विज्ञापन
Home » Economy » Foreign TradeIndia has a golden opportunity to capture China's $ 3.96 billion business

ट्रेड वार / चीन के 3.96 अरब डॉलर के व्यापार पर कब्जा जमाने का भारत के पास सुनहरा मौका

अमेरिकी-चीन ट्रेड वार से भारतीय टेक्सटाइल को होगा फायदा, कपड़ा निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना

India has a golden opportunity to capture China's $ 3.96 billion business

नई दिल्ली. अमेरिका-चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार से भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री की चांदी हो सकती है। अभी चीन अमेरिका को करीब 3.9 अरब डॉलर मूल्य का सिल्क, कॉटन, ऊन समेत 10 टेक्सटाइल प्रोडक्ट निर्यात करता है। ट्रेड वार के चलते अमेरिका ने इन सभी उत्पादों पर 25 प्रतिशत की टैरिफ लगा दी है। इससे अमेरिका में यह सामान महंगे हो जाएंगे। इससे बचने के लिए अमेरिकन कंपनियां भारत की तरफ रुख कर सकती है। जबकि भारत भी इस मौके को अपने पक्ष में भुना कर वस्त्र व्यापार बढ़ा सकता है। कंफडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) ने यह अनुमान जताया है। 

 

10 टेक्सटाइल उत्पादों पर फोकस 


 सीआईटीआई के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के कारण अमेरिका ने 200 अरब डॉलर के व्याापार  पर अतिरिक्त टैरिफ 25% तक बढ़ा दिया है। इसमें 10 टेक्सटाइल उत्पाद भी शामिल है। इस सूची का विश्लेषण करने पर भारत वस्त्र उत्पादों के निर्यात पर अपनी धाक जमा सकता है। भारत के लिए यह वृद्धि लाभकारी होगी।

यह भी पढ़ें : 24 घंटे सातों दिन कर सकेंगे पैसे का ऑनलाइन ट्रांसफर, आरबीआई ला रहा है नया ट्रांजेक्शन नियम


 

अभी चीन की तुलना में भारत की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत 

 

CITI अध्यक्ष ने उल्लेख किया कि  चीन के कपड़ा उत्पादों का मूल्य साल 2018 में लगभग 3.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका के चीन पर लगाए गए 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आयात का केवल 2% है। लेकिन इसका दूसरा पक्ष देखें तो अभी भारत से इन कपड़ा उत्पादों का संयुक्त राज्य अमेरिका का कुल आयात 2018 में लगभग 1.71 बिलियन डालर है।  यह संयुक्त राज्य अमेरिका का चीन से होने वाले आयात के मुकाबले 43% है। यानी कि चीन के बाद भारत अमेरिका को सबसे ज्यादा कपड़ा निर्यात करता है। लिहाजा, अब ज्यादा ट्रैरिफ की स्थिति में अमेरिकी आयातक चीन की बजाय कपड़ा खरीदने के लिए भारत की तरफ रूख कर सकते हैं। 

यह भी पढ़ें : अमेजन के प्लेटफार्म पर टायलेट उत्पादों पर लगी हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर, भड़के लोग, कंपनी ने हटाए प्रोडक्ट्स

 

सूती कपड़े में भारत मार सकता है बाजी 

 

सूती कपड़े के साथ ही फर्श कवरिंग, नॉनवॉवन कार्डेज, कोटेड व औद्योगिक फेब्रिक और मेनमेड फिलामेंट में सबसे ज्यादा फायदा भारत ले सकता है। चीन अभी सबसे ज्यादा अमेरिका को 737 मिलियन डालर का फ्लोर कवरिंग का निर्यात करता है जबकि भारत 906 मिलियन डॉलर का। यानी फ्लोर कवरिंग में भारत चीन से पूरी तरह से यह व्यापार छीनकर और ज्यादा मजबूत हो सकता है। भारत की कमजोर कड़ी नॉनवॉवन कार्डेज की है। इसमें भारत का निर्यात सिर्फ 95 मिलियन डालर का है जबकि चीन का 709 मिलियन डालर का। यानी यदि इस सेक्टर में भारतीय कंपनियां ध्यान दे तो अमेरिका की बड़ी मांग को पूरा किया जा सकता है। 

यह भी पढ़ें : आईटी सेक्टर में फिर बहार, आठ साल बाद सबसे ज्यादा 78500 नौकरियां मिलीं


रोजगार के साथ कपास की उपज पैदा करने वाले किसानों को फायदा 


भारत में अभी भी टेक्सटाइल उद्योग दो करोड़ लोगों को रोजगार देता है। सूती कपड़े के लिए किसान कपास की उपज पैदा करते हैं। यदि निर्यात बढ़ता है तो कपास का किसानों को ज्यादा उपज मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। 

यह भी पढ़ें : चीनी मोबाइल कंपनियों की वजह से भारत की चार कंपनियां पर ताले जड़े
 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन
Don't Miss