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मजबूत रुपए ने नि‍र्यातकों की बढ़ाई परेशानी, मार्जिन घटा अब सरकार से उम्मीद

नई दिल्ली। मजबूत होते रुपए ने एक्सपोर्ट कारोबारियों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। कारोबारियों के अनुसार मजबूत रूपये के कारण उनके मार्जिन पर प्रेशर आ रहा है। जिसका सीधा इम्पैक्ट उनके सेल पर पड़ेगा। घटते मार्जिन को देखते हुए कारोबारी अब सरकार से दखल की मांग कर रहे हैं। जिससे एक्सपोर्ट पर निगेटिव इम्पैक्ट न आए। मजबूत रुपए का प्रमुख रुप से असर यूटेन्सिल्स, इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट, जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट और हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट पर हो रहा है।
 
इंजिनियरिंग गुड्स कारोबारियों के मार्जिन पर पड़ा असर
 
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) ने कॉमर्स मिनिस्ट्री को भेजे  लेटर में कहा है कि 2 जनवरी 2017 को डॉलर के मुकाबले रुपया 68 रुपए था, जो अप्रैल 10 को 64.40 रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। ईईपीसी के एग्जीक्युटिव डायरेक्टर और सेक्रेटरी बी सरकार ने moneybhaskar.com बताया कि पिछले तीन महीने में रुपया डॉलर के मुकाबले 5.26 फीसदी मजबूत हुआ है। इसका सीधा असर एक्सपोटर्स के मार्जिन पर पड़ा है। यूरो भी बीते छह महीने में 76 रुपए से 68 रुपए पर आ गया है। पाउंड के मुकाबले भी रुपया मजबूत हुआ है।
 
यूटेन्सिल्स एक्सपोर्ट के घटे मार्जिन
 
स्टेनलेस स्टील एक्सपोटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी देवकीनंदन बागला ने moneybhaskar.com ने बताया कि डॉलर के मजबूत होने का सीधा असर उनके मार्जिन पर पड़ा है। कारोबारियों का प्रॉफिट मार्जिन 7 से 8 फीसदी तक घटा है। वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया 60 फीसदी से अधिक इंडस्ट्री होटल इंडस्ट्री के लिए यूटेन्सिल्स बनाती है। मार्जिन और इनपुट कॉस्ट बढ़ने से इंटरनेशनल मार्केट में वह मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं।
 
प्राइस नहीं बढ़ा रहे बायर्स
 
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के चेयरमैन एच के एल मग्गू ने moneybhaskar.com को बताया कि इंटरनेशनल मार्केट में स्लोडाउन और रुपए की मजबूती का असर कारोबारियों पर निगेटिव पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपए के 5 फीसदी से अधिक मजबूत होने से इंडियन कारोबारी प्राइस बढ़ाने की डिमांड नहीं कर सकते क्योंकि एक्सपोर्ट ऑर्डर में बीते साल की तुलना में कोई ग्रोथ नहीं है।
 
पाउंड कमजोर होने से एक्सपोर्टर उठा रहे हैं नुकसान
 
फियो के ईडी अजय सहाय ने Moneybhaskar.com को बताया कि जेम्स एंड ज्वैलरी, अपैरेल, हैंडीक्राफ्ट जैसे एक्सपोर्ट सेक्टर पर पाउंड, डॉलर और यूरो की तुलना में रुपए के मजबूत होने से एक्सपोर्टर के मार्जिन पर 25 फीसदी तक का असर पड़ा है। पाउंड 103 के स्तर से 82 रुपए पर आ गया है। ये बहुत बड़ा अंतर है।
 
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