियत देने के लिए पूरी कोशिश कर रही है।
 

आने वाले वक्‍त में आएगी और बेहतरी 

निटवियर एंड अपैरल मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना (KAMAL) के प्रे‍सिडेंट सुदर्शन जैन का कहना है कि इंपोर्ट के मोर्चे पर बात करें तो पहले इंपोर्टेड माल पर कस्‍टम ड्यूटी के साथ एडिशनल ड्यूटी भी लगती थी और इसका कोई इनपुट क्रेडिट नहीं होता था। लेकिन अब GST में इन पर इनपुट क्रेडिट है, जिसका फायदा कारोबारियों को ही हो रहा है। धीरे-धीरे ही सही लेकिन GST का लाभ मिल रहा है, काम साफ-सुथरे ढंग से होने लगा है, टैक्‍स चोरी में कमी आ रही है और आगे चलकर हालात और सुधरने की उम्‍मीद है। GST से आने वाले समय में देश को कुल मिलाकर फायदा ही पहुंचने वाला है। 
 
आगे पढ़ें- और क्‍या कहते हैं कारोबारी 

सारा काम ऑनलाइन होने का हो इंतजाम 

इनपुट क्रेडिट मिलना शुरू हो जाने से कारोबारी खुश तो हैं लेकिन इसके ऑफलाइन प्रोसिजर को लेकर थोड़े निराश भी हैं। दरअसल GST रिफंड के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद ट्रेडर्स को कुछ अन्‍य डॉक्‍युमेंट्स के साथ इस फॉर्म की हार्ड कॉपी सेल्‍स टैक्‍स डिपार्टमेंट के ऑफिस में जाकर सबमिट करनी है। इसे लेकर कारोबारियों का कहना है कि एक ओर तो सरकार डिजिटल बनने के लिए प्रेरित कर रही है तो दूसरी ओर अभी भी डॉक्‍युमेंट्स की हार्ड कॉपी ऑफिस में ही जाकर सबमिट करनी होती है। जब सारी प्रोसेस ऑनलाइन हो सकती है तो फिर सेल्‍स टैक्‍स डिपार्टमेंट के ऑफिस जाकर वहां डॉक्‍युमेंट्स की हार्डकॉपी सबमिट करने का क्‍या मतलब है। कारोबारियों को डर है कि इससे भ्रष्‍ट अधिकारियों के लिए पैसे वसूलने का रास्‍ता खुल जाएगा। सारे डॉक्‍युमेंट्स ऑनलाइन सबमिट हो जाएं और टैक्‍स व इनपुट क्रेडिट ट्रान्‍जेक्‍शन सरकार और ट्रेडर्स के बीच में सुचारू रूप से होता रहे, इसका इंतजाम होना चाहिए। अधिकारी जांच के लिए हों लेकिन टैक्‍स देने और रिफंड लेने की प्रोसेस में नहीं। 
 

अगले वित्‍त वर्ष में प्रोसिजर और सुधरने की उम्‍मीद 

कारोबारियों को उम्‍मीद है कि भले ही पिछला इनपुट क्रेडिट अब मिलना शुरू हुआ है लेकिन अगले वित्‍त वर्ष में इनपुट क्रेडिट टाइम से मिलने के लिए सिस्‍टम में सुधार होने की उम्‍मीद है। इसकी वजह है कि GST के नियमों और प्रोसिजर में पिछले एक साल में काफी सुधार आया है और आगे भी ये सुधार जारी रहेंगे, जिससे हर चीज टाइम पर और बेहतर तरीके से हो सकेगी और GST जिस उद्देश्‍य के साथ लागू किया गया, उसे पूरा किया जा सकेगा। 
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