ट्रेड वार /चीन के 3.96 अरब डॉलर के व्यापार पर कब्जा जमाने का भारत के पास सुनहरा मौका

money bhaskar

May 17,2019 06:39:24 PM IST

नई दिल्ली. अमेरिका-चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार से भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री की चांदी हो सकती है। अभी चीन अमेरिका को करीब 3.9 अरब डॉलर मूल्य का सिल्क, कॉटन, ऊन समेत 10 टेक्सटाइल प्रोडक्ट निर्यात करता है। ट्रेड वार के चलते अमेरिका ने इन सभी उत्पादों पर 25 प्रतिशत की टैरिफ लगा दी है। इससे अमेरिका में यह सामान महंगे हो जाएंगे। इससे बचने के लिए अमेरिकन कंपनियां भारत की तरफ रुख कर सकती है। जबकि भारत भी इस मौके को अपने पक्ष में भुना कर वस्त्र व्यापार बढ़ा सकता है। कंफडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) ने यह अनुमान जताया है।

10 टेक्सटाइल उत्पादों पर फोकस


सीआईटीआई के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के कारण अमेरिका ने 200 अरब डॉलर के व्याापार पर अतिरिक्त टैरिफ 25% तक बढ़ा दिया है। इसमें 10 टेक्सटाइल उत्पाद भी शामिल है। इस सूची का विश्लेषण करने पर भारत वस्त्र उत्पादों के निर्यात पर अपनी धाक जमा सकता है। भारत के लिए यह वृद्धि लाभकारी होगी।

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अभी चीन की तुलना में भारत की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत

CITI अध्यक्ष ने उल्लेख किया कि चीन के कपड़ा उत्पादों का मूल्य साल 2018 में लगभग 3.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका के चीन पर लगाए गए 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आयात का केवल 2% है। लेकिन इसका दूसरा पक्ष देखें तो अभी भारत से इन कपड़ा उत्पादों का संयुक्त राज्य अमेरिका का कुल आयात 2018 में लगभग 1.71 बिलियन डालर है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका का चीन से होने वाले आयात के मुकाबले 43% है। यानी कि चीन के बाद भारत अमेरिका को सबसे ज्यादा कपड़ा निर्यात करता है। लिहाजा, अब ज्यादा ट्रैरिफ की स्थिति में अमेरिकी आयातक चीन की बजाय कपड़ा खरीदने के लिए भारत की तरफ रूख कर सकते हैं।

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सूती कपड़े में भारत मार सकता है बाजी

सूती कपड़े के साथ ही फर्श कवरिंग, नॉनवॉवन कार्डेज, कोटेड व औद्योगिक फेब्रिक और मेनमेड फिलामेंट में सबसे ज्यादा फायदा भारत ले सकता है। चीन अभी सबसे ज्यादा अमेरिका को 737 मिलियन डालर का फ्लोर कवरिंग का निर्यात करता है जबकि भारत 906 मिलियन डॉलर का। यानी फ्लोर कवरिंग में भारत चीन से पूरी तरह से यह व्यापार छीनकर और ज्यादा मजबूत हो सकता है। भारत की कमजोर कड़ी नॉनवॉवन कार्डेज की है। इसमें भारत का निर्यात सिर्फ 95 मिलियन डालर का है जबकि चीन का 709 मिलियन डालर का। यानी यदि इस सेक्टर में भारतीय कंपनियां ध्यान दे तो अमेरिका की बड़ी मांग को पूरा किया जा सकता है।

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रोजगार के साथ कपास की उपज पैदा करने वाले किसानों को फायदा


भारत में अभी भी टेक्सटाइल उद्योग दो करोड़ लोगों को रोजगार देता है। सूती कपड़े के लिए किसान कपास की उपज पैदा करते हैं। यदि निर्यात बढ़ता है तो कपास का किसानों को ज्यादा उपज मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

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