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ट्रेड वार के बीच 5 महीनेे में पहली बार घटा एक्सपोर्ट, ट्रेड डेफिसिट बढ़ा

ग्लोबल ट्रेड की चिंताओं और अमेरिका द्वारा की जा रही सख्ती के बीच भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में गिरावट आई है।

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नई दिल्ली. ग्लोबल ट्रेड की चिंताओं और अमेरिका द्वारा की जा रही सख्ती के बीच 5 महीनों में पहली बार भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में गिरावट दर्ज की गई। जेम्स एंड ज्वैलरी, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में कमी के चलते मार्च में एक्सपोर्ट 0.66 फीसदी घटकर 29.11 अरब डॉलर रह गया। हालांकि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान एक्सपोर्ट में 9.78 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई। 
हालांकि इंपोर्ट 7.15 फीसदी बढ़कर 42.8 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इसका असर ट्रेड डेफिसिट पर पड़ा, जो 10.65 अरब डॉलर से बढ़कर 13.69 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
 
 
फियो ने जाहिर की चिंता
एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट के इन आंकड़ों पर फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) ने चिंता जाहिर की। फियो ने कहा कि जेम्स एंड ज्वैलरी, टेक्सटाइल, जूट और एग्री प्रोडक्ट्स जैसे लेबर इंटेंसिव सेक्टर्स में एक्सपोर्ट ग्रोथ में सुस्ती चिंता की बात है। फियो ने कहा कि ये सेक्टर इन दिनों लिक्विडिटी की समस्या से जूझ रहे हैं, क्योंकि बैंकों और लेंडिंग एजेंसियों ने नॉर्म्स सख्त कर दिए हैं। 

 

पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और जेम्स ज्वैलरी ने दिया झटका

-कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान एक्सपोर्ट 9.78 फीसदी बढ़कर 302.84 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान एक्सपोर्ट 275.85 अरब डॉलर रहा था।
-इससे पहले एक्सपोर्ट में अक्टूबर, 2017 के दौरान गिरावट दर्ज की गई थी, जब एक्सपोर्ट में 1.12 फीसदी की कमी आई थी।
-मार्च में एक्सपोर्ट को सबसे ज्यादा झटका पेट्रोलियम प्रोडट्क्स और जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर ने दिया। 
-मार्च, 2018 में सालाना आधार पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट 13.2 फीसदी घटकर 3.26 अरब डॉलर रह गया।
-वहीं जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर का एक्सपोर्ट 16.6 फीसदी घटकर 3.43 अरब डॉलर रह गया। 
 
 
इंपोर्ट में भारी बढ़ोत्तरी
-वहीं इंपोर्ट 7.15 फीसदी बढ़कर 42.8 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। मार्च में समाप्त वित्त वर्ष की बात करें तो इस दौरान इंपोर्ट 19.6 फीसदी बढ़कर 459.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

-मार्च के दौरान ऑयल इम्पोर्ट 13.92 फीसदी बढ़कर 11.11 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। वहीं नॉन ऑयल इंपोर्ट 4.96 फीसदी बढ़कर 31.69 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
-वित्त वर्ष 2017-18 की बात करें तो ऑयल इंपोर्ट 25.47 फीसदी बढ़कर 109.11 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

 

 
ट्रेड डेफिसिट 4 साल के हाई पर
-वहीं वित्त वर्ष के दौरान इंपोर्ट में बढ़ोत्तरी से ट्रेड डेफिसिट को तगड़ा झटका लगा, जो बढ़कर 156.83 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 108.5 अरब डॉलर रहा था।
-इस प्रकार ट्रेड डेफिसिट 4 सालके हाई पर पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 में ट्रेड डेफिसिट 190.30 अरब डॉलर रहा था।
 
 
गोल्ड इंपोर्ट में 40 फीसदी की कमी
-मार्च, 2018 में गोल्ड का इंपोर्ट 40.31 फीसदी घटकर 2.49 अरब डॉलर रह गया, जबकि बीते साल समान अवधि में यह आंकड़ा 4.17 अरब डॉलर रहा था। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) कम रहने का अनुमान है।
-इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्लोबल मार्केट में प्रिसीयस मेटल की कीमतों में नरमी इसकी एक वजह हो सकती है। दुनिया में गोल्ड के सबसे बड़े इंपोर्टर भारत में इसकी डिमांड काफी हद तक ज्वैलरी इंडस्ट्री की डिमांड पर निर्भर करती है।
 
 
 
 
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