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भारत के एनर्जी क्षेत्र में 18 लाख करोड़ के नि‍वेश की जरूरत, अमेरिका ले सकता है बड़ा फैसला

भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के काफी अवसर हैं।

Immense opportunities of cooperation between India US in energy sector
नई दि‍ल्‍ली, फेडरल एनर्जी रेगुलेटरी कमिशन (एफईआरसी) के सदस्य नील चटर्जी ने भारत के पहले दौरे से लौटने के बाद कहा कि आने वाले दशकों में भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में नि‍वेश कर काफी धन कमाया जा सकता है। लेकि‍न इसके लि‍ए अमेरि‍का को भारत में करीब 280 अरब डॉलर (18 लाख करोड़) नि‍वेश करना होगा। 
 
एफईआरसी के पहले भारतीय-अमेरिकी सदस्य चटर्जी ने कहा कि‍ भारत में अमेरिका के व्‍यापार के लि‍ए बहुत अवसर हैं। ये अवसर न केवल हमारे ईंधन बेचने के लिए हैं बल्कि प्रौद्योगिकी और पूंजी मुहैया कराने के लिए भी हैं। उन्होंने कहा कि‍ भारतीय ग्रिडों को मॉडर्न बनाने,  ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमि‍शन और डि‍स्‍ट्रीब्‍यूशन में 280 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है। 
 

भारत के अनुभव से सीखना चाहते हैं 

 
चटर्जी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन प्राकृतिक गैस उत्पादन बढ़ाने के भारतीय प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। चटर्जी ने भारत सरकार एवं राज्यों की महत्वाकांक्षी ऊर्जा नीति लक्ष्यों का जिक्र करते हुए कहा कि एफईआरसी (केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग) ऊर्जा नीति योजनाओं के क्रियान्वयन के भारतीय सरकार के तरीकों से सीखने को उत्सुक है। 
 

2 एक्‍सपोर्टर्स कर चुके हैं 2 लाख करोड़ के कॉन्‍ट्रैक्‍ट 

 
उन्‍होंने बताया कि‍ अमेरि‍का के 2 बड़े गैस एक्‍सपोर्टर्स चेनेयर और डोमि‍नियन ने अमेरिका के प्राकृतिक गैस के सालाना 280 बि‍लि‍यन क्‍यूबि‍क फुुट आपूर्ति‍ के लि‍ए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ कॉन्‍ट्रैक्‍ट कि‍या है। उन्‍होंने बताया कि‍ सि‍र्फ ये दो कॉन्‍टैक्‍ट की कीमत ही 32 बिलियन अमरीकी डॉलर (2 लाख करोड़ रुपए) है। 
 

प्राकृतिक गैस का बाजार हर साल 4.6 फीसदी बढ़ेगा

 
वहीं, अन्य अमेरिकी एक्‍सपोर्टर्स ने भी भारतीय प्राकृतिक गैस बाजार पर ध्यान केंद्रित किया है। क्‍योंकि‍ अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा संघ ने भारत में 2040 तक प्राकृतिक गैस की खपत के सालाना 4.6 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है।
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