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H-1B वीजा /ट्रंप ने दी राहत, जीवनसाथी की जॉब पर कोई रोक नहीं

  • जीवन साथियों के जॉब करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव अगले साल तक टला
  • ट्रंप ने 2017 में जीवन साथियों के लिए वर्क वीजा प्रोग्राम को सस्पेंड किया था 

Moneybhaskar.com

Sep 18,2019 06:06:49 PM IST

नई दिल्ली. एच-1B वीजाधारकों के जीवनसाथियों को अमेरिकी सरकार ने बड़ी राहत दी है। H-1B वीजा पर अमेरिका आए प्रोफेशनल्स के जीवन साथियों के जॉब करने पर रोक लगाने का जो प्रस्ताव दिया था, उसे अमेरिकी प्रशासन ने अगले साल तक लागू नहीं करने का फैसला किया है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DoJ) ने सोमवार को अमेरिका की एक अदालत से कहा कि उसने H-4 एंप्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्युमेंट (EAD) को वापस लेने वाला रूल बनाने के लिए 2020 के स्प्रिंग यानी अगले साल मार्च से जून के बीच तक की समयसीमा तय की है। ट्रंप से पहले अमेरिका की कमान संभाल रहे बराक ओबामा की सरकार ने 2015 में एक रूल बनाया था जिसमें H-1B वीजा होल्डर्स के योग्य जीवन साथियों को वहां नौकरी करने की इजाजत दी गई थी। अगले साल राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिकी सरकार की तरफ से उठाया गया यह कदम हजारों भारतीय पेशेवरों और उन्हें हायर करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत देगा।

प्रस्तावित रूल फिलहाल इंटर-एजेंसी प्रोसेस से गुजर रहा है

DoJ ने वॉशिंगटन के डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट से कहा, 'H-4 EAD को वापस लेने वाले प्रस्तावित रूल को लागू करने की दिशा में काम करने का DHS(डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटीज) का मकसद बदला नहीं है। प्रस्तावित रूल फिलहाल इंटर-एजेंसी प्रोसेस से गुजर रहा है।' अदालत IT वर्कर्स के उस समूह की तरफ से DoJ के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई कर रही थी जिनका आरोप है कि पावर यूटिलिटी कंपनी सदर्न कैलिफोर्निया एडिशन ने उन्हें हटाकर उनकी जगह शॉर्ट टर्म H11B वीजा पर अमेरिका आए इंजीनियर्स को रख लिया है।

क्या है एच -1बी वीजा ?

एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है. यह किसी कर्मचारी को अमेरिका में छह साल काम करने के लिए जारी किया जाता है। अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी हो।इस वीजा के लिए कुछ शर्तें भी हैं। जैसे इसे पाने वाले व्यक्ति को स्नातक होने के साथ किसी एक क्षेत्र में विशेष योग्यता हासिल होनी चाहिए। साथ ही इसे पाने वाले कर्मचारी की सैलरी कम से कम 60 हजार डॉलर यानी करीब 40 लाख रुपए सालाना होना जरूरी है। इस वीजा की एक खासियत भी है कि यह अन्य देशों के लोगों के लिए अमेरिका में बसने का रास्ता भी आसान कर देता है, एच-1बी वीजा धारक पांच साल के बाद स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस वीजा की मांग इतनी ज्यादा है कि इसे हर साल लॉटरी के जरिये जारी किया जाता है। एच-1बी वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसी 50 से ज्यादा भारतीय आईटी कंपनियों के अलावा माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियां भी करती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर एच1बी वीजा रखने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।

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