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अंतरराष्ट्रीय व्यापार /ट्रंप पर भारत की जीएसपी सुविधा फिर से बहाल करने का बढ़ा दबाव

  • पक्ष और विपक्ष के 44 सांसदों ने भारत की जीएसपी सुविधा के लिए लिखा पत्र
  • अमेरिका ने जून में समाप्त कर दी थी भारत की व्यापारिक रियायत
  • अमेरिकी कंपनियों और कामगारों को हो रहा नुकसान

Moneybhaskar.com

Sep 18,2019 02:10:21 PM IST

नई दिल्ली. अमेरिका के 44 सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया है कि दोनों देशों के संभावित समझौते के अंतर्गत अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में भारत के लिए लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा फिर से बहाल कर दिया जाए। इन 44 सांसदों में पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के सांसद शामिल हैं। जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंसेज (जीएसपी) के तहत एक लाभार्थी विकासशील देश के रूप में भारत को दी गई मान्यता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पांच जून को समाप्त कर दी थी।

जीएसपी लाभार्थी देशों से हजारों उत्पादों का शुल्क मुक्त आयात करता है अमेरिका

अमेरिका जीएसपी के तहत लाभार्थी देशों से हजारों उत्पादों का शुल्क मुक्त आयात करता है। इससे लाभार्थी देशों से सूचीबद्ध वस्तुओं का निर्यात बढ़ जाता है, क्योंकि अमेरिकी कंपनियों को इन देशों से सूची में शामिल सामानों का आयात करना सस्ता पड़ता है। अमेरिकी सांसदों ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर को एक पत्र लिखकर कहा कि भारत की सुविधा बहाल करने में देरी न की जाए, क्योंकि अमेरिकी कंपनियां लंबे समय से भारतीय बाजार में पहुंच हासिल करने की मांग कर रही हैं और अन्य मुद्दों पर बहस के सदौरान अमेरिकी कंपनियों की मांग को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है।

ट्रंप और मोदी 22 सितंबर को हॉस्टन में मिलने वाले हैं

अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को हॉस्टन में मिलने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच कई व्यापारिक मुद्दों पर समझौता हो सकता है, जिसमें जीएसपी भी शामिल है। लाइटहाइजर को लिखे गए पत्र पर 26 डेमोक्रेट और 18 रिपब्लिकन सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

भारत की जीएसपी सुविधा छीनने से अमेरिका को ही हो रहा नुकसान

कोलीशन फॉर जीएसपी के कार्यकारी निदेशक डैन एंथोनी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी कंपनियां अमेरिका को होने वाले नुकसान के बारे में बता रही हैं। अमेरिका को पैसे का भी नुकसान हो रहा है और रोजगार भी घट रहा है। अमेरिका बताती है कि जीएसपी सुविधा से लाभार्थी देशों को फायदा होता है, लेकिन जीएसपी सुविधा छीनने से अब तक तो सिर्फ अमेरिकी कंपनियों और कामगारों को ही नुकसान हुआ है। भारत की जीएसपी सुविधा छीनने से अमेरिकी कंपनियों को भारत से सूचीबद्ध वस्तुओं का आयात करने के लिए ऊंचा शुल्क चुकाना पड़ता है। इसके बावजूद जीएसपी में शामिल वस्तुओं का भारत से आयात जून-जुलाई 2019 में 40 फीसदी से अधिक बढ़ गया है।

अमेरिकी कंपनियां हर रोज भर रहीं सात करोड़ रुपए का अतिरिक्त शुल्क

एंथोनी ने कहा कि भारतीय निर्यातक मालामाल हो रहे हैं, जबिक अमेरिकी कंपनियां हर रोज सात करोड़ रुपए का अतिरिक्त शुल्क भर रही हैं। कोलिशन फॉर जीएसपी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की जीएसपी सुविधा खत्म किए जाने के बाद अमेरिकी कंपनियों ने जुलाई में करीब 214 करोड़ रुपए के अतिरिक्त शुल्क का भुगतान अमेरिकी सरकार को किया। यही नहीं जीएसपी सुविधा खत्म किए जाने के बाद भारत द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्क से भी अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहा है। यह नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।

उद्योग ने ही की थी जीएसपी सुविधा हटाने की सिफारिश, अब उन्हें ही हो रहा नुकसान

कॉलिशन फॉर जीएसपी के मुताबिक जीएसपी की मार्केट एक्सेस शर्तों के तहत अमेरिकी कंपनियों ने कई याचिका दाखिल की थी। इन याचिकाओं को अप्रैल 2018 में अमेरिकी सरकार ने स्वीकार कर लिया था। इस पर कोई समझौता नहीं हो पाने के बाद पांच जून 2019 को भारत की जीएसपी सुविधा खत्म कर दी गई थी। अब अमेरिकी कंपनियां ही कह रही हैं कि उन्हें भारत की जीएसपी सुविधा खत्म किए जाने से नुकसान हो रहा है।

जीएसपी कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी था भारत

जीएसपी कार्यक्रम के तहत करीब 2,000 उत्पादों की एक सूची है। इनमें ऑटो कंपोनेंट और टेक्सटाइल्स भी शामिल हैं। लाभार्थी देशों से इन उत्पादों का बिना शुल्क अमेरिका में आयात किय जा सकता है। 2017 में भारत इस कार्यक्रम के तहत सबसे बड़ा लाभार्थी था। भारत ने 2017 में इस कार्यक्रम के तहत 5.7 अरब डॉलर का निर्यात अमेरिका को किया।

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