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  • India suffered 1100 percent loss in 10 years due to FTAs with RCEP countries

व्यापार /आरसेप देशों से एफटीए के कारण 10 साल में भारत का नुकसान 1,100 फीसदी बढ़ा

  • गोयल ने कहा, आरसेप को खारिज करने के बाद अब कई एफटीए की समीक्षा शुरू
  • कोरिया,जापान मलेशिया जैसे देशों से एफटीए की वजह से भारत को कई सेक्टर में नुकसान 
  • कांग्रेस के राज में हुए थे इन देशों से एफटीए

Moneybhaskar.com

Nov 06,2019 12:29:48 PM IST

मनी भास्कर. रीजनल कंप्रेहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसेप) से जुड़े देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) होने की वजह से व्यापार में भारत का नुकसान 2004-2014 के दौरान 1,100 फीसदी बढ़ा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को बताया कि वर्ष 2004 में आरसेप देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 7 अरब डॉलर का था जो वर्ष 2014 में बढ़कर 78 अरब डॉलर हो गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के राज में ये एफटीए किए गए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में कई देशों के साथ जो एफटीए किए गए उससे भारत को फायदा नहीं हुआ। उल्टा भारत को व्यापारिक नुकसान हुआ।

प्रभावित हुआ भारतीय व्यापार

उन्होंने बताया कि कोरिया, जापान, मलेशिया जैसे देशों के साथ जो एफटीए हुआ उसके तहत भारत के हित को सुरक्षित नहीं रखा गया। भारत को इन देशों के बाजार की जो उपलब्धता मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। वहीं, भारत के ऐसे कई सेक्टर को इन देशों के लिए खोल दिए गए जिससे भारतीय व्यापार प्रभावित हुए। गोयल ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय इन देशों के साथ किए गए एफटीए की समीक्षा करेगा। कोरिया के साथ हुए एफटीए की समीक्षा शुरू हो गई है। जापान भी समीक्षा के लिए तैयार हो गया है।

मोदी सरकार से पहले ही 74% उत्पादों से हटाया गया आया

गोयल ने बताया कि मोदी सरकार से पहले आसियान देशों के साथ जो एफटीए किया गया उसके तहत भारत ने 74 फीसदी उत्पादों को आयात शुल्क से मुक्त कर दिया। वहीं इंडोनेशिया ने सिर्फ 50 फीसदी उत्पादों के आयात को शुल्क मुक्त किया जबकि उस समय इंडोनेशिया की आर्थिक हालत भारत से बेहतर थी। उन्होंने कहा कि आरसेप समझौते पर भारत ने भारत के किसान, कारोबार व व्यापार के हित को देखते हुए नहीं किया क्योंकि उस समझौते में कई चीजें भारत के हित की नहीं थी।

भारत को नहीं बनने देंगे डंपिंग ग्राउंड

उन्होंने कहा कि व्यापारिक या राजनैतिक रिश्तों के लिए दरवाजे कभी बंद नहीं होते, लेकिन हम किसी भी देश को भारत को डंपिंग ग्राउंड बनाने की इजाजत नहीं देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही भारत यूरोपीय यूनियन के साथ एफटीए को लेकर फिर से बातचीत शुरू कर सकता है। ईयू के साथ एफटीए होने से भारत को कई क्षेत्र में व्यापारिक लाभ मिल सकते हैं।

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