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चिदंबरम पर चुनाव नतीजों के दिन 7 कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप


नई दिल्ली. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को कांग्रेस पर बैंकों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपीए ने अपनी सरकार के दौरान हमेशा नियमों को ताक पर रखा, जिससे केंद्र सरकार को अब तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर 2014 में 7 कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि किसके कहने पर लोकसभा चुनाव के नतीजों के दिन चिदंबरम ने 7 कंपनियों को 80-20 स्कीम के तहत फायदा दिया गया था। इनमें से एक कंपनी गीतांजलि जेम्स भी थी। बता दें कि इस कंपनी के मालिक मेहुल चौकसी पीएनबी फ्रॉड केस में मुख्य आरोपी हैं।

 
 
कांग्रेस की 80-20 स्कीम से कंपनियों को पहुंचा था फायदा
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- "अगस्त 2013 में एक स्कीम थी 80-20। चिदंबरम और राहुल गांधी को बताना चाहिए कि 16 मई 2014 यानी लोकसभा चुनाव नतीजों के दिन 7 प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऑर्डर क्यों पास किया गया।"
 

राउंड ट्रिपिंग का आरोप
उन्‍होंने बताया - "यूपीए सरकार में करेंट अकाउंट डेफिसिटी बहुत गंभीर हो गया था। लोगों को गोल्ड को इम्पोर्ट करने का अवसर कम मिले, ताकि फॉरेन एक्सचेंज पर दबाव हो। इसलिए सिर्फ MMTC और पीएसयू को ही गोल्ड को इम्पोर्ट करने का अधिकार मिले। उसको बदलकर कहा गया कि कुछ प्राइवेट कंपनियों को भी इसका फायदा मिले। अब इस स्कीम में ऐसा था कि आप बाहर से सोना लाइए और उसको ज्वैलरी बनाकर एक्सपोर्ट करिए। उसमें सामने आया कि ज्वैलरी के नाम पर सिर्फ बड़ी-बड़ी सोने की चूड़ियां बनती थीं और बाहर चली जाती थीं। यानी राउंड ट्रिपिंग होती थी। इन्हें लग गया था कि अब सरकार जाने वाली है। इसलिए यह फैसला लिया गया। इनमें कंपनियों में गीतांजलि जेम्स भी शामिल थी।"
 
2013 में लॉन्च हुई थी 80-20 स्कीम
बता दें कि यूपीए ने अगस्त 2013 में एक स्कीम लॉन्च की थी 80-20। सरकार की कोशिश थी कि सोने के आयात पर रोक लगाई जा सके, ताकि करेन्ट अकाउंट डेफिसिट को संभाला जा सके। स्कीम के मुताबिक, प्राइवेट ट्रेडर्स को इम्पोर्टेड सोने का 20% एक्सपोर्ट करने की अनुमति दी गई थी। ये ट्रेडर्स बाकी बचे 80% सोने को देश के बाजार में बेच सकते थे। इस स्कीम को एनडीए सरकार ने 2014 में खत्म कर दिया था।
 
सारे एनपीए कांग्रेस की देन
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “हम कई बार बता चुके हैं कि हमारी सरकार में एक भी ऐसा लोन नहीं दिया गया जो एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) हो। 2008 में बैंकों की ओर से लोगों को जो लोन दिया गया वो 18.06 लाख करोड़ था। यूपीए शासन के 6 साल में मार्च 2014 तक ये बढ़कर 52.15 लाख करोड़ हो गया।” तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री चिदंबरम पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा कि एक अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री थे और एक सुपर अर्थशास्त्री उनके वित्त मंत्री थे। इसके बावजूद हर किसी के हस्तक्षेप से बैंकिंग सिस्टम बुरी तरह उलझ गया।
 
 
 

 

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