Home » Economy » Foreign TradeIndia is importing onion to ease supply and prices in local market

आपकी थाली में आ रहा चीन का प्‍याज, मोदी सरकार का है फैसला

देश में प्‍याज को लेकर कई बार अजीब-सी स्थिति बन जाती है।

1 of

नई दिल्‍ली. देश में प्‍याज को लेकर कई बार अजीब-सी स्थिति बन जाती है। ताजा मामला ऐसा है कि देश में प्‍याज की बढ़ती कीमतें और कम सप्‍लाई से परेशान मोदी सरकार ने इसे इम्‍पोर्ट का फैसला किया है। यह इम्‍पोर्ट ऐसे समय में होने जा रहा है, जब आंकड़े यह बता रहे हैं कि भारत का इस साल प्‍याज एक्‍सपोर्ट अप्रैल-जुलाई के दौरान 56 फीसदी बढ़कर 12.29 लाख टन हो गया।

 

मोदी सरकार का फैसला यह है कि चीन और इजिप्‍ट जैसे देशों से प्‍याज इम्‍पोर्ट करने के लिए MMTC जैसी सरकारी एजेंसियों को कहा गया है। यानी, आपकी थाली में चीन का प्‍याज आ रहा है।

 

सरकार का मानना है कि घरेलू मार्केट में सप्‍लाई बढ़ाने और कीमतें काबू करने के लिए प्‍याज का इम्‍पोर्ट करना जरूरी हो गया है। बता दें, रिटेल में प्‍याज की कीमतें राजधानी दिल्‍ली में 70 रुपए प्रति किलो तक चली गई थीं।

 

आगे पढ़ें... क्‍यों करना पड़ रहा है इम्‍पोर्ट

लोकल सप्‍लाई बढ़ाने के लिए हो रहा इम्‍पोर्ट

कंज्‍यूमर अफेयर्स मिनिस्‍ट्री के अनुसार, लोकल सप्‍लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने प्राइवेट ट्रेडर्स के जरिए प्‍याज इम्‍पोर्ट की सुविधा दी थी, जिन्‍होंने अबतक विदेशी मार्केट से 11,400 टन प्‍याज खरीदा है। मिनिस्‍ट्री के एक सीनियर अफसर ने बताया कि नई खरीफ फसल इस साल 10 फीसदी कम रह सकती है क्‍योंकि बुवाई में 30 फीसदी कमी देखी गई है। फसल की कटाई पूरी होने के बाद प्‍याज उत्‍पादन का आकलन किया जाएगा।

 

1443 करोड़ का हुआ एक्‍सपोर्ट

वैल्‍यू के हिसाब से बात करें तो अप्रैल-जुलाई 2017 के दौरान प्‍याज का एक्‍सपोर्ट 47.69 फीसदी बढ़कर 1,443.09 करोड़ रुपए हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 977.84 करोड़ रुपए था। दूसरी ओर, पिछले सप्‍ताह सरकार ने MMTC जैसी सरकारी एजेंसियों को मिस्र और चीन जैसे देशों से प्‍याज इम्‍पोर्ट करने के लिए कहा है। सरकार ने प्राइवेट ट्रेडर्स को भी प्‍याज इम्‍पोर्ट की सुविधा दी थी, जिन्‍होंने अबतक 11,400 टन प्‍याज विदेशी मार्केट से खरीदा है।

 

क्‍या कहते हैं आंकड़े?

डायरेक्‍टोरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्‍टैट्सिटिक्‍स (DGCIS) के अनुसार, 2017-18 के अप्रैल-जुलाई के दौरान देश ने 12.29 लाख टन प्‍याज का एक्‍सपोर्ट किया। यानी, दूसरे देशों को बेचा। 2016-17 के इसी अवधि की बात करें तो उस समय देश से प्‍याज का एक्‍सपोर्ट 7.88 लाख टन था।

 

आगे पढ़ें... क्‍यों बढ़ा प्‍याज का एक्‍सपोर्ट?

 

 

क्‍यों बढ़ा एक्‍सपोर्ट?

नेशनल होर्टिकल्‍चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (NHRDF) के एक्टिंग डायरेक्‍टर पीके गुप्‍ता का कहना है कि अप्रैल-जुलाई के दौरान प्‍याज का एक्‍सपोर्ट दो कारणों से बढ़ा है। पहला, प्‍याज पर कोई भी मिनिमम एक्‍सपोर्ट प्राइस (MEP) नहीं था। दूसरा, ग्‍लोबल बाजार में कीमतें ऊंची बनी हुई थीं।

 

उनका कहना है कि एक्‍सपोर्ट से चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले र्क्‍वाटर में किसानों को अपने प्रोडक्‍ट का बेहतर दाम मिला, जब घरेलू बाजार में कीमतें गिरी थीं। हालांकि, पुराना स्‍टॉक खत्‍म होने के साथ ही घरेलू मार्केट में प्‍याज की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। DGIS के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल- जुलाई 2017 के दौरान एक्‍सपोर्टर्स को 11,737 रुपए प्रति टन का भाव मिला।

 

बता दें, एमईपी वह प्राइस होता है, जिससे कम पर एक्‍सपोर्ट नहीं किया जा सकता है। प्‍याज से एमईपी दिसंबर 2015 में ही हटा दी गई। अगस्‍त में डिमांड के बावजूद कंज्‍यूमर अफेयर्स मिनिस्‍टर रामविलास पासवान ने एमईपी नहीं लगाई। यह वहीं समय था जब घरेलू मार्केट में प्‍याज की कीमतों में तेजी शुरू हुई।

 

आगे पढ़ें... घरेलू बाजार में क्‍यों बढ़े दाम?

 

 

घरेलू बाजार में क्‍यों बढ़े दाम?

पीके गुप्‍ता का कहना है कि घरेलू मार्केट में कीमतें अचानक बढ़ने की अहम वजह पुराना प्‍याज का स्‍टॉक समाप्‍त हो जाना और नई खरीफ फसल की आवक कम होना है। देश में कुल प्‍याज फसल का 40 फीसदी उत्‍पादन खरीफ सीजन में होता है। हालांकि, खरीफ फसल को स्‍टोर नहीं किया जा सकता है। महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश, बिहार और गुजरात प्‍याज पैदा करने वाले देश के प्रमुख राज्‍य हैं।

 

मिनिस्‍ट्री के आंकड़ों की बात की जाए तो राजधानी दिल्‍ली में अप्रैल में रिटेल बाजार में प्‍याज की कीमत 15 रुपए प्रति किलो थी। जुलाई में यह धीरे-धीरे बढ़कर 35 रुपए प्रति किलो तक हो गए और अक्‍टूबर अंत तक यह भाव बढ़कर 50 रुपए से ज्‍यादा हो गए हैं। लोकल वेंडर क्‍वालिटी के हिसाब से 70 रुपए प्रति किलो तक प्‍याज दिल्‍ली में बेच रहे हैं।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट