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H1B वीजा की चिंता छोड़ें, भारत में बेस बढ़ाएं आईटी कंपनियां: प्रसाद

नई दिल्‍ली. अमेरिकी नीतियां भारतीय आईटी कंपनियों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई हैं। डोनाल्‍ड ट्रम्‍प के राष्‍ट्रपति बनने के बाद H-1B वीजा की फास्‍ट प्रोसेसिंग 3 अप्रैल से रोकने की घोषणा की जा चुकी है। ऐसे में आईटी मिनिस्‍टर रविशंकर प्रसाद ने खुलकर आईटी कंपनियों से कहा है कि वह अपना बेस भारत में बढ़ाने की तरफ ध्‍यान दें। उन्होंने आईटी कंपनियों को यहां पर सभी तरह की सुविधाएं देने का भरोसा दिलाया।
 
आईटी कंपनियों के साथ खुलकर आए मंत्री
 
प्रसाद ने कहा कि मुझे लगता है कि हर समस्‍या का हल होता है। इसका हल घर से ही निकलेगा। अब समय आ गया है कि भारतीय आईटी कंपनियों को देश में विस्‍तार के बारे में सोचना शुरू करना चाहिए। इन्‍होंने कहा कि आईटी क्षेत्र में भारतीय कंपनियों का बड़ा योगदान है। रविशंकर प्रसाद यहां पर आयोजित डिजिटल इंडिया समिट एंड अवार्ड समारोह में बोल रहे थे।
 
बहुत बड़ा है भारतीय आईटी सेक्‍टर का आकार
 
भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार करीब 150 बिलियन डालर के आसपास है, लेकिन यह इंडस्‍ट्री अमेरिका की तरफ से H-1B वीसा मामले में दिक्‍कतों का सामना कर रही है। अमेरिका में H-1B मामले में लगातार आलोचना होती रहती है। वहां पर माना जाता है कि इस वीसा के तहत सस्‍ते लोगों को लाकर अमेरिका में काम कराया जाता है, जिससे अमे‍रिकी लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।
 
सच से दूर हैं आरोप
 
दूसरी तरफ भारतीय इंजीनियर और आईटी प्रोफेशनल अमेरिका में कई तरह से रिसर्च से लेकर इंजीनियरिंग तक के काम में मदद कर रहे हैं। अमेरिका में जब काम के लायक लोग नहीं मिल पाते हैं, तब वहां की कंपनियां भारत की तरफ रुख करती हैं। लेकिन अब यह व्‍यवस्‍था अमेरिका में आलोचना का शिकार हो रही है।
 

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