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इन मांगों को मानकर 7 करोड़ व्यापारी का वोट ले सकती है राजनैतिक पार्टियां

देश भर के व्यापारी ने खुद को एक वोट बैंक के रूप में एकजुट किया

Congress manifesto

Congress manifesto: देश भर में 40 हज़ार से ज़्यादा व्यापारिक संगठन है जो कुल मिलकर देश के 7 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो लगभग 30 करोड़ से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देते हैं और इस दृष्टि से यह देश का सबसे बड़ा वोट बैंक है।

नई दिल्ली. कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) के पुदुच्चेरी में हो रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में आज में देश के 26 राज्यों के 200 से अधिक व्यापारी नेताओं ने आगामी चुनावों में देश के व्यापारी वर्ग की भूमिका पर विचार करते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जो दल व्यापारियों के राष्ट्रीय चार्टर को लागू करने का भरोसा देगा देश के 7 करोड़ व्यापारी एक होकर एक वोट बैंक के रूप में एकतरफ़ा मतदान करेंगे।

 

व्यापारी वर्ग देश का सबसे बड़ा वोट बैंक 

देश भर में 40 हज़ार से ज़्यादा व्यापारिक संगठन है जो कुल मिलकर देश के 7 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो लगभग 30 करोड़ से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देते हैं और इस दृष्टि से यह देश का सबसे बड़ा वोट बैंक है। कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र पर टिप्पणी करते हुए कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीण खंडेलवाल ने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा की इस घोषणा पत्र में देश के व्यापारिक समुदाय को कोई महत्व नहीं दिया गया और केवल दो लाइन ई वे बिल को समाप्त करना और जींएसटी को एक बिंदु कर बनाने में ही समाप्त कर दिया ।

 

कांग्रेस का घोषणापत्र है बेमानी 

दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कीघोषणा पत्र में किसी भी व्यापार को शुरू करने के पहले तीन साल तक कोई इजाज़त न लेने की बात कही है जो बिल्कुल बेमानी है और क़तई लागू नहीं हो सकती। उन्होंने कहा की व्यापारियों पर अनेक प्रकार के क़ानून लागू है जो संसद द्वारा पारित हैं और जिनकी पालना करनी आवश्यक है । इन क़ानूनों में जीएसटी ऐक्ट, फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड ऐक्ट, शाप एंड इस्टैब्लिश्मेंट ऐक्ट , ट्रेड लाइसेन्स ऐक्ट आदि अन्य प्रकार के क़ानून हैं जो महज़ चुनावी घोषणा से ख़त्म नहीं हो जाते बल्कि इन क़ानूनों के अंतर्गत व्यापारियों को लाइसेन्स अथवा इजाज़त लेना आवश्यक है जब तक ये क़ानून संसद में संशोधित नहीं हो जाते जो आसान नहीं है । लिहाज़ा घोषणा पत्र की यह घोषणा बिलकुल बेमानी है । 

 

इन मुद्दों पर नहीं हुई सार्थक चर्चा 

भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा की वर्तमान में व्यापारी अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं जिनकी तरफ़ घोषणा पत्र में कोई ध्यान ही नहीं दिया गया है जिसमें प्रमुख रूप से रीटेल में एफडीआइ, ई कामर्स पॉलिसी, रीटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय नीति , बाज़ारों में बेहतर ढाँचागत सुविधाएँ , देश के घरेलू व्यापार को  सुनियोजित तरीक़े से विकसित करना, छोटे व्यापारियों के निर्यात में वृद्धि आदि अनेक विषय हैं जिन पर घोषणा पत्र में पार्टी को अपनी सोच बतानी चाहिए थी। । व्यापारियों को इस घोषणा पत्र से बेहद निराशा हुई है और व्यापारी कांग्रेस की इस सोच की कड़ी निंदा करते हैं। 

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