संकट /भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित करेगी चीन की मंदी

  • दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में मंदी के संकेत हैं।

Saurabh Kumar Verma

Saurabh Kumar Verma

Jul 24,2019 02:00:21 PM IST

नई दिल्ली. चीन की मंदी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को मंद कर सकती है। एपिक रिसर्च के सीईओ मुस्तफा नदीम ने मनी भास्कर को को बताया कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में मंदी के संकेत हैं। हालांकि, बीजिंग ऐसे किसी भी हालात से इनकार कर रहा है, लेकिन वहां से जो आधिकारिक आंकड़े जारी हो रहे हैं, उनसे तो कम से कम ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए यह शुभ संकेत नहीं है।

जनवरी 2018 में चीन की आर्थिक विकास दर 6.8 प्रतिशत रही

दरअसल, चीन जैसी भारी-भरकम अर्थव्यवस्था को लेकर इस तरह के काल्पनिक परिदृश्य का असर न केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में भारत पर होगा, बल्कि पूरी दुनिया इससे प्रभावित होगी। चीन की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दर पिछली कुछ तिमाहियों से लगातार घट रही है। जनवरी, 2018 में जहां चीन की आर्थिक विकास दर 6.8 प्रतिशत थी, वहीं अभी यहघटकर 6.2 प्रतिशत रह गई है। यह चिंताजनक स्थिति है। इसका पहला कारण यह वास्तविकता है कि पूरी दुनिया की जीडीपी में चीन की हिस्सेदारी तकरीबन 19 प्रतिशत है। साल 2012 में जब चीनकी अर्थव्यवस्था सालाना 15 प्रतिशत की रफ्तार से विस्तार कर रही थी, तब उम्मीद जताई जा रही थी कि साल 2024 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 21 प्रतिशत से ऊपर निकल जाएगी।

प्रभावित होगी कमोडिटी की आपूर्ति

चीन में मंदी को लेकर चिंता की दूसरी वजह यह है कि वहां इसका जो असर होगा उसकी तपिश पूरी दुनिया में महसूस की जाएगी। असल में महत्वपूर्ण कमोडिटी की समग्र आपूर्ति श्रृंखला के लिए चीन की अर्थव्यवस्था काफी मायने रखती है। तांबा समेत सभी धातुएं और कच्चा तेल इनमें शामिल हैं। इस लिहाज से इन सेक्टरों में कीमतों पर निश्चित रूप से इसका असर होगा। भारतीय बाजार में बेहद सस्ती कीमतों पर कमोडिटी की डंपिंग इसकी नजीर होगी। ऐसी संभावित स्थिति को भांपते हुए सरकार आयात पर तरह-तरह के शुल्क लगातार घरेलू बाजार को बचाने का प्रयास कर रही है।

भारत के लिए बड़ा निर्यात बाजार

कुल मिलाकर चीन की मंदी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पूरी तरह फायदा पहंुचाने वाली साबित नहीं होगी। इन सबके ऊपर यदि हम मुख्य निर्यात पार्टनरों पर गौर करें तो चीन भारत के लिए चौथासबसे बड़ा निर्यात बाजार है। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय कंपनियों पर एक हद तक इसका असर होगा। इस पूरे परिदृश्य में भारत के लिए एकमात्र फायदे की बात यह हो सकती है कि चीनकी मंदी से परेशान कुछ कंपनियां अपने-अपने कारखाने और कारोबार भारत में शिफ्ट करना शुरू कर दें।

वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम से प्रभावित होता है भारतीय बाजार

जहां तक इक्विटी का सवाल है, भारतीय शेयर बाजार काफी हद तक वैश्विक आर्थिक घनाक्रम से जुड़े हुए हैं। खास तौर पर पिछले कुछ वर्षों से भारतीय इक्विटी मार्केट पर बाकी दुनिया की घटनाओंका ज्यादा असर देखा जा रहा है। जाहिर है, यदि चीन में मंदी आती है तो भारतीय शेयर बाजार पर इसका असर होगा। खास तौर पर मेटल्स, तेल खनन और स्टील जैसे सेक्टरों की कंपनियों के शेयरोंपर निश्चित रूप से असर देखा जाएगा। चूंकि कमोडिटी की कीमतें प्रभावित होंगी, लिहाजा हमारा मानना है कि इसका नकारात्मक असर इन सेक्टरों पर नजर जाएगा। इसके अलावा देश के छोटे-मझोले उद्योग (एमएसएमई), जो निर्यात करते हैं, उनके कारोबार पर भी चीन की मंदी का असर होगा।

प्रभावित होगा भारतीय शेयर बाजार

चीन की मौजूदा स्थिति में यदि सुधार नहीं होता है तो ऐसे हालात में भारतीय शेयर बाजार काफी प्रभावित होगा। हमारा मानना है कि घरेलू बाजार दो अंकों में करेक्शन (गिरावट) देखेगा। वैश्विकअर्थव्यस्था में इस हलचल का असर मेटल्स जैसे सेक्टर पर ज्यादा नजर आएगा। कमजोर मांग और कीमतें कम होने के कारण तगड़ी प्रतिस्पर्धा इसकी वजह होगी। कुल मिलाकर इस सेक्टर कीकंपनियों की आय और मुनाफा प्रभावित होगा। इस लिहाज से चीन में मंदी के कारण मध्यम अवधि में भारतीय इक्विटी मार्केट पर कुछ नकारात्मक असर जरूर होगा।

कमजोर पड़ती मजबूत अर्थव्यवस्था की दीवार

- चीन की आर्थिक विकास दर घटकर 6.2 प्रतिशत रह गई है

- जनवरी, 2018 में 6.8 प्रतिशत थी चीन की विकास दर

- 2012 में 15 प्रतिशत तक गई थी चीन की जीडीपी वृद्धि दर

- पूरी दुनिया की जीडीपी में चीन की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत है

- 2024 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से ऊपर निकलने का अनुमान

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