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उपलब्धि / इसरो भी बनेगा व्यापारी, सेटेलाइट कारोबार के लिए कंपनी बनाई, विदेश से कमाई का मकसद

टेक्नोलॉजी के कमर्शियल उपयोग से विदेश से कमाएगा इसरो, देसी कंपनियों को भी मिलेगी मदद

ISRO to become a businessman, a company for satellite business, the purpose of earning from abroad

नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपनी अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का वाणिज्यिक इस्तेमाल करेगा। इसके लिए इसरो ने न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के नाम से एक कंपनी बनाई है। इसरो के मानद सलाहकार के. कस्तूरीरंगन ने गुरुवार को संगठन के अध्यक्ष डॉ. के. शिवन की मौजूदगी में एनएसआईएल का उद्घाटन किया। 

 

आरंभिक पूंजी 100 करोड़ रुपए 

कंपनी का गठन इस साल छह मार्च को किया गया था। इसका उद्देश्य इसरो की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का वाणिज्यिक इस्तेमाल करना है। कंपनी की शुरुआती प्राधिकृत शेयर पूंजी 100 करोड़ रुपए है और आरंभिक चुकता पूंजी 10 करोड़ रुपए है। 

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यह काम करेगी कंपनी 

एनएसआईएल के जरिए भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उच्च-प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण तथा उत्पादन आधार बनाने के लिए घरेलू उद्योगों को तैयार करना है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिये छोटे प्रक्षेपणयान एसएसएलवी और ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपणयान (पीएसएलवी) का विनिर्माण इसका प्रमुख कार्य होगा। यह एसएसएलवी के लिए वैश्विक मांग आकलन कर उस बाजार में अपनी पैठ बनाएगी और इससे देश के लिए कमाई करेगी। 

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