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मई में व्‍यापार घाटा 14.62 अरब डॉलर, 4 माह में सबसे अधिक

मई में व्‍यापार घाटा बढ़ने की अहम वजह आयात में करीब 15 फीसदी की बढ़ोत्‍तरी रही।

Trade deficit widens to 4-month high of $14.62 bn in May

नई दिल्‍ली. देश का व्‍यापार घाटा इस साल मई में बढ़कर 14.62 अरब डॉलर हो गया है। यह चार महीने में सबसे ज्‍यादा है। मई में व्‍यापार घाटा बढ़ने की अहम वजह आयात में करीब 15 फीसदी की बढ़ोत्‍तरी रही। सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी गई। 

 

वाणिज्‍य मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि मई में एक्‍सपोर्ट 28.18 फीसदी बढ़कर 28.86 अरब डॉलर हो गया। वहीं इस दौरान आयात भी 14.85 फीसदी बढ़कर 43.48 अरब डॉलर के स्‍तर पर पहुंच गया। मई 2017 में व्‍यापार घाटा 13.38 अरब डॉलर रहा था। निर्यात और आयात के बीच अंतर को व्‍यापार घाटा कहा जाता है। 

 

 

तेल आयात 49%  से ज्‍यादा बढ़ा 
आंकड़ों के अनुसार, तेल आयात 49.46 फीसदी बढ़कर 11.5 अरब डॉलर हो गया। तेल का आयात बिल बढ़ने की अहम वजह अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल (क्रूड) की कीमतों में आई तेजी रही। 
 


बीते वित्‍त वर्ष चालू खाता घाटा भी बढ़ा 
वित्त वर्ष 2017-18 में चालू खाता घाटा यानी सीएडी 48.7 अरब डॉलर (करीब 3.29 लाख करोड़ रुपए) यानी जीडीपी का 1.9 फीसदी हो गया। एक साल पहले सीएडी 14.4 अरब डॉलर (करीब 97,300 करोड़ रुपए) या जीडीपी का 0.6 फीसदी था। व्यापार घाटा बढ़ने से सीएडी में यह उछाल आया। किसी अवधि में फॉरेन करंसी में कुल आय और व्यय के अंतर को चालू खाता घाटा कहते हैं।

रिजर्व बैंक के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान सीएसडी 13 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले इसी अवधि में सीएडी का स्तर 2.6 अरब डॉलर था। 2013 में सीएडी देश की जीडीपी के 5 फीसदी से भी ऊपर पहुंच गया था। इससे रुपए की कीमत में बड़ी गिरावट आई थी। 

 

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