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बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Foreign Tradeक्रूड प्राइस को मिलकर कंट्रोल कर सकते हैं भारत-चीनः धर्मेंद्र प्रधान

क्रूड प्राइस को मिलकर कंट्रोल कर सकते हैं भारत-चीनः धर्मेंद्र प्रधान


नई दिल्ली. तेल की कीमतों पर अरब देशों की मोनोपॉली को खत्म करने के लिए भारत और चीन साथ आते दिख रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तेल की ज्यादा खपत वाले देशों को जल्द ही ज्यादा अधिकार मिलेंगे और इस दिशा में भारत-चीन मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर तेल की कीमतों पर असर डाल सकते हैं। प्रधान का बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि एक दिन पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में तेल की वाजिब कीमतों की वकालत की थी।


भारत-चीन साथ काम करने को राजी

प्रधान इंटरनेशन एनर्जी फोरम 2018 के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत और चीन एनर्जी के क्षेत्र में मिलकर काम करने के लिए राजी हो गए हैं। अगली इंटरनेशनल एनर्जी फोरम चीन में होगी, जिसमें कई अहम मुद्दों पर बात होगी।

प्रधान ने कहा कि भारत की पब्लिक सेक्टर की कंपनियां और चीन इस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए राजी हो गए हैं। आईओसी ने संयुक्त रूप से तेल की सप्लाई को प्रभावित करने के लिए चीन की कंपनियों से बातचीत की है।


पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दी सफाई

प्रधान उस खबर पर भी सफाई दी, जिसके मुताबिक सरकार ने तेल कंपनियों से कीमतें घटाने के लिए कहा है। प्रधान ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी टालने के लिए नहीं कहा गया है। सरकार के इस बयान से आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के स्टॉक्स पर खासा प्रेशर देखने को मिल रहा था।

 

मोदी ने ओपेक देशों को दिया था यह संदेश

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी दुनि‍या को तेल सप्‍लाई करने वाले ओपेक देशों को संदेश देते हुए कहा था कि गैर वाजि‍ब तरीकों से कच्‍चे तेल की कीमतों को प्रभावि‍त करना ठीक नहीं है और इसकी वाजि‍ब कीमत तय करने के लि‍ए विश्‍व स्‍तर पर सहमति बननी चाहि‍ए। 

मोदी ने कहा कि दुनि‍या लंबे अर्से से तेल की कीमतों को रोलर कोस्‍टर पर देख रही है। हमें उत्‍पादक और उपभोक्‍ता दोनों के हि‍तों को देखते हुए इसकी कीमतों को लेकर समझदारी भरा फैसला लेना चाहि‍ए। 

 

दोनों पक्ष तरक्‍की करें 

तेल उपभोग के मामले में भारत दुनि‍या का तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तेल उत्‍पादक देशों के हि‍त में है कि अन्‍य अर्थव्‍यवस्‍थाएं भी स्‍थि‍रता के साथ तरक्‍की करती रहें। उन्‍होंने कहा कि क्‍यों न हम इस प्‍लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल वि‍श्‍व सहमति बनाने के  लि‍ए करें, जि‍समें तेल और गैस की वाजि‍ब कीमतें तय की जाएं।

 

मोदी ने कहा कि पि‍छले साल एक मैंने एक एजेंसी द्वारा बनाई गई एनर्जी रि‍पोर्ट को पढ़ा। इसके मुताबि‍क, आने वाले 25 वर्षों में ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की भूमिका काफी महत्‍वपूर्ण हो जाएगी। अगले 25 साल तक भारत की ऊर्जा खपत 4.2 फीसदी की दर से बढ़ेगी। यह रफ्तार दुनि‍या में सबसे तेज होगी। 

 

कि‍फायती ऊर्जा आज की जरूरत 

पीएम मोदी ने बुधवार को कहा कि अब सौर ऊर्जा पहले के मुकाबले ज्‍यादा कि‍फायती हो गई है, धीरे-धीरे बि‍जली हासि‍ल करने के लि‍ए कोयले का इस्‍तेमाल खत्‍म होगा। मोदी ने कहा कि स्‍वच्‍छ और कि‍फायती ऊर्जा आज की जरूरत है और समझदारी से इसकी कीमत तय करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि‍ भारत की ऊर्जा भवि‍ष्‍य के चार स्‍तंभ हैं - ऊर्जा उपलब्‍धता, ऊर्जा क्षमता, ऊर्जा स्‍थि‍रता और ऊर्जा सुरक्षा। 

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