Home » Economy » Foreign TradeIndia and Pakistan trade can reach up to $37 billion if trade policies are eased

भारत-पाकिस्तान के बीच हो सकता है 2.62 लाख करोड़ का व्यापार, पीछे रह जाएंगे ब्रिटेन एवं फ्रांस

चार रुकावटों को दूर करके व्यापार का नया कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं दोनों देश

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नई दिल्ली.

अगर वर्ल्ड बैंक की मानें ताे भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार को 37 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) तक बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच सिर्फ 2 अरब डॉलर (14 हजार करोड़ रुपए) का व्यापार हो रहा है। अगर दोनों देश अपने व्यापार को बढ़ाने में सफल हो जाते हैं तो ब्रिटेन और फ्रांस को भी पीछे छोड़ देंगे। हालांकि वर्ल्ड ने यह भी कहा कि ऐसा तभी हो सकता है जब भारत और पाकिस्तान अपने बीच की बाधाओं को हटाने के लिए राजी होंगे।

 

वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट "Glass Half Full: Promise of Regional Trade in South Asia” में ऐसी पांच बाधाओं का जिक्र किया है जो दोनों देशों के व्यापार को आगे नहीं बढ़ने दे रही हैं। ये हैं- टैरिफ व उसपर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क, शुल्क तय करने के जटिल व अपारदर्शी उपाय, व्यापार करने की ऊंची लागत और भरोसे की कमी।

 

करतारपुर गलियारा बढ़ाएगा भरोसा

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले अर्थशास्त्री संजय कथूरिया के मुताबिक आपसी भरोसे के दम पर व्यापार फलता-फूलता है। इससे एक-दूसरे पर निर्भरता बढ़ती है और शांति कायम होती है। ऐसे में करतारपुर गलियारे के खुलने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को अपनी पूरी क्षमता के मुताबिक व्यापार करने की शुरुआत कुछ चुनिंदा उत्पादों के आयात-निर्यात को आसान बनाकर करनी चाहिए।

 

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बढ़ानी होगी एयर कनेक्टिविटी

संजय कथूरिया के मुताबिक दक्षिण एशियाई देशों से पाकिस्तान की एयर कनेक्टिविटी बेहद कम है। भारत और अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान से सप्ताह में सिर्फ 6-6 फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं। श्रीलंका और बांग्लादेश के लिए के लिए 10-10 उड़ानें हैं लेकिन नेपाल जाने के लिए सिर्फ एक साप्ताहिक उड़ान है। मालदीव और भूटान के लिए काेई फ्लाइट नहीं उड़ती है। जबकि भारत से हर हफ्ते श्रीलंका जाने वाली फ्लाइट्स की संख्या 147 है। बांग्लादेश के लिए 67, मालदीव के लिए 32, नेपाल के लिए 71, अफगानिस्तान के लिए 22 और भूटान के लिए 22 हैं। ऐसे में पाकिस्तान को अपनी कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए काफी काम करना होगा।

 

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करने होंगे बड़े बदलाव

कथूरिया ने बताया कि दोनों देशाें को अपनी व्यापार नीतियों में बड़े बदलाव करने चाहिए। जैसे वाघा-अटारी सीमा पर व्यापार पर लगा प्रतिबंध हटाना चाहिएबॉर्डर पर इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज की अनुमति मिलनी चाहिए। इससे दोनों देशों के व्यापार में आने वाले अतिरिक्त खर्च को कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण एशिया में जो व्यापार पर लगने वाला औसत शुल्क है वह वैश्विक औसत से दोगुना है। इस टैरिफ को भी कम किया जाना जरूरी है।

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