बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Foreign Tradeमोदी की इस पॉलिसी से डरा अमेरिका, दूसरे देशों को भी भारत के खिलाफ लगा भड़काने

मोदी की इस पॉलिसी से डरा अमेरिका, दूसरे देशों को भी भारत के खिलाफ लगा भड़काने

भारत के चावल और गेहूं से डर रहा है अमेरिका

1 of

वाशिंगटन। अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह अपने गेहूं और चावल किसानों को भारी मात्रा में सब्सिडी उपलब्ध करा रहा है। इतना ही नहीं उसने कहा कि दूसरे देशों को भारत की 'व्यापार तोड़ने वाली पॉलिसी’ को लेकर चिंतित होने की जरूरत है। चीफ एग्रीकल्चर नेगोशिएटर ऑफिस के यूएस ट्रेड रीप्रेजेंटेटिव (USTR)  ग्रेग डाड ने यह बयान एक कांग्रेस सम्मेलन याचिका के दौरान दिया। 

 

डाड ने कानून निर्माताओं को बताया कि दुनिया भर के प्रत्येक चावल या गेहूं पैदा करने वाले देशों को भारत के ट्रेड डिस्टॉर्ट डोमेस्टिक सपोर्ट से होने वाले प्रभावों को लेकर चिंतित होना चाहिए। गौरतलब है कि मई में डाड ने डब्ल्यूटीओ की एग्रीकल्चर समिति को अमेरिका का पहला काउंटर नोटिफिकेशन दिया था जहां चावल और गेहूं के लिए भारत के मार्केट प्राइस सपोर्ट पर चिंता जाहिर की थी। 

 

अमेरिका का क्या है आरोप

 

डाड ने आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका का अनुमान है कि साल 2010 से 2014 के बीच भारत की ओर से चावल किसानों को प्रोडक्शन वैल्यू का 74 फीसदी से 84.2 फीसदी MSP सपोर्ट दिया गया। वहीं, गेहूं किसानों को प्रोडक्शन वैल्यू का 60.1 फीसदी से 68.5 फीसदी MSP सपोर्ट दिया गया है। जबकि भारत के पास किसी एक कमोडिटी के प्रोडक्शन वैल्यू का केवल 10 फीसदी तक सपोर्ट देने की अनुमति है।     

 

दुनिया में सबसे ज्यादा चावल निर्यात करता है भारत

 

उन्होंने कहा कि बीते पांच साल में भारत ने 5.3 अरब डॉलर से 8 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया है जोकि दुनिया में किसी भी देश से ज्यादा है। इसी दौरान भारत का वैश्विक गेहूं निर्यात 7 लाख डॉलर से 1.9 अरब डॉलर के बीच रहा। 

 

आगे पढ़ें...

 

भारत से चर्चा कर रहा है अमेरिका

 

उसी समिति के सामने ट्रेड एंड फॉरेन एग्रीकल्चर अफेयर के अंडर सेक्रेटरी ऑफ एग्रीकल्चर टेक मैककिने ने बताया कि हाल ही में उन्होंने भारत के अपने दौरे में वरिष्ठ अधिकारियों से विज्ञान आधारित खाद्य सुरक्षा नीतियों की अहमियत और अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देने पर चर्चा की है। 

 

आगे पढ़ें...

 

अमेरिका के कई किसानों ने जताई चिंता 

 

डाड ने कहा कि अपने कार्यभार के पहले छह माह के दौरान मैंने स्टेकहोल्डर्स के साथ 150 बार मीटिंग की और कई सौ किसानों,  फॉर्म लगाने वालों और एग्री बिजनेस प्रतिनिधियों से मिला। सभी ने मुझे ट्रैरिफ से पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताया।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट